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संघर्ष से स्टारडम तक: 5,000 रुपये लेकर भारत आईं नोरा फतेही, बनीं बॉलीवुड की ‘डांसिंग क्वीन’

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एबीसी नेशनल न्यूज | मुंबई | 7 फरवरी 2026

फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाना हर किसी के बस की बात नहीं होती, और जब कोई कलाकार विदेश से आकर बॉलीवुड में जगह बनाने का सपना देखे, तो चुनौतियां कई गुना बढ़ जाती हैं। Nora Fatehi ने इसी कठिन रास्ते को चुना और तमाम परेशानियों, अस्वीकृतियों और संघर्षों के बावजूद आज वह बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय और चर्चित डांसर के तौर पर जानी जाती हैं। ‘दिलबर दिलबर’, ‘ओ साकी साकी’ और ‘मनहारी’ जैसे सुपरहिट गानों में उनके दमदार डांस स्टेप्स और जबरदस्त एक्सप्रेशन ने उन्हें देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई। आज नोरा सिर्फ एक डांसर नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और जज़्बे की मिसाल बन चुकी हैं।

विदेशी मूल की होने के बावजूद नोरा फतेही ने कभी अपनी पृष्ठभूमि को कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर उस इंडस्ट्री में जगह बनाई, जहां हर कदम पर खुद को साबित करना पड़ता है। 6 फरवरी को जन्मी नोरा का चमकदार करियर जितना आकर्षक दिखता है, उसके पीछे उतनी ही कठिन और दर्द भरी कहानी छिपी है। भाषा की समस्या, सांस्कृतिक अंतर और परिवार से दूर रहकर संघर्ष करने की मजबूरी—इन सभी हालातों के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत किया। शुरुआती दौर में उन्हें बार-बार रिजेक्शन झेलना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया।

ग्लैमर की इस दुनिया में कदम रखने से पहले नोरा की ज़िंदगी बेहद सामान्य और संघर्षपूर्ण रही है। अपने खर्च पूरे करने के लिए उन्होंने मॉल में सेल्स गर्ल के तौर पर काम किया, वेट्रेस की नौकरी की और यहां तक कि टेलीकॉलर के रूप में भी काम किया। इस दौरान वह लॉटरी टिकट तक बेचा करती थीं, जहां सैलरी के साथ इंसेंटिव भी मिलता था। हालांकि यह नौकरी वह केवल छह महीने ही कर पाईं, क्योंकि उनका सपना इससे कहीं बड़ा था। बेहतर अवसर की तलाश में उन्होंने लगातार संघर्ष जारी रखा। यह दौर उनके लिए मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद कठिन रहा, लेकिन इसी संघर्ष ने उन्हें अंदर से और मजबूत बनाया।

नोरा फतेही ने एक इंटरव्यू में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया था कि जब वह भारत आई थीं, तब उनके पास सिर्फ 5,000 रुपये थे। कनाडा में जन्मी और पली-बढ़ी नोरा सपनों की नगरी मुंबई बेहद सीमित संसाधनों के साथ पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि वह नौ लोगों के साथ एक तीन-बेडरूम फ्लैट में रहती थीं और दो अन्य लड़कियों के साथ एक ही कमरा साझा करती थीं। हालात इतने खराब थे कि कई बार दिन में सिर्फ एक अंडा और रोटी खाकर गुजारा करना पड़ता था। उन दिनों को याद करते हुए नोरा ने कहा था कि वह अक्सर खुद से पूछती थीं—“मैं यहां क्यों आ गई?” और आज भी उन संघर्ष भरे दिनों की याद उन्हें डर से भर देती है।

संघर्ष की यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अपने शुरुआती करियर में नोरा को जो भी काम मिलता था, उसमें उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा एजेंट ले लेते थे और उनके हाथ बहुत कम पैसे आते थे। इसके बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और हर मौके को सीखने का जरिया बनाया। उन्होंने डांस को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया और खुद को लगातार बेहतर करती रहीं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और वह उन गिने-चुने कलाकारों में शामिल हो गईं, जिनका नाम आते ही शानदार डांस, जबरदस्त परफॉर्मेंस और आत्मविश्वास से भरी छवि सामने आ जाती है।

आज नोरा फतेही का सफर उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित साधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनका जीवन यह साबित करता है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर कदम चूमती है। बॉलीवुड की ‘डांसिंग क्वीन’ बनने तक का यह सफर सिर्फ एक स्टार की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की एक सच्ची और प्रेरक दास्तान है।

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