एबीसी नेशनल न्यूज | रांची | फरवरी 2026
कांग्रेस में शामिल हुए सैकड़ों नेता, बदले सियासी समीकरण
झारखंड की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। राज्य में कांग्रेस को उस वक्त बड़ी मजबूती मिली, जब बीजेपी और क्षेत्रीय दल जेएलकेएम के कई प्रभावशाली नेताओं ने सैकड़ों समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया। बीजेपी नेता आदित्य विक्रम जायसवाल के साथ-साथ जेएलकेएम के जवाहरलाल यादव और वीरेंद्र विक्रम का पार्टी छोड़ना राज्य की राजनीति में अहम मोड़ माना जा रहा है।
बीजेपी को संगठनात्मक झटका
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह घटनाक्रम बीजेपी के लिए सिर्फ एक दल-बदल नहीं, बल्कि जमीनी संगठन पर सीधा असर डालने वाला झटका है। आदित्य विक्रम जायसवाल जैसे सक्रिय नेता का कांग्रेस में जाना यह संकेत देता है कि राज्य में बीजेपी के भीतर असंतोष और बेचैनी बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर जिन नेताओं की मजबूत पकड़ मानी जाती थी, उनके पाला बदलने से पार्टी की रणनीति और कार्यकर्ता नेटवर्क दोनों प्रभावित होने की संभावना है।
जेएलकेएम की सियासी धार भी कमजोर
इस घटनाक्रम से जेएलकेएम को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। जवाहरलाल यादव और वीरेंद्र विक्रम जैसे नेताओं के जाने से पार्टी की संगठनात्मक ताकत कमजोर पड़ती दिख रही है। विश्लेषकों का कहना है कि इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में, जहां इन नेताओं का प्रभाव माना जाता था।
कांग्रेस का दावा: विचारधारा पर बढ़ता भरोसा
कांग्रेस नेताओं ने इस मौके पर कहा कि झारखंड में यह बदलाव जनता और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस की नीतियों और विचारधारा पर बढ़ते भरोसे का संकेत है। पार्टी का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं और संगठन को चुनावी तौर पर और मज़बूत किया जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की स्थिति पर सवाल
झारखंड के इस घटनाक्रम को राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बीजेपी को सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी संगठनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रहे दल-बदल और अंदरूनी असंतोष से यह धारणा मजबूत हो रही है कि कई राज्यों में बीजेपी की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
आगे और तेज़ होगी सियासी हलचल
झारखंड में हुए इस बड़े राजनीतिक फेरबदल के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। कांग्रेस जहां इस घटनाक्रम को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं बीजेपी और जेएलकेएम के सामने अपने संगठन को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में और नेताओं के पाला बदलने की अटकलों के बीच झारखंड का राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।




