एबीसी नेशनल न्यूज | 5 फरवरी 2026
नई दिल्ली। बेहद चिंताजनक और शर्मनाक घटना में कुछ युवकों द्वारा मात्र ₹549 खर्च कर अपने आसपास रहने वाली 9 लड़कियों की फर्जी नग्न तस्वीरें और वीडियो तैयार करने का मामला सामने आया है। आरोपियों ने पूछताछ में कथित तौर पर कहा कि वे यह देखना चाहते थे कि जिन लड़कियों के साथ वे रहते या काम करते हैं, वे बिना कपड़ों के कैसी दिखेंगी। इस घटना ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा, निजता और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह मामला केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि मानसिक विकृति और कुसंगति का खतरनाक उदाहरण माना जा रहा है। किसी भी महिला या लड़की की तस्वीरों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ करना कानूनन अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाना साइबर अपराध की श्रेणी में आता है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इस घटना ने यह भी दिखाया है कि तकनीक के गलत इस्तेमाल से किसी की प्रतिष्ठा और मानसिक शांति को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानून को और मजबूत बनाने तथा साइबर अपराधों की जांच को तेज और प्रभावी करने की जरूरत महसूस की जा रही है। साथ ही, परिवार और समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, ताकि युवा गलत संगति और अमर्यादित सोच से दूर रह सकें।
लड़कियों और महिलाओं के लिए भी सतर्क रहना जरूरी है। निजी तस्वीरें साझा करने में सावधानी बरतना, सोशल मीडिया पर गोपनीयता सेटिंग्स का ध्यान रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करना सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं। पुलिस और साइबर सेल ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सम्मानजनक व्यवहार और कानून का पालन ही सुरक्षित समाज की नींव है। तकनीक का उपयोग रचनात्मक कामों के लिए होना चाहिए, न कि किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए। यह घटना समाज को एक कड़ा संदेश देती है कि महिलाओं की निजता के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।




