एबीसी नेशनल न्यूज | 5 फरवरी 2026
नेपाल भारत का सबसे नज़दीकी पड़ोसी देश है। दोनों देशों के बीच रोटी–बेटी का रिश्ता, खुली सीमा, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक समानता सदियों पुरानी है। इसके बावजूद बीते कुछ वर्षों में नेपाल में भारत के खिलाफ माहौल बनता हुआ दिखाई दे रहा है। सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक भारत-विरोधी नारों और अभियानों में बढ़ोतरी हुई है। जानकारों का मानना है कि यह स्थिति केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे विदेशी शक्तियों की सक्रिय भूमिका भी नजर आती है।
नेपाल में भारत के प्रति नाराजगी की एक बड़ी वजह 2015–16 का वह समय माना जाता है, जब देश में ईंधन और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई थी। नेपाल में इस संकट को भारत से जोड़कर देखा गया और आम लोगों के बीच यह धारणा बनी कि भारत ने दबाव बनाने की कोशिश की। इसके बाद कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा जैसे सीमा विवाद सामने आए, जिससे भारत के खिलाफ भावनाएं और तेज हो गईं। कई राजनीतिक दलों ने इन मुद्दों को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल किया, जिसका असर सीधे जनता की सोच पर पड़ा।
इस माहौल में विदेशी शक्तियों की भूमिका भी लगातार बढ़ती दिख रही है। चीन नेपाल में सड़क, हवाई अड्डे और अन्य ढांचागत परियोजनाओं के ज़रिए अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। इसके चलते नेपाल की सरकारें कई मामलों में भारत की तुलना में चीन के ज्यादा करीब जाती दिख रही हैं। वहीं पाकिस्तान से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर नेपाल में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को भारत-विरोधी रंग देने की कोशिशों के आरोप भी लगते रहे हैं।
इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका और तुर्की की मौजूदगी भी नेपाल की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ मामलों में विदेशी संगठनों और एनजीओ के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशों की बात सामने आती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल की बेरोजगारी, गरीबी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याओं का फायदा उठाकर बाहरी ताकतें भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं।
भारत के लिए यह स्थिति निश्चित रूप से चिंता का विषय है, लेकिन इसका जवाब सख्ती से नहीं, बल्कि समझदारी से दिया जाना चाहिए। भारत को नेपाल के साथ लगातार संवाद बनाए रखना होगा और आपसी भरोसे को मजबूत करना होगा। सीमा विवादों को बातचीत के ज़रिए सुलझाना, नेपाल में विकास परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाना और आम नेपाली नागरिकों से सीधा जुड़ाव कायम करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को “बड़े भाई” की छवि से बाहर निकलकर एक भरोसेमंद और बराबरी के साझेदार की तरह व्यवहार करना होगा। धैर्य, संवाद और सहयोग के रास्ते पर चलते हुए ही नेपाल में भारत के प्रति भरोसा दोबारा कायम किया जा सकता है। यदि समय रहते संतुलित और सकारात्मक कदम उठाए गए, तो भारत–नेपाल संबंधों में आई खटास को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




