एबीसी नेशनल न्यूज | 4 फरवरी 2026
प्रसिद्ध गायिका और सशक्त परफॉर्मिंग आर्टिस्ट Sona Mohapatra ने साल 2026 की शुरुआत जिस आत्मिक ऊर्जा, सादगी और गहराई के साथ की है, वह अपने आप में प्रेरक है। जनवरी का महीना उनके लिए केवल व्यस्तताओं से भरा नहीं रहा, बल्कि यह आत्म-संतोष, रचनात्मक पूर्णता और आध्यात्मिक शांति का अनमोल संगम बन गया। खुद सोना के शब्दों में, यह समय उनके करियर के सबसे जीवंत और संतोषजनक दौरों में से एक रहा—ऐसा दौर, जहां मेहनत भी है, भटकाव भी, और साथ ही भीतर से मिलने वाली अपार तृप्ति भी।
बीते पंद्रह दिनों में सोना लगातार यात्राओं में रहीं। कहीं कॉन्सर्ट, कहीं स्टूडियो रिकॉर्डिंग, तो कहीं साहित्यिक मंचों पर विचारों का आदान-प्रदान। SONA24K के साथ हुए उनके कार्यक्रमों में दर्शकों की मौजूदगी और उत्साह यह साफ बताता है कि उनका संगीत केवल सुना नहीं जाता, महसूस किया जाता है। हर मंच पर श्रोता उनके साथ गाते, झूमते और उस भावनात्मक यात्रा का हिस्सा बनते दिखे, जो सोना अपने गीतों के ज़रिये रचती हैं।
जनवरी का सबसे यादगार और ऐतिहासिक क्षण रहा उज्जैन स्थित Mahakaleshwar Temple के सामने आयोजित उनका पहला ‘भक्ति ब्लूज़’ कॉन्सर्ट। यह कोई साधारण कार्यक्रम नहीं था। यहां न तो फिल्मी गीत थे, न ही चमक-दमक—बल्कि था शुद्ध भक्ति संगीत, आत्मा से निकली आवाज़ और शिव के चरणों में समर्पित सुर। महाकाल के सान्निध्य में खड़े होकर गाना, और सामने बैठे लोगों को उसी भक्ति में डूबते देखना, सोना के लिए जीवन के सबसे बड़े सुखों में से एक बन गया। यह ऐसा अनुभव था, जहां कलाकार और श्रोता के बीच की दूरी पूरी तरह मिट गई।
इस आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान Virat Kohli से भी हुई। सोना ने उन्हें शिव भक्त बताते हुए इस संयोग को ईश्वर का संकेत माना। उनके लिए यह मुलाकात केवल एक प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलना नहीं थी, बल्कि आस्था और विश्वास से जुड़ा एक सुंदर क्षण था, जिसने इस यात्रा को और भी अर्थपूर्ण बना दिया।
जनवरी में सोना ने कई प्रेस वार्ताओं, शायरी की महफिलों और कव्वाली-पॉप जैसे अनूठे कार्यक्रमों में भी भाग लिया। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर उन्होंने नोबेल और बुकर पुरस्कार विजेताओं के साथ कला, रचनात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे विषयों पर गंभीर और सार्थक संवाद किया। यह दिखाता है कि सोना केवल गायिका नहीं हैं, बल्कि एक जागरूक कलाकार हैं, जो समाज, विचार और संवेदना से गहरे जुड़ाव के साथ अपनी कला को आगे बढ़ाती हैं।
अपने संगीत दर्शन पर बात करते हुए सोना ने बेहद सरल लेकिन गहरे शब्दों में कहा कि उनके जीवन और कला की दिशा शिव-शक्ति की सोच से तय होती है। शिव—जो महान कलाकार हैं, परंपराओं को तोड़ने का साहस रखते हैं; और शक्ति—जो नारी ऊर्जा, सृजन और संतुलन का प्रतीक है। यही संतुलन उनकी कला की आत्मा है। इसी वजह से वे हमेशा उन कलाकारों से जुड़ाव महसूस करती हैं, जो अलग राह चुनते हैं और सीमाओं को तोड़ने का हौसला रखते हैं।
इन तमाम व्यस्तताओं के बीच सोना ने अपनी टीम के साथ समय बिताया, स्टूडियो में गहराई से रचनात्मक काम किया और ज़िंदगी के छोटे-छोटे पलों से प्रेरणा ली। उनके लिए यह महीना इस बात की मिसाल बन गया कि अगर आदमी अपनी आवाज़ के प्रति सच्चा रहे, तो रास्ता चाहे कितना भी थकाने वाला क्यों न हो, वह कभी खाली नहीं होता।
जनवरी को “नए साल की मज़बूत और अर्थपूर्ण शुरुआत” बताते हुए सोना ने अंत में बस इतना लिखा— “ग्रेटफुल, एनर्जाइज़्ड, ऑनवर्ड्स।”
भक्ति, संगीत और सामाजिक चेतना के इस दुर्लभ संगम के साथ सोना मोहापात्रा का यह नया दौर न सिर्फ उनके करियर का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, बल्कि भारतीय संगीत जगत के लिए भी एक नई, साहसी और आत्मिक दिशा की ओर बढ़ता हुआ कदम है।




