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सवालों से भागकर धर्म की ओट लेने वाले पाखंडी प्रधानसेवक : रागिनी नायक

महेंद्र कुमार | नई दिल्ली | 12 जनवरी 2026

कांग्रेस नेता रागिनी नायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि जब देश की जनता सरकार से असल, रोज़मर्रा और ज़िंदगी से जुड़े सवाल पूछती है, तब प्रधानमंत्री जवाब देने के बजाय धर्म, प्रतीकों और दिखावे की शरण में चले जाते हैं। नायक ने प्रधानमंत्री को पाखंडी बताते हुए कहा कि जनता मौत, भूख, बेरोजगारी और महंगाई पर जवाब चाहती है, लेकिन सरकार ड्रोन शो, मंदिर दर्शन और प्रतीकात्मक तस्वीरों के सहारे अपनी नाकामियां छिपा रही है।

रागिनी नायक ने कहा कि मध्यप्रदेश और गुजरात में जहरीले पानी से हुई मौतें सरकार की संवेदनहीनता का सबसे बड़ा सबूत हैं। दिसंबर 2025 में इंदौर में दूषित पानी पीने से 21 लोगों की मौत हो गई और 160 से ज़्यादा लोग बीमार पड़े, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। गुजरात में सालों से लोग कैंसरकारी तत्वों से भरा पानी पीने को मजबूर हैं, जिसे मानवाधिकार आयोग तक गंभीर उल्लंघन मान चुका है। नायक ने सवाल किया कि जब लोग पानी के लिए मर रहे हों, तब सरकार की प्राथमिकता धार्मिक आयोजन और चमक-दमक क्यों होती है?

उन्होंने कफ सिरप से बच्चों की मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह सीधे-सीधे सरकारी लापरवाही का नतीजा है। 2025 में छिंदवाड़ा में दूषित कफ सिरप से 23 बच्चों की जान चली गई, लेकिन न तो किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही सरकार ने जिम्मेदारी ली। ज़हरीली कफ सिरप ने राजस्थान में भी कहर बरपाया। रागिनी नायक ने कहा कि मोदी सरकार के लिए बच्चों की जान से ज़्यादा अपनी छवि बचाना ज़रूरी है।

अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि आज आम आदमी सबसे ज़्यादा महंगाई, बेरोजगारी और गिरते रुपये से परेशान है। जनवरी 2026 में रुपया 90 के पार चला गया, महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है और युवा नौकरी के लिए भटक रहे हैं। नायक ने कहा, “युवाओं को नौकरी चाहिए, किसानों को अपनी फसल का दाम चाहिए और मध्यम वर्ग को राहत चाहिए, लेकिन सरकार उत्सव मनाने और प्रचार करने में व्यस्त है।”

विदेश नीति पर हमला करते हुए रागिनी नायक ने कहा कि सरकार इवेंट-डिप्लोमेसी के शोर में सच्चाई छिपा रही है। 2025 को उन्होंने मोदी सरकार का सबसे कमजोर विदेश नीति वर्ष बताया। अमेरिका से रिश्ते ठंडे पड़े, चीन के साथ तनाव बढ़ा और पड़ोसी देशों से दूरी और गहरी हुई। उन्होंने कहा कि जब डोनाल्ड ट्रम्प जैसे नेता भारत को सार्वजनिक रूप से नीचा दिखाते हैं, तब सरकार मौन साध लेती है।

प्रदूषण पर बोलते हुए नायक ने कहा कि आज भारत में सांस लेना भी खतरे से खाली नहीं है। दिल्ली समेत कई शहरों में हवा इतनी ज़हरीली हो चुकी है कि लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन सरकार सिर्फ घोषणाएं और भाषण दे रही है। ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार की कानून-व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर से जनता का भरोसा टूट चुका है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं खुद को सुरक्षित नहीं मानतीं, तब सरकार की प्राथमिकता तस्वीरें और प्रचार क्यों बनी रहती है?

रागिनी नायक ने अडानी समूह से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का ज़िक्र करते हुए पूछा कि जांच से सरकार क्यों बच रही है और क्यों हर बार बड़े कॉरपोरेट घरानों को सत्ता का संरक्षण मिलता दिखता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब जनता इन सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री से सीधे जवाब मांगती है, तब सरकार सोमनाथ मंदिर में ड्रोन शो, हाथ में त्रिशूल और धार्मिक प्रतीकों का सहारा लेकर असली सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है। नायक ने इसे खुला राजनीतिक पाखंड बताते हुए कहा कि धर्म को नाकामियों की ढाल बनाना लोकतंत्र और संविधान दोनों का अपमान है।

अपने बयान के अंत में रागिनी नायक ने कहा कि यह सवाल अब केवल विपक्ष का नहीं, बल्कि देश की आम जनता का सवाल है। सरकार बताए—पानी क्यों ज़हरीला है, नौकरी क्यों नहीं है, महंगाई क्यों बढ़ रही है, महिलाएं असुरक्षित क्यों हैं और अर्थव्यवस्था क्यों डगमगा रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रधानसेवक होने का मतलब है जवाब देना, न कि सवालों से बचने के लिए आस्था की आड़ लेना।

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