अंतरराष्ट्रीय डेस्क 26 दिसंबर 2025
सीरिया एक बार फिर दर्द, दहशत और मातम की तस्वीर में डूब गया है। शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के वक्त एक मस्जिद में हुए जोरदार धमाके ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया। इस भयावह विस्फोट में कम से कम 8 नमाज़ियों की मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। मस्जिद के भीतर और बाहर अफरा-तफरी मच गई—जहां कुछ पल पहले दुआओं की आवाज़ थी, वहां चीख-पुकार और खून के निशान रह गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धमाका उस समय हुआ जब मस्जिद में नमाज़ के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। विस्फोट इतना तेज़ था कि मस्जिद की दीवारें और छत का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घायल लोग मदद के लिए इधर-उधर भागते दिखे, कई को स्थानीय लोग और राहतकर्मी उठाकर अस्पताल ले गए। एंबुलेंसों की आवाज़ और रोते-बिलखते परिजन इस त्रासदी की गवाही दे रहे थे।
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और पूरे इलाके को घेराबंदी में ले लिया गया। घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत नाज़ुक बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है, क्योंकि कुछ घायलों की हालत बेहद गंभीर है।
इस हमले की ज़िम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन इसे आम नागरिकों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने वाली क्रूर हिंसा माना जा रहा है। सीरिया पहले ही वर्षों से युद्ध, अस्थिरता और डर के साए में जी रहा है, और ऐसे हमले आम लोगों की ज़िंदगी को और असुरक्षित बना रहे हैं।
मस्जिद जैसे पवित्र स्थान में हुआ यह धमाका सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि उन लोगों की आस्था, शांति और इंसानियत पर वार है, जो हथियार नहीं, सिर्फ दुआ लेकर इकट्ठा हुए थे। आज सीरिया में सिर्फ जानें नहीं गईं—कई घरों का सुकून, कई मांओं की गोद और कई बच्चों का सहारा भी छिन गया।




