अंतरराष्ट्रीय डेस्क 25 दिसंबर 2025
क्रिसमस जैसे शांति और करुणा के पर्व पर जब दुनिया उम्मीद, प्रार्थना और भाईचारे की बातें कर रही थी, उसी समय यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की का संदेश युद्ध की कड़वी सच्चाइयों से भरा हुआ सामने आया। रूस-यूक्रेन युद्ध के दर्द, बमबारी और लगातार हो रही मौतों के बीच जेलेंस्की ने अपने क्रिसमस संबोधन में ऐसा वाक्य कहा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया—“वह खत्म हो जाए”। जेलेंस्की का यह कथन सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति वलादिमिर पुतिन की ओर इशारा माना गया। उन्होंने कहा कि जब एक देश पर लगातार हमले हो रहे हों, जब बच्चों की नींद सायरनों से टूटती हो और जब परिवार अपने अपनों को खो रहे हों, तब लोगों के दिलों में सिर्फ शांति नहीं, युद्ध को जन्म देने वाली ताकत के अंत की कामना भी जन्म लेती है।
अपने संबोधन में जेलेंस्की ने यह स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति के प्रति निजी घृणा नहीं, बल्कि उस आक्रामक सोच और सत्ता की राजनीति के खिलाफ भावनात्मक प्रतिक्रिया है, जिसने यूक्रेन को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि क्रिसमस पर यूक्रेनियों की सबसे बड़ी इच्छा है—युद्ध का अंत, बमों की खामोशी और अपने घरों में लौटती जिंदगी।
जेलेंस्की ने रूस की ओर से क्रिसमस के दिन भी युद्धविराम से इनकार का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब एक ओर दुनिया शांति की प्रार्थना कर रही हो और दूसरी ओर मिसाइलें गिराई जा रही हों, तो ऐसे में भावनाएं तीखी हो जाती हैं। यही पीड़ा उनके शब्दों में झलकी। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि यूक्रेन की लड़ाई किसी व्यक्ति के मरने की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व, आज़ादी और भविष्य की रक्षा की है। उनका संदेश आक्रामक से ज़्यादा दर्द, थकान और न्याय की पुकार के रूप में देखा जा रहा है।
जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति वार्ताओं की संभावनाएं लगातार कमजोर होती दिख रही हैं। क्रिसमस के इस संदेश ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाया कि युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि इंसानों के दिल-दिमाग पर भी हमला करता है।




