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अटल बिहारी वाजपई की 10 अनकही कहानी

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एबीसी डेस्क 25 दिसंबर 2025

अटल बिहारी वाजपेयी केवल सत्ता के शिखर तक पहुँचे नेता नहीं थे, बल्कि वे ऐसे आदमी थे जिनकी ज़िंदगी के छोटे-छोटे प्रसंग उन्हें और भी बड़ा बना देते हैं। उनकी निजी दुनिया, आदतें, रिश्ते और प्रतिक्रियाएँ—सब मिलकर एक ऐसे इंसान की तस्वीर बनाती हैं जो असाधारण होकर भी पूरी तरह मानवीय था। यहाँ अटल बिहारी वाजपेयी की ज़िंदगी से जुड़ी दस अनकही कहानियाँ, क्रमवार और मानवीय भाषा में प्रस्तुत हैं—

1. जब पिता और पुत्र एक ही क्लास में बैठे : कानपुर के डीएवी कॉलेज में अटल बिहारी वाजपेयी जब लॉ की पढ़ाई कर रहे थे, तभी उनके पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी ने भी उसी कॉलेज में लॉ में दाख़िला ले लिया। हैरानी की बात यह थी कि दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे और हॉस्टल में एक ही कमरे में रहते थे। राजनीति में ऊँचाइयों तक पहुँचने वाले अटल जी की यह शुरुआत पारिवारिक सादगी और अनुशासन की मिसाल थी।

2. राजकुमारी कौल: एक अनकही, गरिमामय संगति
अटल जी आजीवन अविवाहित रहे, लेकिन ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज के दिनों में उनकी दोस्ती राजकुमारी कौल से हुई। यह रिश्ता जीवन भर चला। राजकुमारी शादीशुदा थीं, फिर भी अटल जी उनके परिवार के साथ जुड़े रहे और उनकी बेटी नमिता को अपनी बेटी की तरह पाला। यह रिश्ता न शोरगुल वाला था, न दिखावे वाला—बस गहरी समझ और साथ का रिश्ता था।

3. ब्राह्मण होकर भी नॉन-वेज का शौक़ : अटल जी पारंपरिक ब्राह्मण परिवार से थे, लेकिन खाने-पीने में वे कट्टर नहीं थे। उन्हें नॉन-वेज पसंद था, खासकर झींगा और दिल्ली के करीम होटल का मुगलई खाना। वे हँसते हुए कहते थे—“मैं कुंवारा हूँ, ब्रह्मचारी नहीं।” यह कथन उनके खुले और ईमानदार स्वभाव को दिखाता है।

4. जेल में कवि बन गए ‘कैदी कविराय’ : 1975 की इमरजेंसी में जब अटल जी जेल में थे, तब उन्होंने उस कठिन समय को शब्दों में ढाल दिया। जेल की सलाखों के पीछे लिखी गई उनकी कविताएँ बाद में ‘कैदी कविराय की कुंडलियाँ’ के रूप में सामने आईं। ये कविताएँ हार नहीं, बल्कि उम्मीद और लोकतंत्र में भरोसे की आवाज़ थीं।

5. गुजरात भूकंप के बाद होली से दूरी : अटल जी होली के बेहद शौकीन थे। हर साल रंगों में डूबे रहते थे, लेकिन 2001 के गुजरात भूकंप ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। इतने दुखी हुए कि 2002 में उन्होंने होली नहीं मनाई। देश का दर्द उनके लिए निजी पीड़ा बन जाता था।

6. बाढ़ में फँसे, लेकिन सत्ता का रौब नहीं दिखाया : 1992 में जम्मू के अखनूर इलाके में चेनाब नदी में बाढ़ आ गई और पुल बह गया। अटल जी वहीं फँस गए। सुरक्षा कारणों से हेलिकॉप्टर की व्यवस्था थी, लेकिन उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद से नाव से नदी पार की। यह उनके स्वभाव की सादगी और ज़मीन से जुड़ाव को दर्शाता है।

7. इंदिरा गांधी के ताने का मुस्कुराता जवाब : एक बार संसद में इंदिरा गांधी ने तंज कसा कि अटल जी हिटलर की तरह हाथ लहराकर भाषण देते हैं। अटल जी मुस्कुराए और बोले—“हाँ, लेकिन मैं हिटलर नहीं हूँ, क्योंकि मैं लोकतंत्र में विश्वास करता हूँ।” जवाब में कटुता नहीं, गरिमा थी।

8. तांगे के नीचे दबे, फिर भी प्रचार नहीं छोड़ा : 1970 के दशक में उत्तर प्रदेश के मिरहची में चुनाव प्रचार के दौरान अटल जी तांगे से जा रहे थे। रास्ता खराब था, तांगा पलट गया और वे उसके नीचे दब गए। चोट आई, लेकिन उन्होंने प्रचार रोकने से इनकार कर दिया। जनता के बीच जाना उनके लिए राजनीति नहीं, कर्तव्य था।

9. नेहरू की भविष्यवाणी जो इतिहास बन गई : 1957 में संसद में अपने पहले भाषण के बाद अटल जी को सुनकर जवाहरलाल नेहरू ने कहा था—“यह युवक एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा।” उस समय यह सिर्फ़ एक टिप्पणी लगी, लेकिन समय ने इसे सच साबित कर दिया।

10. सीटी स्कैन मशीन से डरने वाला प्रधानमंत्री : इतने बड़े नेता होने के बावजूद अटल जी भीतर से आम इंसान ही थे। एक बार अस्पताल में सीटी स्कैन कराने की बात आई तो वे घबरा गए और मना कर दिया। यह छोटा-सा किस्सा उनके मानवीय पक्ष को उजागर करता है—जहाँ साहस के साथ डर भी मौजूद था।

इन दस अनकही कहानियों में अटल बिहारी वाजपेयी सिर्फ़ प्रधानमंत्री नहीं दिखते, बल्कि एक ऐसा आदमी नज़र आता है जो संवेदनशील है, सादा है, हँसता है, डरता है और सबसे बढ़कर—इंसान है। यही वजह है कि वे आज भी सिर्फ़ इतिहास में नहीं, लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं।

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