एबीसी डेस्क 20 दिसंबर 2025
प्रियंका गांधी ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा की गई बर्बरतापूर्ण हत्या पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि पूरे क्षेत्र में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्रियंका गांधी के अनुसार, किसी भी सभ्य और लोकतांत्रिक समाज में धर्म, जाति, पहचान या आस्था के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव करना, उस पर हिंसा करना या उसकी हत्या कर देना सीधे-सीधे मानवता के खिलाफ अपराध है। ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि समाज में नफरत और असहिष्णुता कितनी खतरनाक सीमा तक पहुंच सकती है।
उन्होंने कहा कि भीड़ द्वारा की गई हिंसा केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं होती, बल्कि यह कानून, संविधान और मानवीय मूल्यों पर सीधा हमला होती है। दीपू चंद्र दास की हत्या एक चेतावनी है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय, विशेषकर हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदाय, खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रियंका गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा किसी भी देश की नैतिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी होती है, और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
प्रियंका गांधी ने भारत सरकार से भी स्पष्ट रूप से अपील की कि वह इस गंभीर मामले को हल्के में न ले। उन्होंने कहा कि भारत को एक जिम्मेदार पड़ोसी देश होने के नाते बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का संज्ञान लेना चाहिए और इस मुद्दे को बांग्लादेश सरकार के समक्ष मजबूती और स्पष्टता के साथ उठाना चाहिए। यह केवल कूटनीतिक औपचारिकता का विषय नहीं, बल्कि मानवाधिकार और मानवीय सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण एशिया की शांति और स्थिरता तभी संभव है जब सभी देशों में अल्पसंख्यकों को बिना डर के जीने का अधिकार मिले। धार्मिक पहचान के आधार पर किसी भी प्रकार की हिंसा पूरे समाज को कमजोर करती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरनाक संदेश छोड़ती है। प्रियंका गांधी के मुताबिक, ऐसे मामलों में चुप्पी भी अपराध के बराबर होती है, इसलिए भारत सरकार को नैतिक साहस दिखाते हुए अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि मानवता, समानता और न्याय के मूल्यों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाना जरूरी है। दीपू चंद्र दास की हत्या यह याद दिलाने वाली त्रासदी है कि नफरत और हिंसा के खिलाफ सख्त और सामूहिक रुख अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।





