अंतरराष्ट्रीय डेस्क 20 दिसंबर 2025
जेफ़री एपस्टीन से जुड़े मामले एक बार फिर चर्चा में हैं। अमेरिका में एपस्टीन फाइल्स को लेकर जो दस्तावेज़ सार्वजनिक किए गए हैं, उन्हें लेकर सांसदों ने कड़ी नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि जो काग़ज़ सामने लाए गए हैं, उनमें कई अहम हिस्सों को काला कर दिया गया है (रेडैक्ट किया गया है) और सभी दस्तावेज़ पूरी तरह जारी ही नहीं किए गए।
सांसदों का आरोप है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां सच्चाई को पूरी तरह सामने लाने से बच रही हैं। उनका कहना है कि जब नाम, तारीख़ें और महत्वपूर्ण जानकारियां छिपा दी जाएं, तो फिर दस्तावेज़ जारी करने का मतलब ही क्या रह जाता है।
कई कानून निर्माताओं ने साफ कहा कि एपस्टीन जैसा गंभीर मामला सिर्फ आधी-अधूरी जानकारी से नहीं सुलझेगा। पीड़ितों को न्याय तभी मिलेगा, जब पूरी सच्चाई बिना काट-छांट के सामने आएगी। उनका मानना है कि अधूरे दस्तावेज़ जनता के भरोसे को और कमजोर करते हैं।
सरकारी पक्ष का तर्क है कि कुछ जानकारियां कानूनी कारणों और गोपनीयता की वजह से छिपानी पड़ी हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच से जुड़े लोगों और पीड़ितों की सुरक्षा भी जरूरी है।
जेफ़री एपस्टीन का मामला पहले से ही बेहद संवेदनशील रहा है। इसमें सत्ता, पैसे और प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में दस्तावेज़ों का अधूरा खुलासा लोगों के गुस्से और अविश्वास को और बढ़ा रहा है।
फिलहाल यह साफ है कि एपस्टीन फाइल्स को लेकर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। सांसद लगातार मांग कर रहे हैं कि बिना किसी पर्दे के, पूरी सच्चाई जनता के सामने लाई जाए, ताकि न्याय सिर्फ काग़ज़ों में नहीं, हकीकत में दिखे।
एपस्टीन मामले में शिकायतकर्ता मारिया फार्मर की वकील जेनिफर फ्रीमैन ने कहा है कि उनकी क्लाइंट की भावनाएं बहुत उलझी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मारिया कभी खुशी के आंसू रो रही थीं, तो कभी गहरे दुख के।
फ्रीमैन ने कहा, “खुशी के आंसू इसलिए थे क्योंकि इन फाइलों को सार्वजनिक कराने के लिए बहुत लंबी लड़ाई लड़ी गई। इसके लिए पहाड़ हिलाने पड़े, तब जाकर यह संभव हो पाया।”
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “असल त्रासदी यह है कि इसमें 30 साल लग गए। मारिया फार्मर ने 1996 में ही FBI को अपनी शिकायत दी थी। अगर उस वक्त FBI ने उसकी बात ध्यान से सुनी होती, उस पर गंभीरता से काम किया होता, तो हजार से ज्यादा पीड़ितों को इस दर्द से बचाया जा सकता था और 30 साल की मानसिक यातना टल सकती थी।”
उस शिकायत में मारिया फार्मर ने बताया था कि एपस्टीन ने उनकी 12 और 16 साल की बहनों की निजी तस्वीरें चुरा ली थीं, जो उन्होंने खुद खींची थीं। मारिया का मानना था कि एपस्टीन ने ये तस्वीरें संभावित खरीदारों को बेच दीं। FBI की रिपोर्ट के मुताबिक, एपस्टीन ने उन्हें धमकी भी दी थी कि अगर उन्होंने किसी को कुछ बताया, तो वह उनका घर जला देगा।
यह बयान सिर्फ एक कानूनी कहानी नहीं है, बल्कि उस लंबे दर्द और अनसुनी चीख की याद दिलाता है, जो सालों तक दबाकर रखी गई।
एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज़ों को आंशिक रूप से जारी किए जाने से उसकी पूरी नेटवर्क की सच्चाई सामने नहीं आ पाई है। उल्टा, इसने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को राजनीतिक रूप से और असहज स्थिति में डाल दिया है।
जो काग़ज़ात जारी किए गए हैं, वे उस लंबे समय से उठ रही मांग—कि इस मामले में पूरी पारदर्शिता हो—से बहुत कम हैं। सालों से लोग चाहते रहे हैं कि एपस्टीन केस की पूरी सच्चाई सामने आए, लेकिन यह रिलीज़ उस उम्मीद पर खरी नहीं उतरती।
इससे मामला खत्म होने के बजाय और ज्यादा सवाल खड़े हो गए हैं। खास तौर पर ट्रंप प्रशासन ने इस पूरे मामले को कैसे संभाला, इस पर अब पहले से ज्यादा ध्यान जा रहा है। ट्रंप के कट्टर समर्थकों के लिए यह उनके उस पुराने वादे की कसौटी बन गया है, जिसमें उन्होंने हर तरह की गड़बड़ी को सामने लाने की बात कही थी।
रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी, जो उस कानून के सह-लेखक भी हैं जिसके तहत फाइलों को पूरी तरह जारी किया जाना था, ने कहा है कि न्याय विभाग ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का “गंभीर रूप से उल्लंघन” किया है।
अब तक जो दस्तावेज़ सामने आए हैं, उनसे न तो एपस्टीन के पूरे नेटवर्क के बारे में ज्यादा जानकारी मिलती है और न ही यह साफ होता है कि वे कौन सी चूकें थीं, जिनकी वजह से उसका शोषण दशकों तक चलता रहा।
लेकिन इतना जरूर हुआ है कि डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर राजनीतिक दबाव में आ गए हैं। आलोचनाएं तेज़ हो गई हैं कि उनका प्रशासन शायद उन ताकतवर लोगों को बचाने की कोशिश कर रहा है, जिन्होंने इस कुख्यात यौन अपराधी को लंबे समय तक संरक्षण दिया।




