एबीसी डेस्क 12 दिसंबर 2025
बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। जेडीयू के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया है कि महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के लगभग 17 से 18 विधायक NDA में शामिल होने के लिए तैयार बैठे हैं। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब आरजेडी के भीतर हाल ही में कई आरोप-प्रत्यारोप हुए हैं और संगठनात्मक स्तर पर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। नीरज कुमार के बयान ने न केवल बिहार की सत्ता समीकरणों को हिला कर रख दिया, बल्कि महागठबंधन में संभावित टूट की चर्चा भी ज़ोर पकड़ने लगी है।
नीरज कुमार ने कहा कि महागठबंधन के कई विधायक अपने नेतृत्व से निराश हैं और लगातार महसूस कर रहे हैं कि संगठन की दिशा और रणनीति कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरजेडी भीतर से बिखर चुका है और इसके नेता केवल बयानबाज़ी में लगे हैं, जबकि मूल मुद्दों पर कोई गंभीर पहल नहीं दिख रही। जेडीयू प्रवक्ता ने दावा किया कि ऐसा असंतोष पहले छुपकर था, लेकिन अब खुले रूप में सामने आने लगा है, और कई विधायक NDA में आने की इच्छुक हैं क्योंकि उन्हें स्थिरता और नेतृत्व की स्पष्टता चाहिए।
आरजेडी ने इन दावों को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि बीजेपी और जेडीयू विपक्ष को अस्थिर करने की कोशिश में लगे हैं। पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा कि NDA नेताओं में डर और बेचैनी बढ़ गई है क्योंकि महागठबंधन का जनाधार मज़बूत है और जनता अब उनके आरोपों और दावों पर ध्यान नहीं दे रही। आरजेडी ने कहा कि नीरज कुमार जैसे नेता केवल मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने के लिए मनगढ़ंत बातें कर रहे हैं और ऐसे दावे किसी भी लोकतांत्रिक संस्था पर भरोसा कमज़ोर करने वाली राजनीति हैं।
बयानबाज़ी के इस दौर ने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है कि क्या वास्तव में महागठबंधन के विधायक भीतर से टूटने की कगार पर हैं, या फिर यह केवल दबाव बनाने की रणनीति है। 2024 और 2025 के चुनावी माहौल को देखते हुए बिहार में किसी भी राजनीतिक हलचल का असर बड़ा हो सकता है। इसलिए राजनीतिक विश्लेषक इसे हल्के में नहीं ले रहे।
बिहार में पहले भी कई बार राजनीतिक गठबंधनों और निष्ठाओं में बदलाव हुए हैं। नीतीश कुमार का NDA से महागठबंधन और फिर महागठबंधन से वापस NDA में लौटना इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। ऐसे में विधायकों में असंतोष की खबरें आने से भविष्य में किसी बड़े बदलाव की संभावना पूरी तरह नकारा नहीं जा सकती। यह भी साफ है कि दोनों खेमे—महागठबंधन और NDA—अपने-अपने तरीके से राजनीतिक संदेश साधने में जुटे हैं, क्योंकि आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति और भी रोचक मोड़ ले सकती है।




