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फ्लोरिडा वार्ता के बीच रूस की भीषण बमबारी—यूक्रेन पर दबाव, शांति प्रक्रिया पर सवाल

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 6 दिसंबर 2025

रूस ने एक बार फिर यूक्रेन के ऊर्जा तंत्र और महत्वपूर्ण ढांचों पर बड़े पैमाने का हवाई हमला शुरू कर दिया है। यह हमला उस समय किया गया जब अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधि फ्लोरिडा में लगातार तीसरे दिन शांति-वार्ता की कोशिश में जुटे हुए हैं। शनिवार की रात रूस ने 653 ड्रोन और 51 मिसाइलें दागीं—यूक्रेन की वायुसेना ने अधिकांश को मार गिराने का दावा किया, लेकिन कुछ वार बेहद विनाशकारी साबित हुए। कीव के बाहर फास्टिव शहर के रेलवे जंक्शन पर मिसाइल ने स्टेशन की इमारत तबाह कर दी और कई इंजन तथा डिब्बे क्षतिग्रस्त हो गए। राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि यह हमला “सैन्य दृष्टि से बेकार” था और रूस जानता था कि इसका कोई रणनीतिक फायदा नहीं होगा।

रूस के हमलों का लक्ष्य हाल के हफ्तों में बार-बार यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली बनी है। यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि आठ क्षेत्रों के पावर प्लांट और वितरण केंद्र निशाने पर आए, जिनसे कई इलाकों में बड़ी बिजली कटौती हुई। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी (IAEA) ने पुष्टि की कि ज़ापोरिज़्झिया परमाणु संयंत्र एक बार फिर अपनी बाहरी बिजली पूरी तरह खो बैठा—यह 11वीं बार है जब रूसी हमलों के कारण ऐसा हुआ। दूसरी ओर, रूस ने अपने रक्षा मंत्रालय के हवाले से कहा कि यह “बड़े पैमाने का जवाबी हमला” था, जो कथित तौर पर यूक्रेन की ओर से नागरिक लक्ष्यों पर हमलों के जवाब में किया गया।

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने रूस की इस कार्रवाई को “शांति प्रयासों की खुली अवहेलना” बताया। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि अब यूक्रेन की सुरक्षा को मजबूत करने और रूस पर दबाव बढ़ाने से जुड़ा कोई भी फैसला टाला नहीं जा सकता—“वह भी शांति प्रक्रिया के नाम पर बिल्कुल नहीं।” वास्तव में, हर नया हमला रूस की यह मंशा उजागर करता है कि वह युद्ध को लंबा खींचने की रणनीति पर अडिग है।

फ्लोरिडा में चल रही अमेरिका–यूक्रेन की वार्ता का स्वर इस नए हमले के बाद और गंभीर हो गया है। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने बताया कि पहले दो दिन की बातचीत “रचनात्मक” रही है। दोनों पक्ष सुरक्षा ढांचे और ऐसे निवारक उपायों पर सहमत दिखे हैं, जो भविष्य में स्थायी शांति सुनिश्चित कर सकें। हालांकि विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, संकेत साफ हैं कि युद्ध समाप्ति का रास्ता रूस की वास्तविक ‘डीएस्केलेशन’ की इच्छा पर निर्भर करेगा। इन वार्ताओं में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी मौजूद हैं, जो इस पहल को राजनीतिक और कूटनीतिक वजन दे रहे हैं।

दिलचस्प रूप से, इन वार्ताओं के समानांतर अमेरिकी दूत विटकॉफ़ की मास्को में पांच घंटे लंबी मुलाकात राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हुई, लेकिन क्रेमलिन के मुताबिक “कोई समझौता नहीं” बन पाया। रूस ने कहा कि पुतिन आगे भी बातचीत के लिए तैयार हैं, परंतु यूरोपीय देशों और यूक्रेन का मानना है कि रूस की इच्छाशक्ति पर भरोसा करना मुश्किल है। ज़ेलेंस्की ने भी साफ कहा है कि वे “मॉस्को में क्या बातचीत हुई और पुतिन अब क्या नया बहाना गढ़ रहे हैं,” इसका विवरण जानना चाहते हैं।

वार्ता का सबसे विवादित मुद्दा है—युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा। यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी दृढ़ता से मानते हैं कि भविष्य में रूसी हमले रोकने का सबसे प्रभावी उपाय या तो नाटो सदस्यता है या फिर उसकी बराबरी वाले सुरक्षा गारंटी। रूस इस संभावना का कट्टर विरोधी है, और डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि वे यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। क्रेमलिन ने इसे वार्ता का “मुख्य प्रश्न” बताया, जबकि ट्रंप ने कहा बातचीत “ठीक रही” लेकिन अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी—“टैंगो करने के लिए दो की ज़रूरत होती है।”

स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब एक साक्षात्कार में पुतिन ने यूक्रेनी सेना को चेतावनी दी कि वे डोनबास क्षेत्र से “पूरी तरह हट जाएँ”, वरना रूस “बलपूर्वक इन इलाकों को मुक्त करेगा।” वर्तमान में रूस यूक्रेन के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा किए हुए है—विशेषकर डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों पर। यह चेतावनी युद्ध को और गहरा करने वाले संकेत के रूप में देखी जा रही है।

इन सबके बीच फ्लोरिडा की वार्ता यूक्रेन के लिए उम्मीद और अनिश्चितता का मिला-जुला मंच बनी हुई है। एक ओर अमेरिका की मध्यस्थता है, जो शांति के लिए एक ‘परिकल्पना’ तैयार करने की कोशिश कर रही है, दूसरी ओर रूस की सैन्य आक्रामकता है, जो इस राजनीतिक प्रक्रिया को झटका देती रहती है। परिणाम चाहे जो हो, अभी यह स्पष्ट है कि युद्ध अपने निर्णायक मोड़ पर खड़ा है—जहाँ कूटनीति और शक्ति-प्रदर्शन दोनों बराबर की भूमिका निभा रहे हैं, और यूक्रेन की जनता प्रतिदिन इसकी कीमत चुका रही है।

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