अंतरराष्ट्रीय डेस्क 5 दिसंबर 2025
रूस–यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए व्हाइट हाउस की नई शांति योजना पर मास्को और वॉशिंगटन के बीच लगभग पाँच घंटे चली सीधी बातचीत के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। क्रेमलिन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुश्नर के साथ बातचीत के बाद राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा कि अमेरिका की संशोधित योजना के कुछ बिंदु ऐसे हैं जिन पर रूस किसी भी स्थिति में सहमत नहीं हो सकता। पुतिन ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में खुलकर स्वीकार किया कि वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर “हाँ, इस पर चर्चा हो सकती है” कहने के बावजूद कई प्रस्ताव “अस्वीकार्य” थे। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि वे विवादित बिंदु आखिर कौन–से हैं।
पुतिन के इस बयान से साफ है कि दो प्रमुख विवाद अब भी अटके हुए हैं—पहला, रूसी कब्ज़े वाले यूक्रेनी इलाकों का भविष्य और दूसरा, यूक्रेन को मिलने वाली दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटियाँ। रूस इस बात पर अड़ा है कि यूक्रेनी सेना को डोनबास से पूरी तरह पीछे हटना होगा, यहाँ तक कि उन इलाकों से भी जहाँ अभी यूक्रेनी नियंत्रण बना हुआ है। पुतिन ने दो टूक कहा कि “या तो हम इन इलाकों को बलपूर्वक वापस लेंगे, या यूक्रेनी सेना कभी–न–कभी वहाँ से हटेगी।” फिलहाल रूस डोनबास के लगभग 85% हिस्से पर नियंत्रण का दावा करता है।
वहीं क्रेमलिन के शीर्ष विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने वार्ता को पूरी तरह “नो–कम्प्रोमाइज” करार देते हुए संकेत दिया कि रूस हाल के युद्धक्षेत्र के “सफल अभियानों” से अपनी बातचीत की स्थिति को मजबूत मान रहा है। अमेरिकी वार्ताकार विटकॉफ़ अब फ्लोरिडा में यूक्रेनी प्रतिनिधियों से मिलेंगे, जबकि ट्रंप ने बातचीत को “उम्मीद से बेहतर” बताया, लेकिन साथ ही कहा कि “यह दो पक्षों की सहमति का मामला है—और फिलहाल कहना जल्दबाज़ी होगी।”
लेकिन दूसरी ओर यूक्रेन बेहद सख़्त रुख पर कायम है। विदेश मंत्री एंड्री सिब्हिया ने पुतिन पर “दुनिया का समय बर्बाद करने” का आरोप लगाया। वॉशिंगटन में यूक्रेन के राजदूत ने भी कहा कि “हमें रूस के वादों का इंतज़ार करने की जरूरत नहीं।” राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि यूक्रेन किसी भी सूरत में अपना भूभाग नहीं छोड़ेगा और किसी समझौते में कठोर सुरक्षा गारंटियाँ अनिवार्य होंगी। जिनेवा में पिछले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधियों से हुई बातचीत में यूक्रेन ने मूल अमेरिकी योजना में “कई महत्वपूर्ण बदलाव” करवाए हैं, जिसे बाद में एक “अपडेटेड और रिफ़ाइंड फ्रेमवर्क” बताया गया, लेकिन कोई विवरण जारी नहीं किया गया।
यूरोपीय देशों में भी इस नई अमेरिकी पहल को लेकर बेचैनी गहराती जा रही है। जर्मन मीडिया डेर स्पीगेल ने एक कथित गोपनीय ट्रांसक्रिप्ट के हवाले से दावा किया कि यूरोपीय नेताओं को आशंका है कि अमेरिका सुरक्षा गारंटियों की स्पष्टता के बिना यूक्रेन को भूभाग छोड़ने के लिए दबाव में डाल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी कि “यूएस यूक्रेन के साथ धोखा कर सकता है।” जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने ज़ेलेंस्की को आगाह किया कि “आने वाले दिनों में बेहद सावधानी बरतें—ये लोग आपके और हमारे साथ खेल रहे हैं।” फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने भी कहा—“हम यूक्रेन और ज़ेलेंस्की को इन लोगों के साथ अकेला नहीं छोड़ सकते।” हालांकि फ्रांस और अन्य नेताओं ने इन बयानों की पुष्टि से इनकार किया है।
इस पूरी कूटनीतिक हलचल के बीच युद्ध के मैदान पर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं। रूस दक्षिण–पूर्व यूक्रेन में धीरे–धीरे आगे बढ़ रहा है, जबकि दोनों ओर से भारी हताहतों की खबरें हैं। रूस अब भी यूक्रेन के लगभग 20% क्षेत्र पर कब्ज़ा किए हुए है। ऐसे में पुतिन–ट्रंप दूतों की बातचीत का बेनतीजा रहना यह साफ संकेत देता है कि यूक्रेन युद्ध का अंत अभी दूर है, चाहे वैश्विक कूटनीति कितनी भी तेज़ क्यों न चल रही हो।




