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कार्ति चिदंबरम : ‘हेल्थ–सिक्योरिटी सेस बिल’ दरअसल टैक्स लूट का हथियार, देश के चार स्तंभों पर सीधा हमला

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समी अहमद । नई दिल्ली, 4 दिसंबर 2025

संसद में तीखी बहस, कार्ति चिदंबरम के शब्दों ने सरकार को घेरा

लोकसभा में बुधवार को Health Security Se National Security Cess Bill, 2025 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह बिल जितना बड़ा नाम रखता है, अंदर से उतना ही खोखला और खतरनाक है। अपने विस्तारपूर्ण और तथ्यों से भरे भाषण में कार्ति ने इस बिल को “चार गुना गलत” बताते हुए कहा कि यह न केवल संविधान के फेडरल ढांचे पर हमला है, बल्कि व्यापार को नुकसान, स्वास्थ्य क्षेत्र को धोखा, और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर जनता को भ्रम में डालने का तरीका है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल देश के संसदीय ढांचे और वित्तीय पारदर्शिता को प्रभावित करेगा, और भविष्य में केंद्र सरकार को असीमित अधिकार प्रदान करके लोकतंत्र को कमजोर करेगा।

सेस के नाम पर राज्यों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की साजिश?—कार्ति का तीखा सवाल

अपने भाषण की शुरुआत से ही कार्ति चिदंबरम ने सेस को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि हर बार केंद्र सरकार किसी “राष्ट्रीय उद्देश्य” के नाम पर सेस लगाती है, दुनिया को भरोसा दिलाया जाता है कि यह धन बड़ी जरूरतों पर खर्च होगा, लेकिन वास्तविकता यह है कि वह पैसा कभी भी अपने घोषित उद्देश्य तक नहीं पहुँचता।
कार्ति ने कहा—“सेस का पूरा खेल संघीय ढांचे को कमजोर करने का औजार बन चुका है। राज्यों की हिस्सेदारी शून्य होती है और केंद्र पूरा पैसा रखता है। यह संविधान की भावना का अपमान है।” उनका यह बयान विपक्षी बेंचों से जोरदार तालियों के साथ मिला, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से तीखी आपत्तियाँ उठीं, जिससे सदन में अस्थायी शोरगुल भी हुआ।

“यह बिल एक ब्लैंक चेक है”—कार्ति का बड़ा आरोप, बिल में खर्च का उद्देश्य तक परिभाषित नहीं

कार्ति चिदंबरम ने बिल के सबसे खतरनाक पहलू पर जोर देते हुए कहा कि इस सेस को किस पर खर्च किया जाएगा, इसका कोई स्पष्ट उल्लेख बिल में मौजूद नहीं है। उन्होंने पूछा—“एक ऐसा सेस जो करोड़ों-करोड़ रुपये इकट्ठा करेगा, उसका लक्ष्य क्या है? सरकार खुद नहीं बता पा रही। यह कैसे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा? यह कैसे स्वास्थ्य को बेहतर बनाएगा?” उन्होंने कहा कि इस तरह के अस्पष्ट प्रावधान आने वाले समय में दुरुपयोग के दरवाजे खोलेंगे और जनता के पैसे की जवाबदेही समाप्त कर देंगे। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर बिल को धुंधला रख रही है ताकि बाद में धन का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार कर सके।

संसद को बाईपास करने का खतरनाक रास्ता—सरकार को मिली असीमित शक्तियों पर कार्ति का तीखा प्रहार

कार्ति चिदंबरम ने इस बिल के एक और ‘छिपे हुए खतरे’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि यह कानून पास हो गया तो सरकार भविष्य में—

✔ किसी भी वस्तु को इस सेस की सूची में जोड़ सकेगी
✔ बिना संसद में आए इसकी दर बढ़ा सकेगी
✔ और बिल की सीमा अनिश्चित रूप से बढ़ा सकेगी

उन्होंने कहा—“यह सीधे-सीधे कार्यपालिका को पूर्ण अधिकार देने की कोशिश है। यह संसद की शक्ति छीनने की एक सुनियोजित प्रक्रिया है। आज यह सेस है, कल किसी और नाम से यह जनता पर और नए बोझ डाल देगा।” चिदंबरम ने कहा कि यह बिल लोकतांत्रिक संस्थाओं और संसदीय नियंत्रण पर एक मौन हमला है।

“एंटी-बिजनेस, एंटी-हेल्थ, एंटी-नेशनल सिक्योरिटी”—कार्ति ने चारों मोर्चों पर बिल को किया ध्वस्त

कार्ति ने एक-एक करके बताया कि यह बिल कैसे हर मोर्चे पर देश के हितों को नुकसान पहुंचाएगा।
उन्होंने कहा कि—
🔻 बिल एंटी-बिजनेस है क्योंकि यह उत्पादन-लिंक्ड टैक्स की तरह काम करेगा, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
🔻 बिल एंटी-हेल्थ है क्योंकि इसका स्वास्थ्य से कोई सीधा संबंध ही नहीं बताया गया है।
🔻 बिल एंटी-नेशनल सिक्योरिटी है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का कोई खाका प्रस्तुत नहीं करता।
उन्होंने कहा—“नाम भले ही सुरक्षा का है, लेकिन भीतर कहीं भी सुरक्षा का वादा नहीं दिखता। यह बिल जिस चीज़ को प्रमोट करने का दावा करता है, उसी के खिलाफ जाता है।”

“यह बिल लक्ष्य नहीं, भ्रम बेचता है”—कार्ति का भाषण बना सोशल मीडिया की सुर्खी

कार्ति चिदंबरम का यह भाषण अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे सरकार की “टैक्स पॉलिसी की पोल खोल” के तौर पर देख रहे हैं। कई अर्थशास्त्री और पूर्व नौकरशाह भी इस बात से सहमति जता रहे हैं कि अनिश्चित उपयोगों वाला सेस, भारत जैसे बड़े लोकतंत्र में वित्तीय पारदर्शिता को कमजोर करेगा।
लोकसभा में बहस अभी जारी है, लेकिन कार्ति चिदंबरम के तर्कों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है। विपक्ष इसे केंद्र के “राजस्व संग्रह के नाम पर मनमानी” का नया उदाहरण बता रहा है, जबकि सरकार इसे देशहित में ‘आवश्यक कदम’ कह रही है।

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