Home » National » पुतिन यात्रा पर सियासी तूफ़ान: राहुल गांधी का आरोप—‘सरकार नहीं चाहती हम विदेशी नेताओं से मिलें’; प्रियंका बोलीं—भगवान ही जानते हैं क्यों

पुतिन यात्रा पर सियासी तूफ़ान: राहुल गांधी का आरोप—‘सरकार नहीं चाहती हम विदेशी नेताओं से मिलें’; प्रियंका बोलीं—भगवान ही जानते हैं क्यों

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

सरोज सिंह। नई दिल्ली 4 दिसंबर 2025

राहुल गांधी का बड़ा हमला—‘सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाना चाहती है’

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति तेज़ हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है कि वह विपक्ष के नेताओं को विदेशी गणमान्य लोगों से मिलने नहीं देती। राहुल ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ा माध्यम होता है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार इस पर प्रतिबंध लगाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विपक्ष को अलग-थलग करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने दावा किया कि विदेश नीति सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की नीति होती है, लेकिन आज इसे एक व्यक्ति की सोच तक सीमित कर दिया गया है। उनका कहना था कि विदेशी नेताओं से मुलाक़ातें केवल सत्ता पक्ष की नहीं, विपक्ष की भी ज़रूरत होती हैं ताकि दुनिया भारत की व्यापक लोकतांत्रिक सोच को समझ सके।

प्रियंका गांधी का सवाल—‘सरकार को डर किस बात का है?’

राहुल गांधी के आरोप के बाद प्रियंका गांधी ने भी सरकार पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि ऐसे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से विपक्ष के नेताओं को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से मिलने से रोका जा रहा है। प्रियंका गांधी ने तंज कसते हुए कहा, “भगवान ही जानते हैं कि सरकार किस बात से डरती है। क्या उन्हें लगता है कि विपक्ष देश की छवि बिगाड़ देगा? या फिर सरकार को डर है कि दुनिया को असलियत पता चल जाएगी?” प्रियंका ने यह भी कहा कि मोदी सरकार विदेश नीति को भी अपनी राजनीतिक शक्ति का साधन बना चुकी है, जबकि यह राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हुआ विषय है, जिसमें राजनीतिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार इतनी ही आत्मविश्वासी है, तो फिर विपक्ष के अंतरराष्ट्रीय संवाद से उसे समस्या क्यों है।

कांग्रेस का आरोप—विदेश नीति को ‘एकतरफा’ बना रही सरकार

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह भारत की विदेश नीति को ‘एकतरफा’ और ‘व्यक्तिगत शो’ में बदल रही है। पार्टी का कहना है कि पिछले 10 वर्षों में विदेश नीति का लोकतांत्रिक विमर्श पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि यह पहली बार है जब विपक्ष को एक व्यवस्थित तरीके से विदेश नीति के क्षेत्र में अलग-थलग किया जा रहा है। उनका कहना है कि दुनिया के कई बड़े लोकतंत्रों में सत्ता और विपक्ष दोनों विदेशी प्रतिनिधियों से मिलते हैं, ताकि व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत हो सके। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि सरकार का यह रवैया न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बहुलतावादी छवि को भी प्रभावित कर रहा है।

सरकार की चुप्पी और बढ़ते राजनीतिक संकेत

राहुल और प्रियंका गांधी के इन तीखे आरोपों पर अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा ज़ोरों पर है कि पुतिन की यात्रा के दौरान विपक्ष की किसी भी मुलाक़ात को लेकर सरकार बेहद सतर्क है। इससे पहले भी कई मौकों पर विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती। विपक्ष का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार हर उस प्लेटफ़ॉर्म पर नियंत्रण चाहती है जहाँ भारत की छवि और कथा प्रस्तुत होती है। वहीं BJP नेताओं का तर्क है कि विदेश नीति एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, और असंगठित या गलत संदेश अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इन दावों के बीच सच्चाई क्या है, यह सरकार की आधिकारिक स्पष्टीकरण के बिना स्पष्ट नहीं हो सकता।

पुतिन की यात्रा—आमंत्रण पर राजनीति का घमासान तेज़

रूस के राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर विपक्ष का यह सियासी हमला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, और सामरिक साझेदारी जैसे मुद्दों के बीच भारत–रूस संबंध अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार चर्चा में हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह सवाल उठाना कि सरकार विपक्ष को राष्ट्रपति पुतिन से मिलने क्यों नहीं देना चाहती, इस बहस को और गहरा कर रहा है। जानकारों का कहना है कि इस मुद्दे ने विदेश नीति को एक बार फिर घरेलू राजनीति के केंद्र में ला दिया है, और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बयानबाज़ी देखने को मिल सकती है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments