देश की राजनीति एक बार फिर वह सच सामने ला रही है, जिसे जनता भूल जाती है लेकिन नेता कभी नहीं। आने वाले दिनों में BJP सांसद नवीन जिंदल की बेटी की शादी होने वाली है—और इसी समारोह ने भारतीय राजनीति के ‘दो चेहरे’ एक साथ दिखा दिए।
जिन गैर-BJP सांसदों ने सदन से लेकर सड़कों तक बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाए, लोकतंत्र के खतरे की बात कही, किसानों के मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया—वे अचानक अपनी सारी वैचारिक लड़ाइयाँ भूलकर उसी BJP सांसद की बेटी की शादी में नाचने की रिहर्सल कर रहे हैं।
इनमें नाम शामिल हैं—महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले, जो शादी में नृत्य-तैयारी करते हुए दिखाई दीं। और खास बात यह कि वे नृत्य कर रही हैं कंगना रनौत के साथ—वही कंगना, जिसने किसानों को आतंकवादी कहा था और किसान आंदोलन का अपमान किया था।
यह दृश्य साफ़ बताता है—जनता चाहे जितनी लड़ाई लड़ती रहे, नेता पर्दे के पीछे एक ही मंच पर जुड़े रहते हैं। विचारधारा, नैतिकता, विरोध—सब जनता के लिए है। असल में सत्ता के गलियारों में सब कुछ चलता रहता है।
याद रखिए— अगर किसी मेज़ पर एक नाज़ी बैठा हो और बाकी 10 लोग उसके साथ हँस-बोल रहे हों, तो वह मेज़ 1 नहीं, 11 नाज़ियों की मेज़ है। संगत और सहभागिता यही बताती है कि असली सोच कहाँ है। दुर्भाग्यपूर्ण। शर्मनाक। पर सच यही है—राजनीति में दुश्मनी सिर्फ मंच पर होती है, मंच के पीछे नहीं।




