संजीव कुमार । रायपुर 4 दिसंबर
भारत का 358 भी बेकार—शानदार बल्लेबाज़ी के बावजूद गेंदबाज़ी ने कराई निराशा
रायपुर में खेले गए दूसरे ODI में भारतीय टीम ने बल्ले से बेहतरीन प्रदर्शन किया, लेकिन गेंदबाज़ी पूरी तरह फ्लॉप रही। यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद रोहित शर्मा ने आक्रामक शुरुआत दी, पर टिक नहीं पाए। इसके बाद विराट कोहली और रuturaj Gaikwad ने दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज़ों पर हमला बोलते हुए शानदार शतकीय पारियाँ खेलीं। दोनों के बीच 157 रनों की धमाकेदार साझेदारी ने भारत को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया। कोहली ने 102 (93) जबकि गायकवाड़ ने 105 (83) रन बनाए। अंत में कप्तान केएल राहुल ने 66 रन की विस्फोटक पारी खेलकर भारत को 358/5 के विशाल स्कोर तक पहुंचा दिया। 350+ स्कोर आमतौर पर जीत दिलाता है, लेकिन इस बार कहानी अलग थी।
दक्षिण अफ्रीका की रिकॉर्डतोड़ वापसी—मार्कराम का तूफान और मिडिल ऑर्डर की बेखौफ आक्रामकता
358 का लक्ष्य देखने में भले ही भारी लगे, लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने जिस आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की, वही उनके इरादों को दिखाता था। कप्तान एडेन मार्कराम (110 रन, 98 गेंद) ने भारत के गेंदबाज़ों को शुरुआती ओवरों में ही दबाव में डाल दिया। बावुमा (46) और फिर ब्रीट्ज़के (68) ने मार्कराम के साथ मिलकर ऐसी साझेदारियाँ निभाईं, जिसने भारत की जीत की उम्मीदें धीरे-धीरे ख़त्म कर दीं। इसके बाद युवा डेवॉल्ड ब्रेविस ने 34 गेंदों पर 54 रन ठोककर मैच को दक्षिण अफ्रीका की तरफ मोड़ दिया। अंत में कॉर्बिन बॉश ने 15 गेंदों में 29 रन बनाकर मैच को चार गेंद शेष रहते खत्म कर दिया—यह पारी मैच की डील-सीलिंग स्ट्राइक साबित हुई।
भारत की गेंदबाज़ी की बुरी हालत—अर्शदीप और प्रसिध थोड़ा चमके, बाकी पूरी तरह विफल
भारत के गेंदबाज़ पूरे मुकाबले में संघर्ष करते दिखे। अर्शदीप सिंह ने दो विकेट जरूर झटके, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की आक्रामकता रोकने में असफल रहे। प्रसिध कृष्णा को 85 रन खर्च करने पड़े और उन्हें भी दो ही विकेट मिले। कुलदीप यादव और जडेजा पर जमकर रन बरसे। हार्दिक की अनुपस्थिति और एक अतिरिक्त गेंदबाज़ के बिना भारत की डेथ बॉलिंग फिर एक बड़ी समस्या बनकर उभरी। कप्तान राहुल ने बाद में स्वीकार किया कि ओस (dew) बहुत भारी थी और गेंदबाज़ों को नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। लेकिन 358 के बावजूद मैच हाथ से निकल जाना गेंदबाज़ी यूनिट पर बड़ा सवाल उठाता है।
मार्कराम बने मैन ऑफ द मैच—कहा: ‘हम जानते थे भारत को हराने के लिए आक्रामक खेलना ही होगा’
प्लेयर ऑफ द मैच मार्कराम ने कहा कि टीम ने पहले मैच की गलतियों से सीख ली थी और पहले 10 ओवर में सिर्फ सर्वाइव नहीं, बल्कि खाली गेंदों को रन में बदलना था। उन्होंने बताया कि बैवुमा के साथ तय किया गया कि दोनों में से अगर एक आउट होता है तो दूसरा नया बल्लेबाज़ के साथ साझेदारी बनाए रखेगा—और यही रणनीति जीत का कारण बनी। मार्कराम ने भारतीय गेंदबाज़ों की विविधता की तारीफ करते हुए कहा कि जीत आसान नहीं थी, लेकिन टीम की मानसिकता और आक्रामकता ने मैच पलट दिया।
बावुमा का बयान—‘यह भारत को हराने जैसा आसान नहीं, लेकिन हमारी टीम में असाधारण प्रतिस्पर्धा है’
दक्षिण अफ्रीकी कप्तान ने मैच को “अनबिलीवेबल चेज़” बताया और कहा कि भारतीय टीम को हराना हमेशा मुश्किल होता है। उन्होंने ब्रीट्ज़के और ब्रेविस की तारीफ करते हुए कहा कि टीम में हर खिलाड़ी अपनी जगह के लिए लड़ रहा है, जिसकी वजह से टीम का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। बावुमा ने कहा कि यह जीत पूरी टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी।
राहुल का दर्द—‘350 अच्छा स्कोर लगता है, लेकिन हमें 20–25 रन और चाहिए थे… ओस ने सब बिगाड़ दिया’
भारतीय कप्तान केएल राहुल ने स्वीकार किया कि यह हार पचाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बैटिंग यूनिट ने अपना काम किया, लेकिन अंत में हमने 20–25 रन कम बनाए, जो गेंदबाज़ों को मदद दे सकते थे। राहुल ने कहा कि ओस इतनी ज्यादा थी कि गेंदबाज़ों के हाथ से गेंद फिसल रही थी और गेंद पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। राहुल ने बल्लेबाज़ी क्रम में अपने ऊपर आने के फैसले को मैदान में बन रही परिस्थिति के आधार पर सही बताया।
भारत की बल्लेबाज़ी चमकी, गेंदबाज़ी डूब गई; सीरीज अब रोमांचक मोड़ पर
यह मुकाबला दिखाता है कि आधुनिक ODI में 350 पार स्कोर भी अब जीत की गारंटी नहीं है। भारत की गेंदबाज़ी में गंभीर कमियां उभरकर सामने आई हैं—खासकर डेथ ओवर्स में। वहीं दक्षिण अफ्रीका की युवा और आक्रामक टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लक्ष्य कितना भी बड़ा क्यों न हो, डरने का सवाल ही नहीं। सीरीज अब रोमांचक स्थिति में पहुँच गई है और आगामी मुकाबला दोनों टीमों के लिए निर्णायक साबित होगा।




