महेंद्र सिंह । नई दिल्ली 1 दिसंबर 2025
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, प्रख्यात संवैधानिक वकील और AICC लॉ, मानवाधिकार व RTI विभाग के चेयरमैन डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने आज मोदी सरकार को सबसे कठोर शब्दों में घेरते हुए यह साफ़ आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्ड का मामला ना कोई वित्तीय अपराध है, ना धोखाधड़ी है, ना मनी लॉन्ड्रिंग—यह सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्ष को कुचलने की एक संगठित रणनीति है। सिंघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BJP सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस को डराने, धमकाने और बदनाम करने के लिए एजेंसियों का हथियार बनाकर धमकी की राजनीति चला रहे हैं।
सिंघवी ने कहा कि देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, बेरोज़गारी रिकॉर्ड स्तर पर है, समुदायों के बीच नफरत फैल रही है, विदेश नीति बुरी तरह फिसल चुकी है, अमेरिका और चीन के दबाव लगातार बढ़ रहे हैं—लेकिन इन असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए BJP रोज़ नई साजिश रचती है। उन्होंने कटाक्ष किया कि “ED और BJP को तो नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, क्योंकि जहां अपराध नहीं होता, वहां भी क्राइम पैदा करने में इन्हें महारथ हासिल है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि नेशनल हेराल्ड ऐसा अनोखा मामला है जिसमें एक भी रुपये का लेनदेन नहीं हुआ, कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं हुआ, कोई संपत्ति ट्रांसफर नहीं हुई—फिर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस गढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसे दुनिया के अजूबों में शामिल किया जाना चाहिए, क्योंकि यह न्याय प्रणाली का खुला मज़ाक है।
सिंघवी ने इतिहास की ओर इशारा करते हुए बताया कि नेशनल हेराल्ड की पैरेंट कंपनी AJL ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाली सबसे पुरानी संस्थाओं में एक है। इस आदर्शवादी विरासत को बचाने के लिए AICC ने कई बार उसे आर्थिक सहायता दी, जो समय के साथ 90 करोड़ रुपये का लोन बन गया। कंपनी को कर्ज़मुक्त करने और स्थिर करने के लिए इस लोन को हिस्सेदारी में बदला गया—जो कॉर्पोरेट दुनिया में रोज़मर्रा की आम प्रक्रिया है। इसी उद्देश्य से ‘यंग इंडियन’ नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे सहित सोनिया गांधी और राहुल गांधी जैसे आदर्शवादी नेता जुड़े।
उन्होंने बताया कि यंग इंडियन एक Not-for-Profit कंपनी है—जो मुनाफा नहीं कमा सकती, न डिविडेंड देती है और न ही अपने डायरेक्टर्स को कोई वेतन। इसके बावजूद सरकार कह रही है कि AJL की 99% हिस्सेदारी यंग इंडियन के पास जाने का मतलब है कि सारी संपत्ति ट्रांसफर हो गई और मनी लॉन्ड्रिंग हो गई—जो कानून, तर्क और तथ्य, तीनों के विरुद्ध है।
सिंघवी ने इस मामले की कानूनी वास्तविकता भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि पहले से दर्ज चार्जशीट एक प्राइवेट शिकायत थी, जिसे सुब्रमण्यम स्वामी ने लगाया था। यह सरकारी शिकायत नहीं थी, और ED कानून के तहत तभी कार्रवाई कर सकती है जब शिकायत सरकारी अधिकारी द्वारा की जाए। यही कारण है कि उन्होंने कोर्ट में दलील दी थी कि ED की चार्जशीट अमान्य है—और इसी तकनीकी खामी को ठीक करने के लिए अब नई FIR लाई गई है। उनका कहना है कि सरकार पहले विपक्ष को फंसाने की फाइल बनाती है, फिर उसी फाइल की कमजोरियां छिपाने के लिए दूसरी फाइल तैयार करती है।
सिंघवी ने BJP की राजनीति को तीन शब्दों में परिभाषित किया— “थकाओ, झूठ सजाओ और एजेंसियों को नचाओ।” उन्होंने कहा कि BJP का नया नारा है—
“न सबूत, न तर्क… सिर्फ टार्गेट।” और यह टार्गेट कौन है, यह देश भलीभांति समझता है।
उन्होंने जोर दिया कि इस पूरे मामले में न कोई पैसा चला, न कोई अलग कमाई हुई, न धोखा—फिर अपराध कैसे? उन्होंने कहा कि जहां नींव ही नहीं है, वहां इमारत कैसे खड़ी हो सकती है? BJP ने मनी लॉन्ड्रिंग की कहानी हवा से बनाई है, क्योंकि उसका एकमात्र लक्ष्य है—विपक्ष को डराना, जनता को भ्रमित करना और लोकतंत्र को खोखला करना। सिंघवी ने साफ कहा: “हम न झुकेंगे, न रुकेंगे। BJP को जवाब कानून देगा, समय देगा और सबसे बड़ा फैसला जनता देगी।”
उनके इस प्रहार ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कांग्रेस अब नेशनल हेराल्ड मामले को सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई की तरह लड़ेगी।




