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क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं—सोच, संतुलन और साहस का संगम है

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संजीव कुमार । रांची 30 नवंबर 2025

रांची वनडे ने एक बार फिर साबित किया कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट केवल चौके-छक्कों और गिरते विकेटों का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि मानसिक तैयारी, रणनीतिक सूझबूझ और दबाव में साहसिक फैसलों का असली अखाड़ा है। विराट कोहली की गहरी मानसिक शक्ति, केएल राहुल की संतुलित कप्तानी और एडन मार्कराम का हार में भी सीख ढूँढने वाला दृष्टिकोण—तीनों के बयानों ने यह साफ कर दिया कि शीर्ष स्तर का क्रिकेट तकनीक का नहीं, बल्कि दिमाग, धैर्य और नेतृत्व का खेल है। रांची का यह मुकाबला गेंद और बल्ले से आगे बढ़कर तीन क्रिकेटिंग दिमागों की टकराहट बन गया, जिसने दिखाया कि क्रिकेट आज सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सोच, संतुलन और साहस का अद्भुत संगम है।

विराट कोहली: मानसिक तैयारी, शांत दिमाग और अनुभव—उनकी बल्लेबाज़ी का असली विज्ञान

रांची वनडे में विराट कोहली के शतक ने न केवल मैच का रुख बदला, बल्कि उनके बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि क्रिकेट उनके लिए सिर्फ बल्ला घुमाना नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और विवेक का खेल है। कोहली ने स्वीकार किया कि शुरुआती 20–25 ओवर तक पिच बैटिंग के अनुकूल रही, लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती गई, बल्लेबाज़ों को जूझना पड़ा। फिर भी वे कहते हैं कि उनका लक्ष्य सिर्फ एक चीज़ था—खेल का आनंद लेना और हालात को अपनी गति से महसूस करना। कोहली ने बताया कि वे किसी भारी-भरकम तैयारी पर भरोसा नहीं करते, क्योंकि उनका मानना है कि क्रिकेट एक मानसिक खेल है; अगर दिमाग स्थिर हो, तो शरीर अपने आप रिद्म पकड़ लेता है। उनके अनुसार, 300 से ज्यादा वनडे खेलने के बाद वे जानते हैं कि अगर नेट्स में एक-दो घंटे की बल्लेबाज़ी सहज हो जाए, तो मैच में उन्हें किसी अतिरिक्त सोचे-विचारे की जरूरत नहीं पड़ती—बस मन में खेल की तस्वीर साफ होनी चाहिए। वहीं, आउट ऑफ फॉर्म खिलाड़ी को नेट्स में खुद को खोजने में ज्यादा समय देना पड़ता है। कोहली ने यह भी बताया कि उन्होंने रांची की परिस्थितियों को समझने के लिए मैच से पहले गेंद की स्विंग, पिच की प्रकृति और शुरुआत के ओवरों में अपने टेंपो को लेकर काफी विज़ुअलाइज़ेशन किया। इन बातों से साफ दिखता है कि वे सिर्फ एक बल्लेबाज़ नहीं, बल्कि एक सोद्देश्य, सजग और अनुभवी क्रिकेट विद्वान हैं, जिसके लिए मानसिक तैयारी ही असली हथियार है।

केएल राहुल: जिम्मेदारी से निखरती कप्तानी, दबाव को साधता संतुलन और टीम को जोड़ती उनकी नेतृत्व शैली

भारतीय कप्तान केएल राहुल ने मैच के बाद जो कहा, उसमें एक ऐसे कप्तान की झलक थी जिसने दबाव को बोझ नहीं, बल्कि विकास का अवसर माना है। राहुल ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि लंबे अंतराल के बाद ODI क्रिकेट में उतरना उनके लिए भी चुनौतीपूर्ण था और मैच से पहले ‘butterflies in the stomach’ महसूस करना स्वाभाविक था। लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि टीम के गेंदबाज़ों ने योजनाओं पर टिके रहकर लगातार विकेट निकालते हुए मैच को नियंत्रण में रखा। राहुल ने अपनी भूमिका पर भी खुलकर बात की—नंबर 6 पर बल्लेबाज़ी करना आसान नहीं होता, लेकिन पिछले कुछ सीरीज़ से वे इस स्थान पर खेल रहे हैं और यह भूमिका उनके व्यक्तिगत विकास को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि शीर्ष क्रम में रोहित शर्मा और विराट कोहली को इस तरह बल्लेबाज़ी करते देखना हमेशा आनंद देता है; यह ना सिर्फ विरोधी टीम को दबाव में डालता है, बल्कि ड्रेसिंग रूम की ऊर्जा भी बदल देता है।

राहुल ने युवा तेज़ गेंदबाज़ हर्षित राणा की तारीफ़ करते हुए कहा कि टीम को पहले से अंदाज़ा था कि यह खिलाड़ी कितना खतरनाक साबित हो सकता है—उसकी ऊंचाई, गति और नई गेंद से विकेट निकालने की क्षमता उसे भविष्य का बड़ा संपत्ति बनाती है। वहीं कुलदीप यादव को उन्होंने टीम का ‘ब्रेकथ्रू विशेषज्ञ’ बताया, जो हर मुश्किल मोड़ पर विकेट दिलाकर मैच को नए मोड़ पर ले आते हैं। राहुल के बयान में अनुशासन, संयम और टीम के हर खिलाड़ी पर मजबूत विश्वास दिखाई देता है। यह बयान एक ऐसे कप्तान का है जो सिर्फ रणनीति नहीं बनाता, बल्कि अपने खिलाड़ियों को उभारने का काम भी करता है।

एडन मार्कराम: हार में भी सीख, शुरुआती विफलता की स्वीकारोक्ति और टीम की जुझारू भावना की सराहना

दक्षिण अफ्रीका के कप्तान एडन मार्कराम का बयान एक ऐसी टीम का दृष्टिकोण पेश करता है जो हार को छुपाती नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहती है। मार्कराम ने कहा कि वे अपनी टीम की जुझारू भावना पर गर्व करते हैं—हालांकि शुरुआती बल्लेबाज़ों का पतन उनके लिए सबसे बड़ा झटका साबित हुआ। उन्होंने स्वीकार किया कि लक्ष्य का पीछा करने के लिए उनके मुताबिक यह सबसे सही रणनीति थी, लेकिन शुरुआती झटकों ने टीम को पीछे धकेल दिया और यही वह निर्णायक मोड़ था जिसने मैच की दिशा बदल दी।

मार्कराम ने ईमानदारी से यह भी माना कि स्विंग लेती गेंदों के सामने उनका टॉप ऑर्डर टिक नहीं पाया और यह टीम की सबसे बड़ी कमजोरी के रूप में सामने आई। फील्डिंग में भी सुधार की जरूरत बताई, जो इस मैच में स्पष्ट रूप से दिखा। Bosch और Jansen की तारीफ़ करते हुए उन्होंने कहा कि ये दोनों खिलाड़ी उनकी टीम को गहराई और संतुलन देते हैं और पिछले कुछ समय में लगातार टीम के लिए उपयोगी प्रदर्शन कर रहे हैं। मार्कराम का बयान साफ दर्शाता है कि दक्षिण अफ्रीका हार को बहाना नहीं बनाता, बल्कि उसे सीख और सुधार का आधार मानकर आगे बढ़ने की मानसिकता रखता है।

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