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SIR के बहाने आदिवासियों, वंचितों को मतदान प्रक्रिया से बाहर रखने की साजिश : कांग्रेस

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अखिलेश मिश्रा  | नई दिल्ली 22 नवंबर 2025

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि देशभर में जारी Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के माध्यम से आदिवासी समुदायों को सुनियोजित तरीके से चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश रची जा रही है। पार्टी का दावा है कि मतदाता सूची के मसौदे में बड़े पैमाने पर आदिवासी मतदाताओं और वंचितों के नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी पात्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, और दस्तावेज़ों की कमी का आधार बनाते हुए उन्हें पुनः पंजीकरण के लिए मजबूर किया जा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य आदिवासी बहुल सीटों पर चुनावी समीकरण बदलना और उनकी वोटिंग पावर को कमजोर करना है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर बूथ स्तर पर ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनके कारण हजारों आदिवासी मतदाता आगामी चुनावों में मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

कांग्रेस के अनुसार मसौदा मतदाता सूची में भारी अनियमितताएँ सामने आई हैं—कई क्षेत्रों में आदिवासी मतदाताओं के नाम बिना कारण हटाए गए, पते और पहचान से जुड़े दस्तावेज़ों को अचानक अमान्य बताया गया, और कई वैध मतदाताओं को “अप्रमाणित” या “स्थानांतरित” श्रेणी में डाल दिया गया। पार्टी का तर्क है कि दूरदराज़ और वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासियों के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया पहले से ही कठिन है, और SIR के इस तरीके ने उनके लिए मतदान अधिकार बनाए रखना लगभग असंभव बना दिया है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत—सर्वजन मताधिकार—के खिलाफ सुनियोजित प्रयास है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना, मृत या डुप्लीकेट नामों को हटाना और योग्य नए मतदाताओं को शामिल करना है। आयोग ने इसे नियमित और आवश्यक प्रक्रिया बताया है, जो हर कुछ वर्षों में लागू की जाती है। हालांकि, कांग्रेस का सवाल है कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष है, तो प्रभावित क्षेत्रों में आदिवासी मतदाताओं के नाम हटने की संख्या disproportionately अधिक क्यों है? पार्टी ने मांग की है कि सरकार और चुनाव आयोग उन आंकड़ों को सार्वजनिक करे, जिनसे यह स्पष्ट हो सके कि किन समुदायों और क्षेत्रों में कितने नाम हटाए गए हैं और क्यों हटाए गए हैं।

कांग्रेस ने इस मामले को लेकर विभिन्न राज्यों के चुनाव अधिकारियों से मुलाकात की है, ज्ञापन सौंपे हैं और मांग की है कि SIR प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। पार्टी चाहती है कि शिकायत निवारण तंत्र मजबूत किया जाए, पुनरीक्षण कार्य में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो और आदिवासी क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जाएं। कांग्रेस का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया बिना सुधार के जारी रही, तो लाखों आदिवासी मतदाता 2025 के चुनावों में मतदान अधिकार से वंचित हो जाएंगे, जिससे न केवल उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व खत्म होगा बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

कुल मिलाकर, कांग्रेस का आरोप बेहद गंभीर है—कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से एक विशेष समुदाय को लोकतांत्रिक ढांचे से बाहर धकेला जा रहा है। यह आरोप चुनावी राजनीति की संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय के मुद्दे को गहराई से छूता है। यदि इस मामले की पारदर्शी जांच नहीं हुई और आदिवासियों का मतदान अधिकार प्रभावित हुआ, तो यह भारत के लोकतंत्र के लिए एक गहरा संकट है।

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