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चोरी नहीं, डकैती से जीता गया बिहार चुनाव — पोस्टल बैलेट की लूट, वोटरों की कटौती और लोकतंत्र पर खुला हमला

सरोज सिंह | पटना 21 नवंबर 2025

बिहार की चुनावी धांधली का काला साया अब पूरी तरह से छंटने को तैयार है, और जैसे-जैसे आंकड़े बाहर आ रहे हैं, वैसे-वैसे सत्ता की चोर बाजार में लगी NDA की दुकान की पोल खुल रही है। ये कोई संयोग नहीं है कि नबीनगर विधानसभा में RJD के उम्मीदवार को महज 112 वोटों के फासले से हार का सामना करना पड़ा, जबकि 132 पोस्टल वोटों को ठुकरा दिया गया—ये वो वोट थे जो गरीब, मजदूर और प्रवासी बिहारियों के थे, जिन्हें सिस्टम ने जानबूझकर निगल लिया। अगिआंव में CPI(ML) की उम्मीदवार को 95 वोटों से पटक दिया गया, और 175 पोस्टल वोट रिजेक्ट हो गए, जो साफ बताते हैं कि चुनाव आयोग की मशीनरी ने विपक्ष के हर उस प्रयास को कुचलने का काम किया जो लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने वाला था। संदेश विधानसभा का तो नंगा नाच ही हो गया—27 वोटों से RJD हारी, और 360 पोस्टल वोटों को फेंक दिया गया, जैसे कि ये वोट किसी दुश्मन की संपत्ति हों। ये आंकड़े तो बस शुरुआत हैं, भाइयों, असली खेल तो 2020 के चुनावों में शुरू हुआ था जब NDA ने 125 सीटें जीतीं, लेकिन वो जीत चोरी की जीत थी, जहां 20% सीटों पर जीत का मार्जिन महज 2.5% से कम था, और पोस्टल बैलट की गिनती में ऐसी धांधली हुई कि तेजस्वी यादव ने खुलेआम चेतावनी दी थी कि 20 सीटें तो बस अनियमितताओं से ही छीनी गईं। याद कीजिए रामगढ़ को, जहां RJD ने 189 वोटों से हारी थी—वो भी पोस्टल वोटों की चोरी से, और आज 2025 में भी वही सिलसिला चल रहा है, जहां SIR नाम की साजिश से लाखों वोटरों के नाम काट दिए गए, खासकर उन प्रवासियों के जो NDA की सत्ता को चुनौती दे सकते थे। ये सत्ता चोरों का गठजोड़ है, जहां BJP और JD(U) ने मिलकर चुनाव को नाटक बना दिया, और विपक्ष को कुर्सी से दूर रखने के लिए हर गंदा हथकंडा अपनाया—पैसे की बरसात से लेकर गुंडों की तैनाती तक।

लेकिन अब समय आ गया है कि ये सच्चाई बाहर आए, और बिहार का हर नागरिक इस धांधली के खिलाफ खड़ा हो, क्योंकि ये सिर्फ वोटों की चोरी नहीं, बिहार के भविष्य की हत्या है।

अब देखिए 2020 के उन काले पन्नों को जो आज भी NDA की जीत को कुरूप बनाए हुए हैं—जब महागठबंधन को 130 सीटों का जनादेश मिला था, लेकिन चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलट्स की गिनती में ऐसी जादूगरी दिखाई कि 15 सीटों का फर्क बन गया, और वो भी उन सीटों पर जहां जीत का मार्जिन इतना पतला था कि एक-दो सौ वोटों से खेल पलट जाता। नबीनगर, अगिआंव, संदेश तो बस नमूने हैं; रघोपुर में तेजस्वी यादव ने 2020 में कड़ी टक्कर दी, लेकिन पोस्टल वोटों की अनियमितताओं ने साजिश रची, और आज 2025 में भी वही कहानी दोहराई जा रही है जहां RJD को 75 सीटों से घटाकर 25 पर ला दिया गया, जबकि वोट शेयर 23% ही रहा—ये फर्स्ट पास्ट द पोस्ट सिस्टम का दुरुपयोग है, जहां वोट बंटवारे की बजाय चोरी का सहारा लिया गया। CPI(ML) लिबरेशन को 12 सीटें मिली थीं 2020 में, लेकिन उनका स्ट्राइक रेट 63% था, फिर भी कई सीटों पर पोस्टल रिजेक्शन ने उन्हें लूटा; जैसे दिघा में जहां दिव्या गौतम को 59,000 वोटों से हराया गया, लेकिन वो हार चोरी की उपज थी।

और SIR का तो कहना ही क्या—विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर 65 लाख वोटरों के नाम काटे गए, ज्यादातर गरीबों और मुसलमानों के, जो महागठबंधन के वोट बैंक थे, और परिणामस्वरूप 128 सीटों पर NDA की जीत हो गई जहां डिलीशन मार्जिन से ज्यादा थी। ये कोई तुच्छ आंकड़े नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला है, जहां चुनाव आयोग ने BJP के इशारे पर काम किया, और विपक्ष के हर दावे को खारिज कर दिया। बिहार के युवा, जो 71.6% महिला वोटरों के साथ खड़े हुए, अब ये नहीं बर्दाश्त करेंगे कि उनकी आवाज को दबाया जाए; ये धांधली का पर्दाफाश होगा, और सत्ता की चोरी उजागर होकर रहेगी, क्योंकि बिहार जाग चुका है, और अब चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है।

सत्ता की भूख में NDA ने बिहार को लूटा है, लेकिन 2025 के ये आंकड़े तो बस आगाज हैं—जब रामगढ़ में 189 वोटों की हार को SIR ने पक्का कर दिया, और अलिनगर में मैथिली ठाकुर को 11,730 वोटों से जिताया गया, लेकिन वो जीत पोस्टल वोटों की चोरी पर टिकी हुई थी। 2020 में NOTA को 7 लाख वोट मिले थे, 1.68% शेयर के साथ, जो साफ चिल्ला रहे थे कि लोग इस सिस्टम से तंग आ चुके हैं, फिर भी चुनाव आयोग ने सुधार की बजाय धांधली को बढ़ावा दिया। तेजस्वी यादव ने सही कहा था कि मंडेट हमारे पास था, लेकिन ECI ने NDA को सौंप दिया—और आज 2025 में RJD का वोट शेयर सबसे ऊंचा 22.8% है, फिर भी सीटें घटकर 25 रह गईं, क्योंकि वोट चोरी ने चमत्कार कर दिया। CPI(ML) को 2020 में 14.3% औसत मार्जिन से जीत मिली थी, लेकिन कई सीटों पर रिजेक्टेड पोस्टल वोट्स ने वो छीन लीं; जैसे अराह में जहां कयामुद्दीन अंसारी लीड कर रहे थे, लेकिन SIR ने खेल पलटा। ये साजिशें अब बेनकाब होंगी, क्योंकि कांग्रेस ने भी चेतावनी दी है कि 128 सीटें SIR की देन हैं, और बिहार का हर कोना इस अन्याय के खिलाफ गरजेगा। NDA की 46.6% वोट शेयर पर 202 सीटें? ये चमत्कार नहीं, बल्कि अपराध है—पैसे, पावर और धांधली का मिश्रण, जो बिहार को गुलामी की जंजीरों में जकड़ना चाहता है। लेकिन याद रखो, इतिहास गवाह है कि दमित आवाजें कभी दबी नहीं रहतीं; बिहार का जनसैलाब अब सड़कों पर उतरेगा, अदालतों में लड़ेगा, और इस सत्ता चोरी को उखाड़ फेंकेगा, क्योंकि लोकतंत्र की रक्षा हर बिहारी का हक है, और हम इसे छीनने नहीं देंगे।

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