अवधेश कुमार | नई दिल्ली 21 नवंबर 2025
देश की राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे का “ऑपरेशन साइबर हॉक” चलाया। इस लगातार और समन्वित अभियान में दिल्ली पुलिस की डिस्ट्रिक्ट यूनिट्स और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) की संयुक्त टीमें शामिल थीं। अधिकारियों के मुताबिक, यह ऑपरेशन एक ऐसे समय में चलाया गया जब साइबर ठगी के मामले देशभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। दो दिन चले इस सघन अभियान में पुलिस ने 700 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ्तार करते हुए ठगी के 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के संदिग्ध और धोखाधड़ी वाले लेन-देन का पता लगा लिया है। यह आंकड़ा बताता है कि किस तरह दिल्ली और उसके आसपास साइबर फ्रॉड का एक विशाल और संगठित नेटवर्क जड़ें जमा चुका था।
अधिकारियों ने बताया कि “साइबर हॉक” ऑपरेशन का फोकस ऐसे गैंग और नेटवर्क पर था जो फिशिंग, ऑनलाइन चीटिंग, नकली कस्टमर केयर हेल्पलाइन, डिजिटल पेमेंट चोरी, निवेश के नाम पर ठगी और सोशल इंजीनियरिंग स्कैम चलाने में शामिल थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई जिलों से संचालित ये सिंडिकेट एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और देशभर में फैले बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और फर्जी दस्तावेजों के जरिए पैसों को तेजी से घुमाया जाता था। जांच टीमों ने छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, लैपटॉप, नकली सिम कार्ड, बैंक पासबुक, फर्जी KYC दस्तावेज और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए। संदिग्ध बैंक खातों को चिह्नित कर फ्रीज करने की प्रक्रिया भी तुरंत शुरू कर दी गई है।
पुलिस टीमों ने दिल्ली सहित NCR में कई स्थानों पर एक साथ दबिश देकर संदिग्धों को हिरासत में लिया। कुछ तकनीकी विशेषज्ञों और ‘फिशिंग कॉल सेंटर’ की तरह चल रहे ठिकानों का भी भंडाफोड़ किया गया, जहां से रोजाना हजारों लोगों को कॉल कर ठगी की जाती थी। पुलिस का कहना है कि यह ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है—पूरे देश में फैले इस बड़े नेटवर्क की डिजिटल चेन को जोड़ने के लिए पुलिस और संबंधित एजेंसियां डेटा एनालिसिस कर रही हैं। कई साइबर ठगों के विदेशी कनेक्शन की भी जांच होने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की उम्मीद है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस अभियान का लक्ष्य केवल गिरफ्तारियाँ नहीं है, बल्कि पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना है—वो बैंक खाते जिनका उपयोग ठगी के पैसे निकालने में किया गया, वो फर्जी दस्तावेज जो पहचान छुपाने में इस्तेमाल हुए, और वो डिजिटल डिवाइस जिनसे देशभर में ठगी के जाल को संचालित किया जा रहा था। यह कार्रवाई आम लोगों के लिए भी एक राहत की खबर है, क्योंकि लंबे समय से शिकायत थी कि साइबर अपराध के मामलों में कार्रवाई धीमी होती है और शिकायतकर्ता को न्याय नहीं मिल पाता। इस ऑपरेशन ने यह साबित किया कि जब इरादा और रणनीति मजबूत हो, तो साइबर अपराध के सबसे जटिल नेटवर्क को भी तोड़ा जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि साइबर फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल, QR कोड या ऑफर पर भरोसा न करें। जल्द ही पुलिस इस अभियान से संबंधित और विवरण सार्वजनिक करेगी। यह ऑपरेशन केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे देश की साइबर सुरक्षा रणनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।




