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यूक्रेन पर ज़मीन छोड़ने का दबाव?—अमेरिका-रूस योजना पर EU का विस्फोट, कीव में ट्रंप के शीर्ष सैन्य अधिकारी

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अंतरराष्ट्रीय डेस्क 21 नवंबर 2025

रूस–यूक्रेन युद्ध में एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ की शुरुआत हो गई है। अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी अचानक कीव पहुंच गए हैं और इस यात्रा ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। अमेरिकी सैन्य विभाग ने आधिकारिक रूप से कहा है कि यह दौरा “युद्ध खत्म करने के प्रयासों पर चर्चा” के लिए है—लेकिन उसी समय मीडिया में ऐसी रिपोर्टें सामने आईं कि अमेरिका और रूस ने एक नई 28-बिंदुओं वाली गुप्त योजना तैयार की है, जिसमें यूक्रेन से भारी रियायतें मांगी गई हैं, जिनमें शामिल हैं—अपनी और जमीनें छोड़ना, सेना को छोटा करना और महत्वपूर्ण हथियार न रखना।

अमेरिकी आर्मी सेक्रेटरी डैन ड्रिस्कॉल ने कीव में यूक्रेनी प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिदेंको से मुलाकात की और बाद में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से भी मिलने वाले थे। यह ट्रंप प्रशासन का अब तक का सबसे बड़ा सैन्य प्रतिनिधिमंडल है जो यूक्रेन पहुंचा है—इसलिए कूटनीतिक संदेश और भी बड़ा माना जा रहा है। अमेरिकी पक्ष ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “यूक्रेन और रूस दोनों की जिद से निराश” हैं और वे किसी भी कीमत पर युद्ध खत्म करने के लिए “एक व्यावहारिक और स्वीकार्य योजना” चाहते हैं।

बीबीसी को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ महीनों से पर्दे के पीछे रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से ‘शांति प्रस्ताव’ पर बातचीत कर रहे थे—और दोनों देशों से यह फीडबैक लिया गया था कि वे युद्ध खत्म करने के लिए किन शर्तों को स्वीकार कर सकते हैं। अमेरिका का दावा है कि “दोनों पक्षों को रियायतें देनी होंगी”, लेकिन लीक योजना में रियायतें लगभग पूरी तरह यूक्रेन के सिर मढ़ी हुई दिख रही हैं।

यूरोपीय संघ इस प्रस्ताव से भड़क उठा है। EU की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने सख्त लहजे में कहा कि “यूरोप और यूक्रेन को दरकिनार करके कोई भी शांति योजना असंभव है।” फ्रांस के विदेश मंत्री ने तो साफ शब्दों में कहा कि “यूक्रेन किसी भी तरह की आत्मसमर्पण रणनीति मंजूर नहीं करेगा।” यह प्रतिक्रिया इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि न तो यूक्रेन और न ही यूरोपीय देश इस प्रस्ताव के निर्माण में शामिल थे—और इसे रूस के पक्ष में भारी झुकाव वाला माना जा रहा है।

ड्रिस्कॉल की टीम कीव में पहुंचते समय अमेरिकी सेना ने इस प्रस्ताव का कोई ज़िक्र नहीं किया। आधिकारिक बयान में केवल कहा गया कि यह दौरा “तथ्य जुटाने” और “जमीनी हालात समझने” के लिए है। लेकिन यूक्रेन के एक अधिकारी ने CBS को बताया कि बातचीत में संभावित युद्धविराम और फ्रंटलाइन को मौजूदा स्थिति पर रोकने जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है। अधिकारी ने दावा किया कि “जेलेंस्की और ट्रंप पहले ही मौजूदा नियंत्रण रेखाओं पर संघर्ष रोकने पर सहमत हैं”—यह बयान यूक्रेन में विवाद खड़ा कर सकता है, क्योंकि यह भी अप्रत्यक्ष रूप से कुछ इलाकों को रूस के हिस्से में स्थायी रूप से छोड़ने जैसा है।

इस बीच, रूस ने भी हालात को और भयावह बना दिया है। टर्नोपिल शहर में रूसी मिसाइल हमले में 26 लोगों की मौत हो गई और 22 अब भी लापता हैं। हमले के समय जेलेंस्की तुर्की में थे, और रिपोर्टें हैं कि वे वहां ट्रंप के दूत से मिलने वाले थे—लेकिन यह बैठक अचानक रद्द कर दी गई।

रूस पहले ही साफ कर चुका है कि उसकी शर्तें वही हैं जो 2024 में पुतिन ने रखी थीं—यानी यूक्रेन को जमीन छोड़नी होगी, सेना को छोटा करना होगा और NATO में शामिल होने का विचार हमेशा के लिए छोड़ना होगा।

इन सबके बीच ट्रंप के यूक्रेन मामलों के विशेष दूत कीथ केलॉग के भी जनवरी में पद छोड़ने की खबर आई है—यह वही व्यक्ति हैं जिन्हें व्हाइट हाउस में यूक्रेन के सबसे प्रभावी समर्थक के रूप में देखा जाता था।

कुल मिलाकर तस्वीर स्पष्ट है—अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच कूटनीति की सबसे संवेदनशील चालें खेली जा रही हैं। यूरोप नाराज़ है, यूक्रेन चिंतित है, और रूस आक्रामक। युद्ध चौथे वर्ष में प्रवेश कर रहा है और एक महाशक्ति—अमेरिका—एक ऐसा रास्ता थोपने की तैयारी में दिख रहा है जिसे यूरोपीय देश और यूक्रेन दोनों स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह संघर्ष किसी बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुँच सकता है—या आग और भड़क सकती है।

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