महेंद्र सिंह | नई दिल्ली 18 नवंबर 2025
SIR प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने जिस तरह खुला मोर्चा खोल दिया है, उससे साफ है कि पार्टी इसे सिर्फ़ एक तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि लोकतंत्र की मिट्टी हिलाने वाली साजिश मान चुकी है। पार्टी का आरोप है कि यह ‘Special Intensive Revision’ वास्तव में BJP की ‘Special Voter Deletion Drive’ बन चुकी है, जिसके जरिए मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर विपक्षी वोट बैंक को खत्म किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जिस तीखेपन से सवाल उठाए हैं, उससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि अब यह लड़ाई सिर्फ़ कागज़ों या मीटिंग रूम तक सीमित नहीं रहेगी—बल्कि दिल्ली के रामलीला मैदान में दिसंबर में होने वाला महाघेराव इस संघर्ष का आगाज बनेगा। पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया का डिज़ाइन, उसका समय, BLOs पर डाला गया अस्वाभाविक दबाव, राज्यों की आपत्ति को नज़रअंदाज़ कर आगे बढ़ाया जा रहा यह अभ्यास—सब यह दर्शाता है कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक स्वायत्तता छोड़कर सत्ता पक्ष के राजनीतिक एजेंडे का उपकरण बन चुका है। कांग्रेस का यह भी दावा है कि लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं, ताकि चुनाव से पहले एक ‘चुनावी साफ़-सफ़ाई’ के नाम पर विपक्षी वोटों को ही मिटा दिया जाए। खड़गे की चेतावनी—“आपकी निष्ठा संविधान से है, BJP से नहीं”—यह दर्शाती है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप देने जा रही है। अब SIR सिर्फ़ एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र बनाम सत्ता-नियंत्रण की निर्णायक लड़ाई के रूप में उभर चुकी है, और दिसंबर का महाघेराव इसी लड़ाई का सबसे बड़ा राजनीतिक विस्फोट बन सकता है।
BJP SIR प्रक्रिया को Vote Chori के लिए हथियार बना रही है
खड़गे ने अपने बयान में यह भी कहा कि कांग्रेस को अब यह संदेह नहीं, बल्कि पूरा भरोसा है कि BJP और सरकार चुनावी व्यवस्था को इस तरह मोड़ने की कोशिश कर रही है जिससे विपक्ष का बुनियादी वोटर ही मतदाता सूची से गायब हो जाए। उन्होंने इसे “वोट चोरी का नया मॉडल” कहा और आरोप लगाया कि यदि चुनाव आयोग इस पर आंखें मूंदे बैठा रहा तो उसका मौन सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि “राजनीतिक अपराध में साझेदारी” कहलाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता, BLOs, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक कमेटी और बूथ स्तर तक का पूरा संगठन हर हरकत की निगरानी करेगा। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह हर वास्तविक मतदाता के नाम काटने के प्रयास को रोकेगी और हर नकली नाम जोड़ने की कोशिश को उजागर करेगी। खड़गे ने इसे “लोकतंत्र की रक्षा का आंदोलन” बताया और कहा कि कांग्रेस अब न सिर्फ राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी बल्कि संस्थागत दुरुपयोग के खिलाफ देशभर में माहौल बनाएगी।
SIR नहीं, यह BJP का Special Voter Deletion Drive है
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने आज की बैठक के बाद जो आरोप लगाए, उन्होंने चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों को और भड़का दिया है। वेणुगोपाल ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटियों की एकजुट राय है कि चुनाव आयोग का उद्देश्य कुछ खास वर्गों के वोटों को जानबूझकर हटाना है और SIR की पूरी संरचना इसी राजनीतिक मकसद से तैयार की गई है। उन्होंने उदाहरण देकर कहा कि बिहार में SIR का दुरुपयोग कर भाजपा के खिलाफ वोट करने वाले हजारों नागरिकों के नाम सूची से हटाए गए, और वही मॉडल अब 12 राज्यों में लागू किया जा रहा है। वेणुगोपाल ने इसे सीधा-सीधा “Targeted Voter Purge” कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि असम में एक नई Special Revision प्रक्रिया की घोषणा यह साबित करती है कि चुनाव आयोग समन्वय और पारदर्शिता से नहीं, बल्कि “राजनीतिक सुविधा” से काम कर रहा है। उनके अनुसार यह कोई सामान्य गलती नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और योजनाबद्ध साजिश है—जहाँ लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक पक्ष विशेष के हित में ढाला जा रहा है।
चुनाव आयोग नहीं, दमन आयोग है
वेणुगोपाल ने केरल के उदाहरण को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि वहां स्थानीय निकाय चुनाव 9 दिसंबर को होने वाले हैं, और उसी दिन BLOs से मतदाता सूची की अंतिम प्रति तैयार करने को कहा गया है—जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से SIR को स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया, सभी विपक्षी दल (सिवाय BJP के) इस प्रक्रिया को गलत समय पर बता रहे हैं, यहां तक कि केरल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी इसे “गलत समय” करार दिया—but फिर भी चुनाव आयोग किसी की नहीं सुन रहा। वेणुगोपाल ने भावनात्मक रूप से कहा कि BLOs पर इतना दबाव है कि कई जगह वे आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के प्रति असंवेदनशीलता ही नहीं, बल्कि संस्थागत क्रूरता बताया और कहा कि “यह दबाव क्यों? इतनी जल्दी क्यों? किसके आदेश पर?” वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग की इस हठधर्मिता को BJP की रणनीतिक जरूरत बताते हुए कहा कि EC अब न तो स्वतंत्र है और न ही तटस्थ — बल्कि “BJP सरकार का प्रशासनिक विभाग” बन चुका है।
विपक्ष के वोट काटना अब संस्थागत प्रक्रिया
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पिछले कुछ वर्षों में अपने व्यवहार, फैसलों और प्रतिक्रियाओं से जनता के बीच अपने विश्वसनीय चरित्र को कमजोर किया है। पार्टी का कहना है कि SIR प्रक्रिया में लगी “असामान्य जल्दबाजी” का राजनीतिक अर्थ बेहद स्पष्ट है—चुनाव से पहले विपक्षी वोटर बेस को खत्म कर दिया जाए। कांग्रेस का कहना है कि यदि विपक्ष के लाखों समर्थकों के नाम सूची से हटा दिए जाएंगे तो चुनावी परिणाम पहले से तय हो जाएंगे, और यह लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ होगा। पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा इस बात पर टिकी है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष हो—but आज वह जिस तरह काम कर रहा है, उससे संदेह और अविश्वास की आग फैल रही है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के इस रवैये का मुकाबला राजनीतिक मंचों पर नहीं बल्कि जनांदोलनों के जरिए किया जाएगा।
महाघेराव’—कांग्रेस बोलेगी जनता की अदालत में, EC का काला सच
कांग्रेस ने घोषणा की है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर से लाखों कार्यकर्ता, नेता, संगठन और समर्थक शामिल होंगे। यह रैली सिर्फ़ एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के व्यवहार, SIR प्रक्रिया की खामियों और BJP की कथित “Vote Chori योजना” के खिलाफ एक राष्ट्रीय प्रतिरोध आंदोलन होगी। वेणुगोपाल ने कहा कि इस रैली में देश को बताया जाएगा कि कैसे चुनाव आयोग लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है, कैसे संस्थाओं को राजनीतिक लाभ के लिए मोड़ा जा रहा है, और कैसे मतदाता सूचियों के साथ ऐसा खिलवाड़ किया जा रहा है जो किसी भी लोकतांत्रिक देश में अस्वीकार्य है। कांग्रेस ने साफ कहा है—“यह जंग सिर्फ राजनीतिक दल की नहीं, हर उस भारतीय की है जो अपने वोट को सम्मान से देखता है।”
संस्थागत टकराव बनी चुनाव आयोग बनाम विपक्ष की लड़ाई
देश आज उस मोड़ पर खड़ा है जहां मतदाता सूची पर सवाल सिर्फ तकनीकी विषय नहीं बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस के आरोपों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर गहरी बहस छेड़ दी है और यह स्पष्ट है कि दोनों के बीच संघर्ष अब महज़ शब्दों तक सीमित नहीं रहेगा। दिसंबर में रामलीला मैदान में होने वाली विशाल रैली इस संघर्ष का निर्णायक मोड़ बन सकती है, क्योंकि विपक्ष अब संस्थागत दखलंदाजी को सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि लोकतंत्र-विनाशक साजिश के रूप में देख रहा है।




