नई दिल्ली 11 नवंबर 2025
लाल क़िले के पास हुआ भीषण धमाका देश की आत्मा पर सीधा वार है। फरीदाबाद से 3,000 किलो विस्फोटक की बरामदगी और उसी दिन दिल्ली के दिल में बम ब्लास्ट—इन दो घटनाओं ने केंद्र की सुरक्षा तैयारियों पर गहरे सवाल उठाए हैं। ऐसे माहौल में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूटान यात्रा और वहां मनाए जा रहे जन्मदिन समारोह पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह संवेदनशील समय है, जब देश को नेतृत्व और जवाबदेही की जरूरत है। सुप्रिया श्रीनेत और पवन खेड़ा ने कहा कि देश डरा है, असुरक्षित महसूस कर रहा है, और सरकार चुप्पी की आड़ में खुद को बचाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार की यह दूरी और चुप्पी, दोनों ही सुरक्षा संकट को और बढ़ा रही हैं।
दिल्ली में लाल क़िले के ठीक पास हुआ बम धमाका सिर्फ एक आतंकी वारदात नहीं, बल्कि सुरक्षा ढांचे की करारी नाकामी है—कांग्रेसी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे राष्ट्र की आत्मा को झकझोर देने वाला हमला बताया। उन्होंने कहा कि इतनी संवेदनशील जगह पर विस्फोट होना न सिर्फ आतंकियों की ताक़त दिखाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सुरक्षा एजेंसियां खतरों का अनुमान लगाने में असफल रही हैं। इस धमाके में कई निर्दोष नागरिकों की जान गई, और देश का हर आदमी सदमे, डर और बेचैनी के बीच खड़ा है। श्रीनेत के अनुसार लाल क़िला केवल ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता का गर्व है—और उसके आसपास हुई यह घटना हर भारतीय के मन में असुरक्षा की गहरी छाप छोड़ती है।
उन्होंने आगे कहा कि फरीदाबाद में 3,000 किलो विस्फोटक पकड़ा जाना और उसी दिन दिल्ली में धमाका होना किसी बड़े और सुनियोजित आतंकी नेटवर्क की सक्रियता का सबूत है। पहलगाम का सात महीने पुराना आतंकवादी हमला अभी भी स्मृति में है, और अब फिर मीडिया सूत्रों द्वारा इस धमाके में भी किसी आतंकी संगठन की भूमिका के संकेतों ने देश की चिंता को और बढ़ा दिया है। श्रीनेत ने पूछा—“क्या हमारी खुफिया एजेंसियां अलर्ट हैं? क्या इतने बड़े खतरों को भांपने की क्षमता अब कमजोर पड़ रही है?”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए श्रीनेत ने कहा कि जब देश भय और अनिश्चितता से घिरा है, तब प्रधानमंत्री का भूटान में जन्मदिन मनाना गहरी असंवेदनशीलता का संकेत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “क्या किसी ने आपकी कनपटी पर कट्टा रखकर आपको भूटान भेजा था? जब देश त्रासदी से गुजर रहा है, तब आपका कर्तव्य देश के साथ खड़े होना था, न कि विदेश में उत्सव में शामिल होना।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के “भारी मन से आया हूं” वाले बयान से देश को कोई राहत नहीं, क्योंकि जनता को अभी नेतृत्व, भरोसा और स्पष्ट जानकारी चाहिए।
श्रीनेत ने तीखा आरोप लगाया कि धमाके को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन सरकार की ओर से न कोई बयान आया है, न कोई दिशा निर्देश। पूरा देश मीडिया के “सूत्रों” पर निर्भर है, जबकि सरकार मौन है। उन्होंने इसे “जवाबदेही से भागना” बताया और मांग की कि सरकार तथ्य सामने रखे, देश को भरोसे में ले और आगे की कार्रवाई पर स्पष्ट योजना दे। राष्ट्र की सुरक्षा पर किसी भी तरह का समझौता अस्वीकार्य है।
उधर, कांग्रेस के AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा ने भी घटना पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश में बेचैनी और भय का माहौल है, लोग सवालों के जवाब चाहते हैं—यह धमाका किसने किया, इसके पीछे क्या साजिश है, और सुरक्षा तंत्र किस स्तर पर चूका? खेड़ा ने कहा कि सरकार जब तक तथ्य सामने नहीं रखती, तब तक किसी तरह की अटकल लगाना उचित नहीं, लेकिन राजधानी में हुए ऐसे धमाके ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा, “देश को यह भरोसा चाहिए कि सरकार स्थिति को संभाल रही है, लेकिन अभी ऐसा कोई संकेत नहीं मिल रहा।”
खेड़ा और श्रीनेत दोनों ने कहा कि विपक्ष का सवाल पूछना राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्रहित का सवाल है। आतंकवाद किसी पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चुनौती है—और ऐसे समय में प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति देश को और असुरक्षित महसूस कराती है। दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि सरकार का दायित्व केवल फोटो-ऑप नहीं, बल्कि संकट के समय दृढ़ नेतृत्व और पारदर्शिता दिखाना है।
कांग्रेस का कहना है कि दिल्ली धमाका एक अकेली घटना नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि राष्ट्र स्वयं को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा—और अब समय है कि सरकार इस वास्तविकता को स्वीकारकर निर्णायक कदम उठाए।




