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“80 साल बाद सीरिया का राष्ट्रपति अमेरिका में—ट्रंप से अहमद अल-शरा की मुलाकात से मिडिल ईस्ट की राजनीति में भूचाल”

अंतरराष्ट्रीय ब्यूरो 10 नवंबर 

दुनिया की नज़रें इस समय वॉशिंगटन पर टिकी हैं, जहाँ सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की ऐतिहासिक अमेरिकी यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है। शनिवार को वॉशिंगटन पहुंचने के बाद से उनकी अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार मीटिंगों का दौर चल रहा है और आज उनकी मुलाकात पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली है। यह मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का एक नया अध्याय मानी जा रही है—क्योंकि 1946 के बाद पहली बार कोई सीरियाई राष्ट्रपति अमेरिका की जमीन पर कदम रख रहा है। यानी पूरे 80 साल बाद यह अनोखी कूटनीतिक घटना घट रही है। बीते कुछ महीनों से शरा और अमेरिका के बीच रिश्तों में जो तेजी से बदलाव आया है, वह इस यात्रा को और भी रोचक बना देता है।

इस दौरे से ठीक एक दिन पहले अमेरिका ने अहमद अल-शरा को आतंकी ब्लैकलिस्ट से हटाने का बड़ा फैसला किया था। शुक्रवार को यह घोषणा होते ही सीरिया में उत्सव जैसा माहौल बन गया, लोग सड़कों पर जश्न मनाते दिखे और इसे दशकों में सीरिया को मिली सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय राहत बताया गया। अमेरिकी प्रशासन ने भी खुलकर शरा की तारीफ की है। लेकिन सवाल यह है कि अचानक इतने वर्षों तक कठोर रुख अपनाने वाले अमेरिका ने सीरिया पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखाई? विश्लेषकों का कहना है कि यह महज दोस्ती या राजनयिक शिष्टाचार नहीं—बल्कि ट्रंप प्रशासन की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका की पहली प्राथमिकता यह है कि सीरिया को इजरायल के करीब लाया जाए और दोनों देशों के बीच तनाव कम किया जाए। मध्य पूर्व में अमेरिकी नीति हमेशा से “इजरायल की सुरक्षा को प्राथमिकता” पर आधारित रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सीरिया का नया नेतृत्व इजरायल के साथ संबंध सुधारने की ओर बढ़ता है, तो यह ट्रंप प्रशासन की एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। दूसरा बड़ा लक्ष्य है—सीरिया को अमेरिका के लिए मिडिल ईस्ट में एक नई रणनीतिक चौकी बनाना। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका दमिश्क में एक बड़ा सैन्य ठिकाना स्थापित करने की योजना पर विचार कर रहा है, ताकि क्षेत्र में आतंकवादी संगठनों पर नियंत्रण, ईरान की गतिविधियों पर निगरानी और क्षेत्रीय रणनीति को मजबूत किया जा सके।

सीरिया में अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने भी संकेत दिए कि शरा और ट्रंप के बीच आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर एक औपचारिक समझौता संभव है। बैरक ने कहा कि असद शासन के पतन के बाद से सीरिया में हालात तेजी से सुधरे हैं और शरा सरकार ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाइयाँ की हैं—61 रेड, 71 आतंकियों की गिरफ्तारी। अमेरिका इसे एक महत्वपूर्ण सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है और उसी का फायदा उठाते हुए अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने भी कहा कि सीरिया के साथ संबंधों में तेजी से सुधार हो रहा है और पाबंदियों को हटाने से मध्य पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि कुछ महीनों पहले ही शरा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दशकों बाद सीरिया का प्रतिनिधित्व किया था। उस समय भी वैश्विक मंच पर सीरिया की उपस्थिति को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश माना गया था। उसके बाद सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने एक प्रस्ताव रखा जिसमें सीरिया से पाबंदियां हटाने का औपचारिक सुझाव शामिल था। यह पूरी श्रृंखला बताती है कि अमेरिका और सीरिया के संबंधों में आया यह बदलाव किसी “अचानकपन” का नतीजा नहीं बल्कि एक सुविचारित रणनीति का विस्तार है।

अमेरिका–सीरिया–इजरायल त्रिकोणीय संबंध हमेशा से मध्य पूर्व की राजनीति में सबसे संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में सीरिया के राष्ट्रपति का 80 साल बाद अमेरिका का दौरा करना, ट्रंप प्रशासन की खुली प्रशंसा मिलना, पाबंदियों का हटना और आतंकवाद पर साझेदारी के संकेत मिलना—ये सब मिलकर यह बताते हैं कि मध्‍यपूर्व में अमेरिका का खेल बदलने वाला है। आने वाले दिनों में ट्रंप–शरा मुलाकात से कौन से फैसले निकलते हैं, यह पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।

पूरी दुनिया उत्सुकता से देख रही है कि यह नई दोस्ती भविष्य में मध्य पूर्व को स्थिरता देगी या फिर नई शक्ति-समीकरणों की लड़ाई शुरू करेगी। लेकिन इतना तय है कि सीरिया के राष्ट्रपति की यह यात्रा सिर्फ एक प्रतीकात्मक विजिट नहीं—यह नए भू-राजनीतिक समीकरणों की शुरुआत है।

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