श्रीनगर 8 नवंबर 2025
जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती ज़िले पुंछ में जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इलाके में शादी-ब्याह का सीज़न चल रहा है और कई गाँवों व कस्बों में लगातार आतिशबाज़ी की जा रही थी। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आशंका जताई थी कि रात के समय फायरक्रैकर्स की आवाज़ें सीमा पर तैनात जवानों और सुरक्षाबलों को भ्रमित कर सकती हैं, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आतंकी हमले के दौरान प्रतिक्रिया में देरी हो सकती है। इसी सिफारिश के बाद ज़िला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से यह बैन लागू कर दिया है।
पुंछ के जिलाधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने यह आदेश वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) पुंछ की रिपोर्ट के बाद जारी किया। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शादी समारोहों के दौरान पटाखे फोड़ने की घटनाएँ बढ़ गई हैं, जिससे कई बार सुरक्षा बलों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। आतंकियों द्वारा भी ऐसी आवाज़ों का फायदा उठाकर फायरिंग या घुसपैठ जैसी गतिविधियाँ छिपाई जा सकती हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि इस तरह की स्थिति न केवल सुरक्षा के लिए खतरनाक है बल्कि नागरिकों की जान को भी जोखिम में डाल सकती है।
इस रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने भारतीय न्यायिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत कार्रवाई करते हुए पटाखों की बिक्री, खरीद और उपयोग — तीनों पर रोक लगा दी है। आदेश में कहा गया है कि यह प्रतिबंध तुरंत प्रभाव से लागू होगा और अगले आदेश तक जारी रहेगा। ज़िलाधिकारी ने साफ किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पुलिस को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश का कारण — सुरक्षा से सीधा संबंध:
पुंछ ज़िला पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की सीमा से सटा हुआ क्षेत्र है, जहाँ कई बार घुसपैठ की कोशिशें और सीमा पार से गोलाबारी की घटनाएँ होती रही हैं। ऐसे में रात के समय अचानक तेज़ आवाज़ें — चाहे वो पटाखों की ही क्यों न हों — सुरक्षा बलों के लिए गंभीर भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती हैं। कई बार आतंकी हमले या फायरिंग के दौरान आतिशबाज़ी जैसी आवाज़ें सुरक्षा अलर्ट को कमजोर कर देती हैं।
इसी खतरे को देखते हुए पुलिस ने सुझाव दिया कि शादियों या त्योहारों के दौरान भी इस इलाके में किसी भी प्रकार की आतिशबाज़ी पर रोक लगाई जानी चाहिए। सुरक्षा बलों ने यह भी कहा कि सीमावर्ती इलाकों में हाल के महीनों में कुछ संदिग्ध हलचलें देखी गई हैं, इसलिए स्थिति को लेकर पूरी सतर्कता बरतना जरूरी है।
लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया:
इस आदेश के बाद पुंछ जिले के लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी बताया, जबकि कुछ ने इसे त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों की “खुशियों में रोक” बताया। स्थानीय निवासी इमरान अहमद ने कहा, “सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। अगर प्रशासन को लगता है कि पटाखे सुरक्षा में बाधा डाल सकते हैं, तो यह आदेश सही है।” वहीं, कुछ दुकानदारों का कहना है कि वे पहले ही पटाखों का स्टॉक मंगवा चुके हैं, जिससे अब उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
प्रशासन का तर्क — जनहित सर्वोपरि:
जिलाधिकारी अशोक कुमार शर्मा ने कहा कि “यह आदेश जनहित में जारी किया गया है। हमारे लिए नागरिकों की सुरक्षा सबसे पहले है। अगर स्थिति सामान्य रहती है और सुरक्षा एजेंसियों की अनुमति मिलती है, तो भविष्य में इसे पुनः समीक्षा के बाद हटाया जा सकता है।” उन्होंने सभी पंचायत प्रमुखों और स्थानीय निकायों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए हैं।
पुलिस ने बताया कि इस दौरान विवाह समारोहों में डीजे, तेज़ आवाज़ वाले साउंड सिस्टम और पटाखों के उपयोग पर नज़र रखी जाएगी। किसी भी उल्लंघन की स्थिति में आयोजक के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।
पुंछ की संवेदनशीलता और सेना की भूमिका:
पुंछ क्षेत्र अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहाँ लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पास में है और सेना की कई अग्रिम चौकियाँ हैं। कई बार रात में फायरिंग की आवाज़ें या विस्फोट जैसी ध्वनियाँ सीमा पार से भी आती हैं। इसीलिए प्रशासन और सेना दोनों ही नहीं चाहते कि नागरिक गतिविधियों से कोई भ्रम की स्थिति बने।
रक्षा सूत्रों का कहना है कि “सीमा के इतने नज़दीक पटाखों का शोर किसी भी आकस्मिक प्रतिक्रिया को जन्म दे सकता है। सैनिकों को हर आवाज़ को गंभीरता से लेना पड़ता है, इसलिए शादी समारोहों में ऐसे विस्फोटक उपयोग खतरनाक हो सकते हैं।”
पुंछ जिला प्रशासन का यह फैसला स्थानीय सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भले ही यह आदेश शादी के सीज़न में कई लोगों के लिए असुविधाजनक हो, लेकिन इसे जनसुरक्षा के लिहाज से आवश्यक कदम माना जा रहा है। प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि लोग इस फैसले को समझेंगे और सहयोग करेंगे।
साफ़ है कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में “सुरक्षा” और “उत्सव” के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं है, लेकिन पुंछ प्रशासन का यह कदम यह बताता है कि जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी उत्सव से ऊपर है।





