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25 साल का रिकॉर्ड टूटा, दिग्गजों की किस्मत EVM में कैद – बिहार में पहले चरण की वोटिंग पूरी

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पटना 6 नवंबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में मतदान संपन्न हो गया और शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 60.13% मतदान दर्ज किया गया है। यह पिछले 25 वर्षों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है, जो इस बात का संकेत है कि जनता इस बार पूरी जागरूकता के साथ लोकतंत्र के महापर्व में शामिल हुई है। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें नजर आईं। खासतौर से ग्रामीण इलाकों में और महिला मतदाताओं में जोश देखने लायक रहा। युवाओं ने भी बड़ी संख्या में वोट डालकर यह संदेश दे दिया कि वे बिहार की तस्वीर बदलने की जिम्मेदारी खुद उठाना चाहते हैं। गर्म सुबह और उमस भरे मौसम के बावजूद लोगों ने मतदान में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे चुनाव आयोग को भी उम्मीद से ज्यादा मतदान प्राप्त हुआ।

राजनीतिक नजरिए से यह मतदान कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पहले चरण में ही कई बड़े और दिग्गज नेताओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। राजद (RJD) की ओर से बेरोजगारी, जातीय सम्मान और शिक्षा-रोजगार जैसे मुद्दे लगातार उठाए गए। वहीं बीजेपी-जेडीयू (BJP-JDU) गठबंधन ने अपने विकास के दावों और स्थिर सरकार की जरूरत पर चुनाव प्रचार को केंद्रित किया। इस बीच जन सुराज की एंट्री ने चुनावी हवा को और दिलचस्प बना दिया है, जिसने कई सीटों पर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि रिकॉर्ड वोटिंग का सीधा असर नतीजों पर पड़ेगा और यह माहौल बताता है कि जनता इस बार सिर्फ नारों पर भरोसा करने के बजाय नीतियों और कामकाज को आधार बना रही है।

मतदान के दौरान अधिकतर स्थानों पर शांति का माहौल रहा। सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासन की सख्ती के चलते किसी बड़े उपद्रव या हिंसा की खबर सामने नहीं आई। चुनाव आयोग ने लगातार निगरानी रखी और बूथों पर मतदान प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। दिव्यांग और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं, जिससे लोकतंत्र के इस पर्व में हर तबके की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। राजनीतिक दल भी पूरे दिन मतदाताओं से उत्साहपूर्वक अपील करते हुए नजर आए कि वे आगे आकर अपना वोट डालें और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें।

अब मतदान संपन्न हो चुका है और सभी की निगाहें नतीजों पर टिकी हुई हैं। राजनीति के कई महारथियों की किस्मत अब ईवीएम में बंद हो चुकी है और उनकी जीत या हार का फैसला आने वाले कुछ दिनों में सामने होगा। राजनीतिक दलों के भीतर रणनीतियों को फिर से ताजा कर लिया गया है और अगले चरणों के लिए तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। विपक्ष का दावा है कि यह रिकॉर्ड वोटिंग बदलाव की बयार है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे अपने काम की मंजूरी के रूप में देख रहा है। लेकिन सच्चाई क्या है, यह जनता के फैसले से ही पता चलेगा।

इन सबके बीच इतना तो तय है कि बिहार की जनता ने लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से दुनिया के सामने रखा है। उनकी सहभागिता ही इस प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत है। इस ऐतिहासिक मतदान ने दिखा दिया कि जनता अब जाग चुकी है — और यह जागृति केवल बदलाव की नहीं, बल्कि एक नए, मजबूत और बेहतर बिहार की उम्मीदों से भरी है।

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