चुनावी ईमानदारी की कब्र खोदने वाली एक और सनसनी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने विस्फोटक खुलासा करते हुए कहा कि बीजेपी का एक सक्रिय कार्यकर्ता पहले दिल्ली के द्वारका में वोट डालता है और फिर बिहार के सीवान में वोटिंग मशीन पर कब्ज़ा जमाकर दोबारा वोट डाल आता है! यह मामूली गड़बड़ी नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र पर शातिर, सुनियोजित और संगठित हमला है—वो भी बीजेपी कार्यकर्ता के खुले ऐलान और वीडियो सबूत के साथ।
भारद्वाज के मुताबिक राहुल गांधी ने हरियाणा में वोट चोरी के सबूत पहले ही सामने रख दिए थे, पर बीजेपी और चुनाव आयोग ने उन आरोपों को झूठ कहकर दबाने की कोशिश की। अब यह नया मामला सामने आया है, जो बता रहा है कि वोट चोरी कोई अपवाद नहीं, बल्कि बीजेपी का चुनाव जीतने का असली मॉडल है। वोट की लूट, मतदाता सूची में गड़बड़ी और फर्जी वोटर्स के बड़े पैमाने पर खेल को एक कार्यकर्ता की स्वीकारोक्ति ने उजागर कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चुनाव आयोग आखिर किसके इशारे पर चुप है? क्या लोकतंत्र की रक्षा करने वाली यह संवैधानिक संस्था बीजेपी की गोद में बैठ चुकी है? अगर कोई आम नागरिक दो बार वोट डाले तो उसे जेल, और अगर बीजेपी वर्कर करे तो आयोग खामोश क्यों? यह समानता का नहीं—लोकतांत्रिक तंत्र को कब्जे में लेने का संकेत है।
विपक्ष ने करारा हमला करते हुए कहा है कि बीजेपी अब चुनाव नहीं लड़ती, चुनाव चुराती है। SIR हो, EPIC कार्ड हो या फर्जी बूथ मैनेजमेंट—हर जगह मनमानी और मतपेटियों की डकैती से सत्ता हथियाने की पूरी साज़िश बेनकाब हो चुकी है। भारद्वाज का कहना है कि यह सिर्फ एक राज्य या एक घटना नहीं—बल्कि देशभर में फैल चुकी चुनावी महामारी है।
आज सवाल बीजेपी से भी बड़ा है—
क्या भारत में जनता वोट डालती है या बीजेपी की मशीन?
अगर ऐसी डबल वोटिंग और चोरी नहीं रोकी गई, तो आने वाले वक्त में वोट की कीमत शून्य और लोकतंत्र सिर्फ दिखावा बनकर रह जाएगा।




