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142 करोड़ में सिर्फ 11,272 — फर्जी Aadhaar का झूठ क्यों?

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नई दिल्ली 6 नवंबर 2025

देश की राजनीति में पिछले कई महीनों से यह दावा किया जा रहा है कि भारत में बड़ी संख्या में “बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं और विदेशी घुसपैठियों” को Aadhaar कार्ड बांटे गए हैं, जिसके कारण राष्ट्रीय सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता खतरे में पड़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेताओं ने इसे लगातार एक बड़े संकट की तरह पेश किया — मानो Aadhaar के जरिये लाखों अवैध विदेशी भारत की नागरिकता और सरकारी लाभ हड़प रहे हों। लेकिन अब स्वयं केंद्र सरकार के ही अंतर्गत आने वाली संस्था UIDAI के आधिकारिक पत्र ने इन दावों की सच्चाई का पर्दाफाश कर दिया है। संसद की स्थायी समिति को दिए गए UIDAI के जवाब में साफ कहा गया है कि भारत में अब तक केवल 11,272 विदेशी नागरिकों को ही Aadhaar जारी किया गया है, वह भी “Resident Foreigners” के कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत। यानी 142 करोड़ Aadhaar कार्ड्स में से सिर्फ 0.007% ही विदेशी नागरिकों के पास हैं। यह आंकड़ा भाजपा के उन राजनीतिक बयानों को झूठा साबित करता है जो करोड़ों अवैध विदेशी घुसपैठियों के Aadhaar रखने का शोर मचा रहे थे।

यह तथ्य सामने आने के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पहला यह कि जब UIDAI पूरी सटीकता से बता रही है कि सिर्फ 11,272 विदेशी ही Aadhaar धारक हैं, तो फिर चुनाव आयोग Aadhaar को नागरिकता का वैध प्रमाण मानने से क्यों बचता रहा? अगर Aadhaar में बायोमेट्रिक डाटा, QR कोड और आधारभूत सत्यापन प्रणाली है, जिसे स्कैन करते ही फर्जी और असली का फर्क पता लग जाता है — तो फिर गृह मंत्री बार-बार नकली Aadhaar, विदेशी Aadhaar और “फर्जी वोटर” का नैरेटिव क्यों बना रहे थे? क्या यह घबराहट राजनीतिक रूप से मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ को न्यायोचित ठहराने का तरीका थी? यह सवाल देश की चुनावी विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं की साख के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि UIDAI यह तक जानती है कि कितने विदेशी Aadhaar धारक हैं, तो “लाखों-करोड़ों विदेशी घुसपैठियों द्वारा Aadhaar का गलत उपयोग” वाली कहानी सिर्फ एक राजनीतिक डर पैदा करने का हथियार प्रतीत होती है।

दूसरा और सबसे गंभीर प्रश्न — जब Aadhaar पूरी तरह Modi सरकार की ही केंद्रीय एजेंसी UIDAI जारी करती है और राज्यों का इससे कोई लेना-देना नहीं, तो गलत Aadhaar जारी करने का आरोप किस पर है? अगर भाजपा दावा करती है कि भारत में लाखों विदेशी Aadhaar कार्ड लिए घूम रहे हैं, तो यह सीधा आरोप उनके ही शासन-प्रणाली और केंद्रीय एजेंसियों की निष्क्रियता पर है। इसीलिए यह विरोधाभास बहुत बड़ा है — एक तरफ सरकार कहती है कि Aadhaar सबसे सुरक्षित, ईमानदार और पारदर्शी पहचान पत्र है, दूसरी तरफ वही सरकार कहती है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है। सच्चाई दोनों नहीं हो सकती — या तो Aadhaar सुरक्षित है, या फिर सरकार द्वारा फैलाया गया डर राजनीतिक लाभ के लिए है।

लेकिन इस पूरी बहस का सबसे बड़ा खतरा चुनाव आयोग के उस विवादित अभियान — SIR (Silent Invisible Rigging) — से जुड़ा है। विपक्ष और नागरिक अधिकार समूहों का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर विलोपन चल रहा है और खास समुदायों, गरीबों, प्रवासी मजदूरों और विरोधी मतदाता वर्गों को “घुसपैठिया” साबित कर उनके वोट काटे जा रहे हैं। जब UIDAI स्पष्ट कह रहा है कि विदेशियों के Aadhaar की संख्या नगण्य है, तो फिर ECI द्वारा Aadhaar को पहले मतदाता पहचान मानने से इनकार करना और फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनिच्छा से मान लेना — यह पूरी प्रक्रिया संदेह की गहरी लकीर खींचती है। क्या SIR वास्तव में एक चुनाव सुधार है? या फिर बैकडोर NRC — जिसमें वोटरों को चुपचाप और निशाने पर लेकर नागरिकता ही संदिग्ध बना दी जाती है? यह सवाल अब खुलकर खड़ा हो रहा है। सभी आँकड़े और प्रमाण एक ही दिशा में इशारा करते हैं —आधार विदेशी घुसपैठियों का नहीं यह भारत के नागरिकों का विश्वसनीय पहचान पत्र है और इसके खिलाफ दुष्प्रचार एक राजनीतिक चाल से ज़्यादा कुछ नहीं

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