Home » National » बिहार चुनाव: पहले चरण में ही दिग्गजों की किस्मत दांव पर — 3.75 करोड़ वोटर तय करेंगे बड़ी लड़ाई का रुख

बिहार चुनाव: पहले चरण में ही दिग्गजों की किस्मत दांव पर — 3.75 करोड़ वोटर तय करेंगे बड़ी लड़ाई का रुख

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

सरोज सिंह  | पटना 6 नवंबर 2025

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग आज हो रही है और इसी के साथ राज्य की कुल 243 सीटों में से 121 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प और निर्णायक हो गया है। इन सीटों पर कुल 3.75 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मतदान के अधिकार का उपयोग करेंगे। यह चरण इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से जो परिणाम आएंगे, वही पूरे चुनाव के राजनीतिक माहौल और सत्ता समीकरण की दिशा तय कर सकते हैं।

इस चरण में सबसे ज्यादा नज़र रहेंगी तेजस्वी यादव, जो महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से दोनों डिप्टी सीएम — सम्राट चौधरी और वी.के. सिन्हा भी इसी चरण में मैदान में हैं। इसलिए इस फेज को न सिर्फ नेताओं की प्रतिष्ठा बल्कि सत्ता के भविष्य का इम्तिहान भी माना जा रहा है। महागठबंधन के लिए भी ये सीटें खास मायने रखती हैं क्योंकि वर्ष 2020 के चुनाव में इन्हीं 121 सीटों में से 63 सीटें महागठबंधन ने जीती थीं, जबकि बीजेपी–जेडीयू गठबंधन को 55 सीटें मिली थीं। ऐसे में इस बार मुकाबला और भी रोचक और कड़ा होने वाला है।

छोटे दलों के लिए भी यह चरण जीवन-मरण की लड़ाई जैसा है। खासकर CPI(ML) जिनकी 20 सीटों में से 10 सीटें इसी चरण में वोटिंग में जा रही हैं। पिछले चुनाव में CPI(ML) का प्रदर्शन काफी शानदार रहा था और अब पार्टी के लिए उन सीटों को बचाए रखना बड़ी चुनौती है। यही स्थिति LJP (RV) और VIP जैसी पार्टियों की भी है, जिनके लिए यह चरण उनके राजनीतिक प्रभाव की सच्ची परीक्षा है।

पहले चरण के क्षेत्रों में जाति-गणित, स्थानीय असंतोष, बेरोजगारी, महंगाई, और शिक्षण-संस्थाओं से लेकर भूमि विवादों जैसे मुद्दे भी गहरी भूमिका में हैं। साथ ही राज्य में बदलते गठबंधन और नेताओं के कैम्प बदलने के सिलसिले ने भी मुकाबला और उथल-पुथल वाला बना दिया है।

इस बीच चुनाव आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को पुख़्ता करने के लिए अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए हैं। गंगा के तटवर्ती इलाकों और नदियों से कटे ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव ड्यूटी के लिए फेरी और नावों की मदद ली जा रही है। मतदान कर्मियों और सुरक्षा बलों की तस्वीरें इस बात का प्रतीक हैं कि बिहार का यह चुनाव सिर्फ राजनीतिक नहीं — भौगोलिक संघर्ष भी है।

यह चरण न सिर्फ दिग्गज नेताओं की किस्मत को सीधा प्रभावित करेगा बल्कि यह भी तय करेगा कि बिहार की जनता परिवर्तन चाहती है या निरंतरता। विपक्ष इसे जनता का जनादेश मान रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे अपनी नीतियों की मंजूरी के रूप में देख रहा है।

अब सबकी निगाहें 6 नवंबर की वोटिंग पर टिकी हैं — जहाँ बैलेट नहीं, जनता के मन और मौजूदा सत्ता के भविष्य की असली परीक्षा होने जा रही है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments