Home » National » खेसारी की सुनामी देख BJP की बुलडोज़र साज़िश, मुंबई का मकान गिराने की तैयारी

खेसारी की सुनामी देख BJP की बुलडोज़र साज़िश, मुंबई का मकान गिराने की तैयारी

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

छपरा / मुंबई  | 6 नवंबर 2025

बिहार चुनाव 2025 में छपरा सीट पर भोजपुरी सुपरस्टार और जनता के चहेते नेता खेसारी लाल यादव की लोकप्रियता दिन-ब-दिन नए मुकाम छू रही है। हर सभा, हर रोड शो और हर जन-संपर्क अभियान में उमड़ती भीड़ से यह साफ हो चुका है कि छपरा में परिवर्तन की आंधी चल पड़ी है — और इसकी सबसे तेज़ चोट लगी है बीजेपी के दिल पर। जैसे-जैसे जनसमर्थन खेसारी की तरफ बढ़ रहा है, बीजेपी की चिंता बुलडोज़र की गरज में बदलती दिख रही है।

इसी के बीच अचानक मुंबई नगरपालिका हरकत में आती है — और मीरा रोड स्थित खेसारी लाल यादव के बंगले को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस जारी कर देती है। सवाल यह उठता है — क्या यह महज़ संयोग है कि चुनाव प्रचार के चरम पर खेसारी के घर पर बुलडोज़र की तैयारी कर ली गई? क्या सत्ता की घबराहट अब कानून के नाम पर बदला बनकर सामने आ रही है?

बीजेपी की बुलडोज़र राजनीति कोई नई बात नहीं। देश भर में कई मौकों पर यह हथियार सत्ता ने अपने विरोधियों पर चलाया है। और अब वही रणनीति उस कलाकार पर इस्तेमाल की जा रही है जो जनता की आवाज़ बनकर सत्ता को चुनौती देने उतर चुका है। जिसे वोट से न रोक पाओ — उसे डर से रोकने की कोशिश करो यही इस कार्रवाई की असल कहानी लगती है।

खेसारी लाल यादव भोजपुरी मिट्टी की सच्ची पहचान हैं — खेतों-खलिहानों से लेकर फिल्मी पर्दे तक उन्होंने जो प्यार पाया, वही प्यार अब राजनीतिक समर्थन में बदल चुका है। यही वजह है कि बीजेपी को सबसे ज्यादा डर इसी बात का है कि एक कलाकार अब लोगों का नेता बन रहा है। जिनको पहले मनोरंजन तक सीमित समझा जाता था — वही आज जनता की ताकत बनकर उभर रहे हैं और सत्ता को यह सचाई मंजूर नहीं।

लोकतंत्र में हर नागरिक को राजनीति में उतरने का अधिकार है। पर अगर उसका स्वागत रेड कार्पेट से नहीं, बुलडोज़र से किया जाए — तो यह सिर्फ एक पार्टी पर सवाल नहीं, पूरे लोकतंत्र की बीमारी का संकेत है।

क्या कानून केवल चुनावी दुश्मनों के लिए जागता है?

क्या देश में बाकी सभी अवैध निर्माणों पर भी ऐसा ही एक्शन हो रहा है? देश पूछ रहा है — जवाब कौन देगा?

छपरा की जनता का जवाब तो साफ़ है —“जितना डराओगे, उतना जीतेंगे।” क्योंकि बुलडोज़र जमीन गिरा सकता है, जनता का भरोसा नहीं। फैसला सिर्फ एक सीट का नहीं, उस राजनीति का है जहाँ डर बनाम लोकतंत्र की लड़ाई अपने निर्णायक मोड़ पर है। और इस लड़ाई में जनता ने फैसला कर लिया है —छपरा दिल से वोट करेगा, डर से नहीं। 

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments