“नीतीश कठपुतली हैं, मोदी डरपोक हैं, और बिहार अब दिल्ली के दलालों की गिरफ़्त में है।” — कांग्रेस के नेता राहुल गांधी का यह एक वाक्य बिहार की चुनावी रैली में गूंजा और पूरे प्रदेश के सियासी तापमान को अचानक बढ़ा गया। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सबसे तीखा और सीधा हमला करते हुए कहा कि बिहार की सरकार अब जनता नहीं, दिल्ली के दलाल अफसर चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री अब “अडानी-अंबानी के सामने झुकने वाले डरपोक शासक” बन चुके हैं। डबल इंजन सरकार के राज में जनता बेबस बेहाल और राज्य बर्बाद हुआ है। इन ठगों को अब उखाड़ फेंकने और बिहार में बदलाव की बारी है।
बेगूसराय और खगड़िया की संयुक्त जनसभाओं में राहुल गांधी का स्वर इस बार आक्रामक, भावनात्मक और प्रखर था। उन्होंने मंच से कहा — “56 इंच की छाती में कुछ नहीं रखा। वो 56 इंच वाले असल में डरपोक हैं। बिहार की सरकार नीतीश नहीं चला रहे, दिल्ली के दलाल अफसर चला रहे हैं।” उनका यह बयान भीड़ में बिजली की तरह गूंजा, और हजारों की संख्या में जुटे लोग “महागठबंधन ज़िंदाबाद” के नारों से पूरा मैदान हिला उठे।
राहुल गांधी ने कहा कि BJP-JDU सरकार ने बिहार को जानबूझकर पंगु बना दिया है। “कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्य प्रदेश में इन लोगों ने लोकतंत्र का गला घोंटा, अब वही खेल बिहार में चल रहा है। चुनाव आयोग से लेकर प्रशासन तक दिल्ली के इशारे पर काम कर रहा है।”
उन्होंने नीतीश कुमार पर तंज कसा — “नीतीश जी कभी खुद निर्णय नहीं लेते। दिल्ली से जो कागज़ आता है, वही पढ़कर साइन कर देते हैं। अब वो मुख्यमंत्री नहीं, सरकारी रबर स्टांप हैं।”
राहुल ने आगे कहा कि बिहार की असली हालत इसलिए बदतर है क्योंकि “यहां की सत्ता जनता के हाथ में नहीं, कॉर्पोरेट और अफसरशाही की जेब में है।” उन्होंने कहा — “बिहार का हक दिल्ली के कॉरिडोर में नीलाम हो रहा है। गरीब बिहारी बाहर जा रहा है और अडानी-अंबानी का बिज़नेस यहां फल-फूल रहा है।”
मोदी पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी बोले — “मोदी जी अब ‘रील प्रधानमंत्री’ बन चुके हैं। चुनाव आते ही एक्टिंग शुरू कर देते हैं। कभी गरीब के घर चाय पीते हैं, कभी किसान के साथ फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन चुनाव खत्म होते ही अडानी-अंबानी के चरण छूते हैं।”
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं को बेरोजगारी और महंगाई से ध्यान हटाने के लिए सोशल मीडिया और रीलों का सहारा दे रही है — “मोदी चाहते हैं कि आप रील बनाएं, ताकि असली लूटपाट की बात कोई न पूछे।”
राहुल गांधी ने विदेश नीति पर भी प्रधानमंत्री को घेरा — “1971 में अमेरिका ने इंदिरा गांधी को धमकाया था, तो उन्होंने पाकिस्तान तोड़कर बांग्लादेश बना दिया। लेकिन जब ट्रंप ने मोदी से कहा ‘ऑपरेशन सिंदूर बंद करो’, तो दो दिन में मोदी पीछे हट गए। यही फर्क है बहादुरी और डरपोकपन में।”
उन्होंने कहा कि बिहार के अस्पतालों और शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी खराब है कि “दिल्ली के AIIMS के बाहर हजारों बिहारी फुटपाथ पर सोते हैं क्योंकि बिहार का अस्पताल मरीज नहीं, लाशें लौटाता है।”
मछुआरा समुदाय के बीच तालाब में उतरकर राहुल गांधी ने अपनी जमीन से जुड़ी राजनीति का प्रदर्शन किया। उन्होंने घोषणा की —
- हर मछुआरे को ₹5,000 लीन सीजन भत्ता मिलेगा।
मत्स्य बीमा योजना लागू होगी।
- हर प्रखंड में मछली बाजार और मत्स्य संसाधन केंद्र बनेगा।
- पारंपरिक मछुआरों को प्राथमिकता मिलेगी।
उन्होंने कहा — “मैं उनका हूँ जो रोज़ मेहनत करते हैं। मोदी जी तो अंबानी की शादी में जाते हैं, मैं जनता के बीच आता हूँ। क्योंकि मैं जनता का हूँ, वो कॉर्पोरेट का।”
राहुल गांधी ने अंत में कहा — “नीतीश कठपुतली हैं, मोदी डरपोक हैं, और बिहार अब दिल्ली के दलालों की गिरफ़्त में है। जब महागठबंधन की सरकार आएगी, तो बिहार का फैसला पटना से होगा, दिल्ली के दफ्तरों से नहीं।”
उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति में आग लगा दी है। विपक्षी खेमे में जोश बढ़ा है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राहुल गांधी ने अपने तीखे तेवरों से बिहार के चुनावी नैरेटिव को पूरी तरह बदल दिया है। रैली में राहुल गांधी ने न सिर्फ बिहार की जनता से संवाद किया, बल्कि एक संदेश दिया — अब डरपोकों का नहीं, जनता के साहस का दौर आने वाला है।






