किंग्सटन 2 नवंबर 2025
जमैका के दक्षिण-पश्चिमी तटीय इलाक़े ब्लैक रिवर में हरी-भरी बस्तियाँ अब राख और मलबे में तब्दील हो चुकी हैं। कैटेगरी-5 तूफ़ान मेलिसा जब तट से टकराया, तो उसने अपने साथ ऐसी तबाही लाई कि पूरा शहर खंडहर बन गया। दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों लापता हैं, और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। तेज़ हवाओं और समुद्री लहरों ने घरों की छतें उड़ा दीं, पेड़ और बिजली के खंभे धराशायी हो गए, और पूरी बस्तियाँ पानी में समा गईं। जो कभी बाजार हुआ करता था, आज वहां की सड़कों पर सिर्फ गाद, टूटी दीवारें और डूबे हुए वाहन हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, ब्लैक रिवर को अब “ग्राउंड ज़ीरो” कहा जा रहा है — यहां करीब 90 प्रतिशत मकान तबाह हो चुके हैं। राहत एजेंसियां और सेना नावों के ज़रिए फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन मलबे और बाढ़ ने राहत कार्यों को बेहद कठिन बना दिया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बिजली, पानी और संचार व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। लोगों के पास पीने का पानी नहीं है, और खाने की वस्तुएं आसमान छू रही हैं। एक महिला ने पत्रकारों से कहा — “हमारे पास घर नहीं, खाना नहीं, बस अपने बच्चों को बचाए रखने की उम्मीद बची है।”
शहर के मेयर ने बताया कि ब्लैक रिवर को फिर से खड़ा करने में अरबों जमैका डॉलर लगेंगे। अस्पताल, स्कूल, पुलिस स्टेशन, सब कुछ मलबे में तब्दील हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय राहत संगठन जैसे रेड क्रॉस और यूनिसेफ ने आपात सहायता भेजनी शुरू कर दी है, लेकिन प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। कई जगह सड़कें अब भी कीचड़ और पानी में डूबी हुई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेलिसा जैसी भीषण आंधियां अब अपवाद नहीं रहीं, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि कैरेबियन में आने वाले वर्षों में ऐसे सुपर साइक्लोन और बढ़ेंगे। ब्लैक रिवर के लोग अब टूटे घरों के बीच बैठकर यह सवाल पूछ रहे हैं — “हमने क्या गलत किया कि प्रकृति ने हमें इस तरह सज़ा दी?”
फिलहाल ब्लैक रिवर में सूरज फिर से निकला है, लेकिन उसके साथ एक गहरी खामोशी भी है — एक ऐसा मौन जिसमें सिर्फ टूटे सपनों और बिखरे जीवन की आहटें सुनाई देती हैं।




