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चक्रवात मोंथा का कहर: आंध्र प्रदेश में 38,000 हेक्टेयर फसलें और 1.38 लाख हेक्टेयर बागान बर्बाद

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चक्रवात मोंथा (Cyclone Montha) ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, अब तक करीब 38,000 हेक्टेयर में खड़ी फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं, जबकि 1.38 लाख हेक्टेयर बागान (horticulture crops) को भारी नुकसान पहुँचा है। सबसे ज़्यादा प्रभावित ज़िले हैं — नेल्लोर, प्रकाशम, बापटला, कृष्णा और पश्चिम गोदावरी।

तेज़ हवाओं और मूसलाधार बारिश से सैकड़ों गाँवों में पानी भर गया है। कई जगहों पर बिजली आपूर्ति बाधित है और संचार सेवाएं ठप पड़ी हैं। राहत और बचाव कार्य के लिए राज्य सरकार ने NDRF और SDRF की 30 टीमें तैनात की हैं। मुख्यमंत्री वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी ने आपात बैठक कर हालात की समीक्षा की और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित किसानों को तत्काल सहायता दी जाए।

राज्य सरकार ने शुरुआती अनुमान में कहा है कि कृषि और बागवानी क्षेत्र को कुल मिलाकर 500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। केला, नारियल, आम, अमरूद और पपीता के बागान पूरी तरह तबाह हो गए हैं। किसानों ने कहा कि “हमारी सालभर की मेहनत एक रात में खत्म हो गई। अब हमें मुआवज़े की उम्मीद है।”

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि चक्रवात का असर अगले 24 घंटों तक जारी रहेगा और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश एवं दक्षिण ओडिशा में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है। मछुआरों को अगले दो दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने बताया कि अब तक 3,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और लगभग 200 आश्रय शिविर बनाए गए हैं। वहीं, राजमार्ग प्राधिकरण और बिजली विभाग की टीमें सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाने और बिजली बहाल करने में जुटी हैं। चक्रवात मोंथा ने एक बार फिर साबित किया है कि तटीय इलाकों में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ दीर्घकालिक रणनीति बनाना अब समय की सबसे बड़ी ज़रूरत बन चुकी है।

 

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