Home » National » 189 टन गोमांस बरामद, NDA नेताओं के लिंक उजागर—गोदी मीडिया चुप, BJP–TDP सरकारें बेशर्मी से बचाव में जुटीं

189 टन गोमांस बरामद, NDA नेताओं के लिंक उजागर—गोदी मीडिया चुप, BJP–TDP सरकारें बेशर्मी से बचाव में जुटीं

Facebook
WhatsApp
X
Telegram

जनता को भटकाने के लिए तिरुमाला लड्डू ‘घी मिलावट’ का पुराना मामला फिर उछाला गया

विशाखापट्टनम के पास एक विशाल गोदाम से 189 टन मांस—जिसमें बड़ी मात्रा में गाय का मांस (बीफ़) शामिल था—की बरामदगी ने न केवल आंध्र प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया है, बल्कि इस देश के दोहरे चरित्र, कथित ‘गौ-रक्षा’ की ढोंग राजनीति और सत्ता के संरक्षण में पल रहे बहु-करोड़ के अवैध नेटवर्क को नंगा कर दिया है। यह गोदाम सीधे तौर पर TDP नेता सुब्रहमण्य गुप्ता के बेहद करीबी सहयोगी से जुड़ा हुआ पाया गया है, और शुरुआती जांच से यह साफ हो गया है कि यह कोई स्थानीय स्तर का गोरखधंधा नहीं, बल्कि गल्फ देशों को बीफ़ निर्यात करने वाला एक संगठित, वर्षों से चल रहा अवैध रैकेट था—जिसे सत्ता की छत्रछाया के बिना चल पाना नामुमकिन है।

फोरेंसिक रिपोर्ट्स ने स्पष्ट कर दिया है कि जो मांस ‘भैंस का मांस’ बताकर कंटेनरों में भरा जा रहा था, वह वास्तव में बीफ़ था और उसे गलत लेबल लगाकर अरब देशों में भेजा जा रहा था। यह वही खेल है जो बीजेपी और NDA शासित राज्यों में बार-बार देखा गया है—एक तरफ टीवी स्टूडियो में ‘गौ-रक्षा’, ‘हिंदू गौरव’ और ‘धर्म रक्षा’ की ऊँची-ऊँची बातें, दूसरी तरफ सत्ता संरक्षित लॉबियों द्वारा करोड़ों का बीफ़ निर्यात।

सबसे बड़ा सवाल यह है—

जब बीफ़ का एक किलो बरामद हो जाए, तो बीजेपी नेताओं और गोदी मीडिया का स्टूडियो फटने लगता है; लेकिन यहाँ 189 टन बीफ़ पकड़ा गया, और पूरा इकोसिस्टम पाँच दिन से मृत है। आखिर क्यों?

जवाब सीधा है—क्योंकि इस पूरे रैकेट के धागे NDA–TDP गठबंधन के बड़े नेताओं तक पहुँच रहे हैं। जैसे ही यह घोटाला उजागर हुआ, चंद्रबाबू नायडू सरकार ने जनता का ध्यान भटकाने के लिए पुराने तिरुमाला लड्डू घी मिलावट मामले को फिर से हवा देनी शुरू कर दी—मानो 189 टन गाय का मांस बरामद होना कोई मामूली घटना हो, और धार्मिक सेंटीमेंट उछालकर जनता को सच्चाई से दूर रखा जा सके।

यह वही ‘धर्म कार्ड’ है जिसे BJP–TDP हर संकट में खेलते हैं—

⋆ जब घोटाला पकड़ो,

⋆ उन्हें भगवान याद आते हैं;

⋆ जब भ्रष्टाचार उजागर करो,

⋆ उन्हें मंदिर याद आते हैं;

⋆ और जब बीफ़ तस्करी NDए नेताओं से जुड़े होने लगे,

⋆ तब ‘घी मिलावट’ जैसे जर्जर मामलों को फिर से जिलाने की कोशिश होती है।

यह सिर्फ पाखंड नहीं—यह अपराध, राजनीति और धार्मिक भावनाओं के दुरुपयोग का खतरनाक गठबंधन है।

गोदी मीडिया की चुप्पी इस पूरे मामले की अपराधी गवाही है। अगर यह गोदाम किसी विपक्षी नेता से जुड़ा होता तो गोदी मीडिया सात दिन का ‘स्पेशल ऑपरेशन’ चला देता, प्राइम टाइम पर चिल्लाता, ‘देश खतरे में है’, और हर न्यूज़ चैनल इसे ब्रेकिंग बताता। लेकिन यहाँ? शव जैसी चुप्पी। क्योंकि आरोपी “अपने” हैं। क्योंकि बीफ़ रैकेट NDA नेताओं का है। क्योंकि ‘गौ-रक्षक’ सिर्फ कैमरे पर रक्षक हैं, असलियत में व्यापारी।

बीजेपी और TDP दोनों दलों की खामोशी ने यह साफ कर दिया है कि यह घोटाला केवल अवैध व्यापार नहीं, बल्कि सत्ता-प्रायोजित मांस माफिया का एक विशाल नेटवर्क है। 189 टन बीफ़ किसी छोटे गोदाम में गलती से नहीं आ जाता—यह एक व्यवस्थित, तंत्र-सहायित, सुरक्षा-ढाँचे वाला व्यापार है, जिसे सरकारी संरक्षण और राजनीतिक सुरक्षा हासिल है।

आज सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या देश में ‘गौ-रक्षा’ केवल विपक्ष को बदनाम करने का हथियार है? क्या ‘धर्म’ सिर्फ वोट का टूल है? क्या NDA नेताओं के लिए गाय केवल व्यापार है, आस्था नहीं?

और सबसे ज़रूरी— क्या बीजेपी और TDP के बड़े नेता इस देश को बताएँगे कि 189 टन गोमांस का मालिक कौन है? कौन इस अपराध का राजनीतिक संरक्षक है? और यह रैकेट किन-किन की छत्रछाया में फल-फूल रहा था?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक यह मामला केवल एक मीट सीज़र नहीं— NDA की ‘धर्म की राजनीति’ पर सबसे बड़ा आरोप-पत्र है।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments