एबीसी नेशनल न्यूज | लंदन | 19 फरवरी 2026
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबैटन-विंडसर (पूर्व में प्रिंस एंड्रयू) को पद के दुरुपयोग और संवेदनशील सूचनाओं के कथित गलत इस्तेमाल से जुड़े गंभीर आरोपों के तहत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने ब्रिटिश शाही परिवार को एक बार फिर विवादों के केंद्र में ला खड़ा किया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार एंड्रयू पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए कुछ संवेदनशील दस्तावेज और संपर्क ऐसे व्यक्तियों के साथ साझा किए, जिन पर पहले से गंभीर आपराधिक आरोप लगे हुए थे। हाल में सामने आए दस्तावेज, ईमेल और कथित संवाद इस जांच का आधार बने, जिसके बाद पुलिस ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया और संबंधित ठिकानों पर तलाशी भी ली।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामला केवल व्यक्तिगत संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधिकारिक जिम्मेदारियों के दौरान गोपनीय सूचनाओं के संभावित लीक और प्रभाव के अनुचित उपयोग जैसे पहलू भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि ट्रेड एनवॉय के रूप में कार्यकाल के दौरान एंड्रयू ने जिन अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और बैठकों में भाग लिया, उनमें से कुछ की जानकारी और दस्तावेज बाद में विवादित व्यक्तियों तक पहुंचे। इन आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस वित्तीय लेनदेन, यात्रा रिकॉर्ड और संचार के डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है। हालांकि एंड्रयू लगातार इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने कहा है कि जांच में पूरा सहयोग दिया जाएगा तथा आरोपों का अदालत में मजबूती से जवाब दिया जाएगा।
गिरफ्तारी के बाद ब्रिटिश राजनीति और राजशाही के भीतर भी हलचल तेज हो गई है। किंग चार्ल्स तृतीय ने संकेत दिया है कि कानून की प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से चलेगी और किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि न्याय व्यवस्था सभी के लिए समान है। वहीं सरकार और विपक्ष दोनों ने पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है, क्योंकि मामला न केवल शाही परिवार की प्रतिष्ठा बल्कि सरकारी संस्थानों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ब्रिटिश राजशाही की सार्वजनिक छवि पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है, विशेषकर ऐसे समय में जब संस्था पहले से ही जवाबदेही और प्रासंगिकता को लेकर बहस का सामना कर रही है।
हिरासत के दौरान एंड्रयू को किसी प्रकार की विशेष शाही सुविधा नहीं दी गई और उन्हें सामान्य कानूनी प्रक्रिया के तहत रखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसियां मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी पद के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े व्यापक प्रश्न भी खड़े करेगा। फिलहाल पुलिस पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में अदालत में पेशी तथा आगे की कानूनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।




