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चंद्रबाबू नायडू की मेजबानी में टेक्नोलॉजी की नई क्रांति की शुरुआत

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की दूरदृष्टि और तकनीकी नवाचारों के प्रति प्रतिबद्धता का एक और उदाहरण उस समय देखने को मिला जब अमरावती में पहली बार “क्वांटम टेक्नोलॉजी कार्यशाला” आयोजित की गई। इस कार्यक्रम ने न केवल अमरावती को “भारत की क्वांटम वैली” के रूप में वैश्विक मानचित्र पर चिन्हित किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि भारत अब उभरते टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

इस कार्यशाला में IBM, TCS, Microsoft India, AT&T, और Bharat Biotech जैसी वैश्विक कंपनियाँ शामिल हुईं। उन्होंने न केवल अपनी क्वांटम तकनीक से जुड़ी प्रस्तुतियाँ दीं, बल्कि यह भी बताया कि कैसे भारत जैसे विकासशील देश में भी क्वांटम कम्प्यूटिंग, क्वांटम संचार, और क्वांटम सेंसरिंग के ज़रिए बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह पहल भविष्य की तकनीकों पर एकीकृत रणनीतिक सोच को दर्शाती है — जो भारत को टेक्नोलॉजी निर्माणकर्ता के रूप में स्थापित करने का सपना लिए हुए है।

क्वांटम टेक्नोलॉजी: केवल विज्ञान नहीं, आर्थिक और सामाजिक भविष्य की कुंजी

कार्यशाला के दौरान यह स्पष्ट रूप से बताया गया कि क्वांटम टेक्नोलॉजी अब केवल प्रयोगशालाओं की वस्तु नहीं रही, बल्कि यह सीधे तौर पर आर्थिक वृद्धि, राष्ट्रीय सुरक्षा, चिकित्सा नवाचार और डिजिटल संप्रभुता से जुड़ी हुई है। IBM और Microsoft ने बताया कि कैसे वे अमरावती में इंडस्ट्री-एकेडेमिया क्लस्टर स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, जहाँ छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रयोग और नवाचार के अवसर मिलेंगे।

कार्यशाला में बायोटेक्नोलॉजी, डेटा साइंस, और साइबर-सिक्योरिटी जैसे अन्य क्षेत्रों से भी विशेषज्ञ शामिल हुए। Bharat Biotech ने बताया कि क्वांटम कंप्यूटिंग का उपयोग जीनोमिक्स और वैक्सीन डिजाइनिंग के क्षेत्र में किस तरह परिवर्तन ला सकता है। वहीं, AT&T ने क्वांटम संचार को लेकर अपनी सुरक्षित नेटवर्किंग प्रणाली पर चर्चा की, जो 6G और उससे आगे की पीढ़ियों के लिए आधारशिला बनेगी।

इस आयोजन में एन. चंद्रबाबू नायडू ने विशेष रूप से ज़ोर दिया कि भारत को Self-Reliant Technology Nation (STN) बनने के लिए अब विज्ञान, उद्योग और प्रशासन — इन तीनों की एकजुटता जरूरी है। उन्होंने ऐलान किया कि अमरावती में “Quantum Innovation Park” का निर्माण किया जाएगा, जहाँ राज्य सरकार स्टार्टअप्स को जमीन, फंडिंग और रिसर्च सुविधाएँ प्रदान करेगी।

युवा शक्ति, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी पर फोकस

इस कार्यशाला की एक और खास बात रही कि इसमें 50 से अधिक भारतीय इंजीनियरिंग कॉलेजों, NITs और IITs के छात्रों और संकायों ने भाग लिया। इसके माध्यम से न केवल कौशल विकास को बढ़ावा मिला, बल्कि रोज़गार के नए द्वार भी खुले। IBM और TCS जैसी कंपनियों ने घोषणा की कि वे अगले तीन वर्षों में अमरावती क्षेत्र में 5,000 से अधिक क्वांटम टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स की भर्ती करेंगी।

कार्यक्रम के अंत में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, राज्य विज्ञान परिषद, और विदेशी निवेश एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने मिलकर एक “अंतरराष्ट्रीय क्वांटम मिशन सहयोग घोषणापत्र” पर हस्ताक्षर किया। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर रिसोर्सेज और टेक्नोलॉजी साझा कर भारत को क्वांटम शक्ति में तब्दील करना है।

इस कार्यशाला ने यह सिद्ध किया कि अमरावती अब केवल राजधानी नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की प्रयोगशाला बनती जा रही है। “क्वांटम वैली” की यह शुरुआत आने वाले वर्षों में भारत को उस मुकाम तक ले जा सकती है, जहाँ वह न केवल तकनीक का उपभोक्ता, बल्कि निर्माता और नेतृत्वकर्ता होगा।

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