सुमन कुमार | नई दिल्ली 3 जनवरी 2026
दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अब अपना फैसला सुनाने जा रहा है। देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया है कि दोनों की जमानत पर अंतिम निर्णय 5 जनवरी को सुनाया जाएगा। इस ऐलान के बाद न सिर्फ कानूनी हलकों में, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
उमर खालिद और शरजील इमाम पर 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित “षड्यंत्र” में शामिल होने के आरोप हैं। दोनों के खिलाफ यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज है, जिसकी वजह से उनकी जमानत याचिकाएं लंबे समय से अदालतों में अटकी हुई हैं। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट से राहत न मिलने के बाद दोनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष के आरोप भाषणों और विचारों पर आधारित हैं, ठोस हिंसक कार्रवाई का सीधा सबूत नहीं है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि यह मामला सिर्फ भाषणों का नहीं, बल्कि बड़े साजिशी नेटवर्क का है, इसलिए जमानत देना सही नहीं होगा।
करीब चार साल से ज्यादा समय से जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थक लगातार उनकी रिहाई की मांग करते रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष इसे कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखता है। ऐसे में 5 जनवरी को आने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ दो आरोपियों की जमानत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह यूएपीए के तहत लंबी हिरासत, अभिव्यक्ति की आज़ादी और न्यायिक संतुलन पर भी एक अहम संदेश देगा।
अब देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं—क्या उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत मिलेगी या उनकी न्यायिक लड़ाई अभी और लंबी चलेगी, इसका जवाब 5 जनवरी को मिल जाएगा।




