नई दिल्ली 30 सितंबर 2025
बिहार की NCRB रिपोर्ट ने पहले ही अपराध के बिगड़े हालात को उजागर किया था—हत्या, अपहरण, बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की बाढ़। अब उसी रिपोर्ट के नए आंकड़े दलितों के खिलाफ बढ़ते अपराध पर भी गवाही दे रहे हैं। यह तस्वीर केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकारों में सामाजिक न्याय और सुरक्षा सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है।
दलित विरोधी मानसिकता और भयावह आंकड़े
NCRB के अनुसार 2023 में दलितों के खिलाफ अपराध के 57,789 मामले दर्ज हुए। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हर केस एक दलित परिवार के टूटे हुए सपनों और रौंदे गए सम्मान की कहानी है। और ध्यान देने वाली बात यह है कि सबसे ज्यादा अपराध उन राज्यों में हो रहे हैं जहां भाजपा की सरकारें हैं।
शीर्ष 5 राज्य जहां दलित सबसे ज्यादा निशाना बने:
- उत्तर प्रदेश: 15,130 मामले
- राजस्थान: 8,449 मामले
- मध्य प्रदेश: 8,232 मामले
- बिहार: 7,064 मामले
- महाराष्ट्र: 3,024 मामले
क्या यह संयोग है कि भाजपा-शासित राज्यों का नाम सबसे ऊपर है? या फिर यह उस गहरी दलित विरोधी मानसिकता का सबूत है, जो आज सत्ता में बैठे लोगों की नीतियों और प्रशासनिक उदासीनता से झलकती है?
आदिवासियों और दलितों पर दोहरा अत्याचार
कांग्रेस ने सही कहा कि आदिवासियों के खिलाफ अपराधों में 29% की वृद्धि और दलितों के खिलाफ बढ़ते हमले सिर्फ कानून-व्यवस्था की नाकामी नहीं हैं, बल्कि यह सत्ता की सोच का नतीजा हैं। यह वही सरकार है जो जनजातीय गौरव दिवस और अंबेडकर जयंती पर बड़े-बड़े आयोजन करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर आदिवासियों और दलितों को न्याय से वंचित रखती है। उनके अधिकार छीने जाते हैं, उनकी जमीनें छिनी जाती हैं, और जब वे आवाज उठाते हैं तो उन पर ही अत्याचार की हदें पार कर दी जाती हैं।
महिलाओं की सुरक्षा के दावे भी खोखले
इसी रिपोर्ट ने यह भी साफ किया कि 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,48,211 मामले दर्ज हुए, जबकि 2022 में यह संख्या 4,45,256 थी। यानी हर साल अपराध का ग्राफ ऊपर ही जा रहा है। सवाल यह है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला सुरक्षा और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के नारे हर मंच से दोहराते हैं, तो हकीकत में महिलाओं की सुरक्षा क्यों लगातार बिगड़ रही है?
बिहार में ‘गुंडाराज’, देशभर में अपराध का बोलबाला
बिहार में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है। 2,862 हत्याएं, 14,371 अपहरण और 22,952 महिलाओं पर अपराध—ये आंकड़े ही साबित करते हैं कि डबल इंजन सरकार अपराधियों के सामने नतमस्तक हो चुकी है। जनता भय में जी रही है, जबकि सरकार सिर्फ खोखले प्रचार और इवेंट मैनेजमेंट पर फोकस कर रही है।
जवाबदेही से बच नहीं सकते मोदी और उनके सहयोगी
यह स्पष्ट है कि आज दलित, आदिवासी और महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं। और इसके पीछे कोई अमूर्त कारण नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार की प्राथमिकताओं की कमी है। भाजपा और जेडीयू जैसी सरकारें सुरक्षा और न्याय की बजाय सत्ता बनाए रखने और प्रचार की राजनीति में व्यस्त हैं।
कांग्रेस का सवाल बिल्कुल वाजिब है—क्या यही है मोदी सरकार का नया भारत, जहां दलितों का स्वाभिमान रौंदा जाता है, आदिवासियों के हक छीने जाते हैं और महिलाएं असुरक्षित महसूस करती हैं? अगर नहीं, तो फिर जवाब कहाँ है? जनता अब चुप नहीं बैठेगी।




