पटना/नई दिल्ली 12 अक्टूबर 2025
INDIA गठबंधन की निर्णायक कवायद
बिहार की राजनीति इस वक्त एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहाँ राज्य के भविष्य की दशा और दिशा अब पटना की गलियों से नहीं, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से निर्धारित होने वाली है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव का दिल्ली आगमन, विपक्षी INDIA गठबंधन (Indian National Developmental Inclusive Alliance) के लिए एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और रणनीतिक कदम है। यह दौरा महज एक शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सीट शेयरिंग के जटिल और संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस हाईकमान और अन्य घटक दलों के साथ एक अंतिम, निर्णायक सहमति बनाने की गहन कवायद है।
यह बैठक इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि गठबंधन के भीतर कई दौर की वार्ताओं के बावजूद, RJD, कांग्रेस, वाम दलों और छोटे क्षेत्रीय दलों के बीच सीटों के बँटवारे को लेकर बनी अनिश्चितता अभी तक समाप्त नहीं हो पाई है, जिससे विपक्ष की एकजुटता पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं। इस माहौल में, लालू और तेजस्वी की दिल्ली यात्रा को एक अंतिम प्रयास के रूप में देखा जा रहा है ताकि गठबंधन एक ठोस, एकजुट और आक्रामक रूप में जनता के सामने उतर सके और सत्ताधारी भाजपा-एनडीए गठबंधन को सफलतापूर्वक चुनौती दे सके। इस बैठक से निकलने वाला कोई भी निष्कर्ष न केवल बिहार के राजनीतिक समीकरणों को तुरंत प्रभावित करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी विपक्षी एकता की विश्वसनीयता को मजबूत या कमजोर करने का काम करेगा।
निर्णायक बातचीत की हलचल: सीटों का जटिल समीकरण और कांग्रेस-RJD के बीच संतुलन की चुनौती
दिल्ली में लालू और तेजस्वी यादव की कांग्रेस हाईकमान, जिसमें मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता शामिल हैं, के साथ होने वाली यह बैठकें सीट बँटवारे के जटिल फार्मूला पर केंद्रिक हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि प्रमुख घटक दल अपनी पिछली ताकत और राजनीतिक महत्व के आधार पर सीटों की उच्च मांग कर रहे हैं: RJD लगभग 120 सीटों पर अपना दावा मजबूती से पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस पार्टी अपने संगठनात्मक विस्तार और राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन के नेतृत्व में अपनी भूमिका के अनुरूप 70 से 80 सीटों की माँग पर अड़ी हुई है, जिससे माँग और आपूर्ति के बीच एक बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू प्रसाद यादव का दिल्ली आना, इस अगतिरोध को तोड़ने और कांग्रेस को एक ऐसा मध्य मार्ग सुझाने का प्रयास है जो दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक रूप से स्वीकार्य हो। कांग्रेस की यह अपेक्षा है कि उसे राज्य में अपने पुनर्जीवित संगठन और शहरी, दलित व अल्पसंख्यक वोटों के आधार पर सम्मानजनक हिस्सेदारी मिले, जबकि RJD अपनी मजबूत यादव-मुस्लिम जमीनी पकड़ के कारण खुद को गठबंधन का सबसे बड़ा स्तंभ मानती है।
दिल्ली में होने वाली चर्चा का मूल उद्देश्य इसी बिंदु पर संतुलन स्थापित करना है: एक ऐसा समझौता जो न केवल कांग्रेस के असंतोष को शांत करे, बल्कि RJD के चुनावी वर्चस्व को भी बनाए रखे।
इस बैठक का सफल होना इसलिए भी अनिवार्य है क्योंकि अगर यहाँ सहमति नहीं बन पाती है, तो इसका सीधा लाभ भाजपा-एनडीए को होगा जो पहले से ही अपने घटक दलों के बीच सीटों का बँटवारा लगभग तय कर चुका है और विपक्ष की अव्यवस्था को चुनावी नैरेटिव बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
लालू का अनुभव और तेजस्वी की ऊर्जा: गठबंधन में स्थिरता और भविष्य की रणनीति
यह दिल्ली दौरा सिर्फ सीटों के गणित तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लालू प्रसाद यादव के दशकों पुराने राजनीतिक कौशल और तेजस्वी यादव की युवा, प्रगतिशील ऊर्जा के एक रणनीतिक मेल का प्रतीक है। भारतीय राजनीति के धुरंधर खिलाड़ियों में गिने जाने वाले लालू यादव, जटिल जातीय और राजनीतिक समीकरणों को साधने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
उनकी उपस्थिति यह सुनिश्चित करेगी कि कांग्रेस के साथ होने वाली बातचीत में समझौते और लचीलेपन की गुंजाइश बनी रहे, जिससे गठबंधन टूटने की आशंका कम हो। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने अपने पिछले चुनावी प्रदर्शनों और रोजगार, शिक्षा और विकास जैसे ठोस मुद्दों पर फोकस करके बिहार के युवा मतदाताओं के बीच एक नई उम्मीद जगाई है। उनका प्रयास यह रहेगा कि सीट शेयरिंग के इस फैसले से गठबंधन की छवि सकारात्मक्ता और भविष्योन्मुखी बनी रहे, न कि केवल सत्ता के लिए जोड़-तोड़ करने वाले दलों के समूह के रूप में।
इस बैठक में न केवल सीटों के बँटवारे पर, बल्कि संयुक्त घोषणा पत्र के मुख्य बिंदुओं और चुनाव प्रचार की साझा रणनीति पर भी चर्चा होने की प्रबल संभावना है। गठबंधन के नेताओं को यह अच्छी तरह पता है कि बिहार में जीत हासिल करने के लिए उन्हें केवल भाजपा को हराना नहीं है, बल्कि जनता को एक विश्वसनीय, एकजुट और मजबूत विकल्प पेश करना होगा, और इसका पहला कदम दिल्ली में होने वाली इस बड़ी बैठक में तय होगा। इस प्रकार, लालू और तेजस्वी की यह यात्रा बिहार की राजनीतिक दशा और दिशा को निर्धारित करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक घटना है।




