एबीसी नेशनल न्यूज | तेहरान | 3 मार्च
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Iran की बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में अपने मिसाइल कार्यक्रम को लगातार मजबूत किया है। इसी वजह से उसका मिसाइल जखीरा क्षेत्र में सबसे बड़ा और प्रभावशाली माना जाता है।
बैलिस्टिक मिसाइलें सामान्य रॉकेट की तरह सीधे लक्ष्य तक नहीं जातीं। इन्हें जमीन से दागा जाता है, ये पहले ऊंचाई की ओर जाती हैं और फिर घुमावदार रास्ते से बहुत तेज रफ्तार में नीचे गिरती हैं। जब इनकी गति मैक 5 यानी लगभग 6,125 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक बताई जाती है, तो इन्हें हाइपरसोनिक श्रेणी में रखा जाता है। इतनी तेज गति का मतलब है कि लक्ष्य देश के पास प्रतिक्रिया देने का समय बेहद कम होता है।
ईरान की कुछ प्रमुख मिसाइलों की मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। इसका अर्थ है कि वे पूरे मध्य पूर्व के कई हिस्सों तक पहुंच सकती हैं। तेज रफ्तार और ऊंची उड़ान की वजह से इन्हें रोकना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि Israel जैसे देशों के पास उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद हैं, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि हर मिसाइल को पूरी तरह निष्क्रिय करना आसान नहीं होता।
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, किसी भी मिसाइल की ताकत सिर्फ उसकी रफ्तार में नहीं होती। उसकी सटीकता, वारहेड क्षमता, मार्ग बदलने की क्षमता और लॉन्च सिस्टम भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। साथ ही, देशों द्वारा किए गए दावों और वास्तविक प्रदर्शन में अंतर भी हो सकता है, इसलिए किसी भी हथियार प्रणाली का मूल्यांकन सावधानी से किया जाता है।
मौजूदा हालात में मिसाइल तकनीक क्षेत्रीय शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन चुकी है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि हथियारों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से अस्थिरता और तनाव बढ़ सकता है। अंततः स्थायी समाधान शांति और कूटनीति से ही संभव है, क्योंकि किसी भी संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।




