नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2025
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत सरकार से तात्कालिक स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या वह ‘Coldrif’ कफ सिरप, जिसे हाल ही में बच्चों की मौतों से जोड़ा गया है, अन्य देशों को भी निर्यात किया गया था। यह वही सिरप है जिसके सेवन से मध्य प्रदेश के चिंदवाड़ा जिले में 18 बच्चों की मौत की आशंका जताई गई है। WHO की यह कार्रवाई भारत की फार्मा इंडस्ट्री पर गहरा सवाल खड़ा कर रही है।
WHO के अनुसार, इस सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) जैसे जहरीले तत्व पाए जाने की संभावना है — वही रसायन जो पहले गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और कैमरून में बच्चों की मौतों का कारण बना था। अगर यह साबित हो गया कि Coldrif का निर्यात हुआ है, तो यह भारत की दवा उद्योग के लिए वैश्विक प्रतिष्ठा का बड़ा संकट बन सकता है।
भारत के केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने सभी राज्यों को सतर्क कर दिया है और Coldrif सहित सभी कफ सिरपों की जांच के निर्देश दिए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में यह पाया गया है कि निर्माता कंपनी Sresan Pharmaceuticals ने गुणवत्ता परीक्षण और सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया। सरकार ने कंपनी की गतिविधियाँ तत्काल बंद कर दी हैं और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
WHO ने कहा है कि यदि भारत की ओर से पुष्टि मिलती है कि यह सिरप निर्यात हुआ था, तो वह Global Medical Product Alert जारी करेगा, जिससे दुनिया के सभी देशों को चेतावनी दी जाएगी। इससे न केवल भारत के निर्यात पर असर पड़ेगा, बल्कि ‘फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में भारत की साख को भी गहरा धक्का लग सकता है।
गौरतलब है कि 2022–23 में भी भारतीय कंपनियों द्वारा निर्मित सिरपों से गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में 100 से अधिक बच्चों की मौतें हुई थीं, जिसके बाद भारत सरकार ने कफ सिरप निर्यात से पहले अनिवार्य लैब परीक्षण का आदेश दिया था। फिर भी Coldrif जैसे मामले सामने आना, सिस्टम की लापरवाही और निगरानी में बड़ी खामियों की ओर इशारा करता है।
WHO और भारत के बीच यह संवाद अब केवल दवा सुरक्षा का मामला नहीं रहा, बल्कि यह सवाल बन गया है।
क्या भारत अपनी फार्मा शक्ति को जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ संभाल पा रहा है?




