राष्ट्रीय | ABC NATIONAL NEWS | नई दिल्ली | 3 अप्रैल 2026
देश की राजनीति में एक बार फिर पुराने रिश्तों और फैसलों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और एनसीपी प्रमुख Sharad Pawar के संबंधों को लेकर नया तूफान खड़ा कर दिया है। इन दावों में कहा गया है कि जब यूपीए सरकार के दौर में नरेंद्र मोदी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी और उनका राजनीतिक भविष्य संकट में नजर आ रहा था, उस समय शरद पवार ने उन्हें बड़ी राहत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण बताया जा रहा है कि बाद के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच ‘गुरु-चेला’ जैसे संबंध सार्वजनिक तौर पर नजर आए।
इन दावों के मुताबिक, मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद शरद पवार को न केवल सार्वजनिक मंचों पर सम्मान दिया, बल्कि 2017 में उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी नवाजा गया। बारामती में एक कार्यक्रम के दौरान मोदी द्वारा पवार के पैर छूने और उन्हें ‘गुरु’ कहने की घटना भी अब फिर चर्चा में है, जिसे इन दावों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ सम्मान था या इसके पीछे कोई पुराना राजनीतिक समीकरण काम कर रहा था।
इस मुद्दे को और हवा तब मिली जब Sanjay Raut की 2025 में प्रकाशित किताब का हवाला दिया गया, जिसमें ऐसे ही संकेतों का जिक्र बताया जा रहा है। इससे पहले भी कई बार यह चर्चा उठ चुकी है कि यूपीए काल में कुछ बड़े राजनीतिक हस्तक्षेपों ने कई नेताओं के करियर को प्रभावित किया था, लेकिन इस तरह सीधे तौर पर नाम सामने आने से मामला और संवेदनशील हो गया है।
इन खुलासों के बाद विपक्ष को बीजेपी पर हमला करने का नया मौका मिल सकता है, जबकि बीजेपी के लिए यह मुद्दा असहज करने वाला बन सकता है। खासकर तब, जब शरद पवार को लेकर पहले भी कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामने आते रहे हैं, ऐसे में यह पूरा मामला राजनीतिक नैतिकता और पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
इन दावों पर न तो Narendra Modi और न ही Sharad Pawar की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया आई है, लेकिन जिस तरह से यह मुद्दा तेजी से उभरा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराएगा और सियासी माहौल को और ज्यादा गर्म करेगा।




