सीतामढ़ी, 9 नवंबर 2025
बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को सीतामढ़ी में राजद (RJD) प्रत्याशियों के समर्थन में एक जबरदस्त जनसभा को संबोधित किया। भाषण के दौरान उन्होंने मंच पर हाथ में एक LED लालटेन उठाई और कहा कि अब बिहार का भविष्य अंधकार में नहीं रहेगा, बल्कि लालटेन की इस रोशनी से जगमगाएगा। अखिलेश ने बीजेपी पर सीधा वार करते हुए कहा — “बीजेपी वाले लैपटॉप नहीं चला पाते, डिजिटल इंडिया की बात करते हैं। जिन्हें तकनीक की समझ नहीं, वो देश की दिशा क्या तय करेंगे? बिहार के लोगों को अब लालटेन की रोशनी में सच देखना होगा, क्योंकि बीजेपी ने बस झूठे नारों का अंधकार फैलाया है।”
अखिलेश यादव ने कहा कि यह लालटेन सिर्फ़ RJD का चुनाव चिन्ह नहीं है, बल्कि यह उस किसान, मजदूर, और बेरोजगार नौजवान की आवाज़ और उम्मीद की प्रतीक है, जो रोज़ अपने संघर्षों की आग में तपता है। उन्होंने कहा, “जब गरीब के घर में अंधेरा होता है, जब किसान के खेत में बिजली नहीं होती, जब नौजवान को नौकरी नहीं मिलती — तब लालटेन ही उम्मीद की लौ बनती है। भाजपा वालों को विकास की नहीं, सिर्फ़ विज्ञापन की समझ है। वे रोशनी की बात करते हैं, पर खुद अंधकार के सौदागर हैं।”
सभा में जब अखिलेश ने LED लालटेन हवा में उठाई तो मंच के नीचे से हजारों समर्थकों की आवाज़ गूंजी — “लालटेन ज़िंदाबाद! अखिलेश यादव ज़िंदाबाद!” उन्होंने कहा कि “बीजेपी वालों ने युवाओं को लैपटॉप का वादा किया था, लेकिन दिया क्या? सिर्फ़ झूठे भाषण। हमने उत्तर प्रदेश में लाखों छात्रों को लैपटॉप दिया, क्योंकि हमें पता था कि शिक्षा ही असली विकास है। भाजपा वालों को शिक्षा से डर लगता है, क्योंकि शिक्षित जनता सवाल पूछती है, और उन्हें सवालों से डर लगता है।”
अखिलेश ने कहा कि भाजपा की सरकार तकनीक के नाम पर बस प्रचार कर रही है। “जिन्हें लैपटॉप चलाना नहीं आता, वो डिजिटल इंडिया की बातें करते हैं। जिनके पास दिमाग नहीं, वे डाटा का ढोल बजा रहे हैं। नरेंद्र मोदी कहते हैं कि उन्होंने भारत को विश्वगुरु बना दिया, लेकिन हक़ीक़त ये है कि उन्होंने भारत को बेरोजगारी और महंगाई का केंद्र बना दिया है। आज युवा हाथ में लैपटॉप नहीं, कर्ज़ और असुरक्षा लिए घूम रहा है।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो ‘अमृतकाल’ बताया था, वह असल में ‘अंधकार काल’ साबित हुआ है।
अखिलेश यादव ने नीतीश कुमार पर भी तंज कसते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी अब न रोशनी हैं न साया। बिहार की जनता अब उनके पुराने भाषण नहीं सुनना चाहती। ये जनता अब रोजगार चाहती है, शिक्षा चाहती है, और उस नेता को चाहती है जो उनके बीच खड़ा हो। तेजस्वी यादव ऐसे ही युवा नेता हैं जो बिहार को नई दिशा देंगे। बिहार को अब सत्ता की झूठी चमक नहीं, लालटेन की सच्ची रोशनी चाहिए।”
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा की राजनीति का मतलब है “वोट के बदले झूठ”। उन्होंने कहा कि “हम समाजवादी लोग हैं, हमने जनता को पढ़ाई, सड़क और रोज़गार दिया। उन्होंने जनता को झांसे और जुमले दिए। उनके पास धर्म की बातें हैं, हमारे पास विकास की बातें हैं। उनके पास पूंजीपतियों के लिए नीतियां हैं, हमारे पास गरीब के लिए नीयत है।” अखिलेश ने कहा कि अब बिहार को उस रोशनी का चुनाव करना होगा जो समानता और स्वाभिमान का प्रतीक है, न कि उस झूठे चमकदार वादे का जो हर चुनाव के बाद बुझ जाता है।
अखिलेश यादव ने जनसभा में कहा कि बीजेपी के ‘विकास मॉडल’ में न किसान सुरक्षित है, न मज़दूर। “किसानों के खेतों की मंडियां बिक रही हैं, युवाओं के रोजगार ठप हैं, और गरीबों के घर में भूख है। भाजपा का विकास सिर्फ़ टीवी स्क्रीन पर है, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि जनता का पेट खाली है और उनकी आँखों में धूल झोंकी जा रही है। भाजपा को सत्ता की आदत है, लेकिन अब जनता उन्हें सबक सिखाने को तैयार है।”
सभा के दौरान अखिलेश यादव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “अब समय आ गया है कि बिहार के लोग दिल्ली को जवाब दें। जब यूपी और बिहार मिलकर बोलेंगे, तब दिल्ली की सत्ता की नींव हिल जाएगी। ये लालटेन सिर्फ़ एक पार्टी का प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय और असमानता के खिलाफ आंदोलन की पहचान है। जब तक गरीबों की रसोई में धुआं उठता रहेगा, तब तक यह लालटेन जलती रहेगी।”
अखिलेश यादव ने अपने भाषण के अंत में कहा, “बीजेपी वालों ने अंधेरा फैलाया है, और हम लालटेन लेकर निकले हैं। वो सत्ता की गर्मी में अंधे हो गए हैं, और हम जनता की ठंडी सांसों से बदलाव लाएंगे।” उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि “इस बार बिहार को सिर्फ़ एक सरकार नहीं, बल्कि एक सोच बदलनी है। जो सोचती है जनता के लिए, जो काम करती है दिल से — वही सच्ची राजनीति है। और यही लालटेन की पहचान है।”




