अमरनाथ प्रसाद | मुंबई | 12 जनवरी 2026
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मी के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बीच बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। पुणे–पिंपरी चिंचवड़ क्षेत्र में मेट्रो की मुफ्त यात्रा के चुनावी वादे को लेकर फडणवीस ने अजित पवार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “घोषणा करने में हमारे बाप का क्या जाता है”—असल सवाल यह नहीं है कि वादा किया गया या नहीं, बल्कि यह है कि उस वादे को ज़मीन पर कैसे उतारा जाएगा और उसका आर्थिक बोझ आखिर कौन उठाएगा। फडणवीस ने साफ कहा कि चुनावी माहौल में बड़े-बड़े ऐलान करना आसान होता है, लेकिन जिम्मेदार सरकार वही होती है जो योजनाओं की वित्तीय व्यवहारिकता, संसाधनों की उपलब्धता और उनके दीर्घकालिक असर को ध्यान में रखकर फैसले ले।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि पुणे मेट्रो जैसी महंगी सार्वजनिक परिवहन परियोजना को पूरी तरह मुफ्त करने का वादा लोकप्रियता बटोरने का जरिया तो हो सकता है, लेकिन इससे राज्य सरकार और नगर निकायों की वित्तीय सेहत पर गंभीर दबाव पड़ेगा। उनका कहना था कि विकास और कल्याण के नाम पर ऐसे फैसले भावनाओं के बजाय ठोस आंकड़ों और टिकाऊ योजना के आधार पर होने चाहिए, ताकि भविष्य में व्यवस्थाएं चरमराएं नहीं।
फडणवीस ने महायुति के भीतर बनी उस पुरानी सहमति की भी याद दिलाई, जिसमें तय हुआ था कि स्थानीय निकाय चुनावों में सहयोगी दल एक-दूसरे पर तीखे और व्यक्तिगत हमले नहीं करेंगे। लेकिन मुफ्त मेट्रो यात्रा जैसे वादों ने इस “दोस्ताना मुकाबले” की सीमा को तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पुणे का मतदाता समझदार है और वह सिर्फ आकर्षक घोषणाओं से नहीं, बल्कि काम, नतीजों और सुशासन के रिकॉर्ड से अपना फैसला करता है।
दूसरी ओर, अजित पवार समर्थित एनसीपी गुट का तर्क है कि मेट्रो और बस यात्रा मुफ्त करने से आम आदमी, छात्रों और कामकाजी वर्ग को सीधी राहत मिलेगी और इससे सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि फडणवीस के तीखे बयान के बाद यह साफ हो गया है कि महायुति के भीतर ही फ्रीबी पॉलिटिक्स को लेकर गहरी असहमति उभरकर सामने आ गई है, जो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति को और अधिक गरमाने वाली है।




