एबीसी नेशनल न्यूज | अंतरराष्ट्रीय डेस्क | 10 मार्च 2026
युद्ध की आग में झुलसता लेबनान
पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का सबसे बड़ा मानवीय असर अब लेबनान में दिखाई देने लगा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, केवल पिछले 24 घंटों में ही एक लाख से अधिक लोग लेबनान में अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए। लगातार हो रही बमबारी और निकासी आदेशों के कारण हजारों परिवार रातों-रात विस्थापित हो रहे हैं।
एक सप्ताह में 6.5 लाख से ज्यादा लोग बेघर
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के मुताबिक हालात इतने तेजी से बिगड़े हैं कि सिर्फ एक हफ्ते में करीब 6.6 लाख से अधिक लोग लेबनान में विस्थापित हो चुके हैं। यह संख्या हर दिन तेजी से बढ़ रही है और कई शहरों में राहत शिविरों की क्षमता जवाब देने लगी है।
बेरूत और दक्षिणी लेबनान सबसे ज्यादा प्रभावित
इजरायली हवाई हमलों के बाद बेरूत के दक्षिणी इलाके और दक्षिणी लेबनान के कई गांवों को खाली करने के आदेश दिए गए हैं। इन्हीं आदेशों और लगातार हो रहे हमलों की वजह से हजारों परिवार अपने घर-बार छोड़कर उत्तर के इलाकों या अस्थायी शिविरों की ओर भाग रहे हैं।
बच्चों और अस्पतालों पर भी संकट
मानवीय संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युद्ध में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। कई अस्पताल क्षतिग्रस्त हो गए हैं और दक्षिणी लेबनान के दर्जनों स्वास्थ्य केंद्र बंद हो चुके हैं, जिससे इलाज की व्यवस्था चरमरा गई है।
मानवीय आपदा की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध नहीं रुका तो यह संकट पूरे क्षेत्र में बड़ी मानवीय आपदा का रूप ले सकता है। विस्थापित लोग स्कूलों, सामुदायिक भवनों और अस्थायी शिविरों में शरण ले रहे हैं, जबकि हजारों लोग सड़कों और गाड़ियों में रात गुजारने को मजबूर हैं।
पश्चिम एशिया का युद्ध अब केवल सैन्य टकराव नहीं रहा, बल्कि आम लोगों के लिए अस्तित्व का संकट बन गया है। लेबनान में लाखों लोगों का विस्थापन इस बात का संकेत है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो पूरा क्षेत्र मानवीय त्रासदी में डूब सकता है।




