राष्ट्रीय | नई दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
पीएम मोदी की चेतावनी: पश्चिम एशिया संकट से भारत पर बड़ा असर
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के लिए “अप्रत्याशित चुनौतियां” खड़ी कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक रास्ते और भारत के करोड़ों लोगों के हित इस संकट से सीधे जुड़े हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया कि कच्चे तेल और LPG की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक असर से इनकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस का हमला: “राष्ट्रहित की बात करें, राजनीति नहीं”
प्रधानमंत्री के बयान के तुरंत बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए कहा कि संकट की आड़ में वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार को “BJP बनाम विपक्ष” की राजनीति छोड़कर राष्ट्रहित पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि सरकार आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता—LPG की उपलब्धता और कीमत—पर स्पष्ट जवाब देने से बच रही है।
LPG संकट बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
विपक्ष का सबसे बड़ा हमला LPG संकट को लेकर है। कांग्रेस सहित कई दलों ने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया में तनाव के संकेत पहले से थे, लेकिन सरकार ने समय रहते तैयारी नहीं की। नतीजतन, देश में गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी और महंगाई का दबाव आम आदमी पर पड़ा।
राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठा, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे गंभीर राष्ट्रीय समस्या बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
सरकार का पक्ष: “घबराने की जरूरत नहीं, स्थिति नियंत्रण में”
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि LPG आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 10 किलो सिलेंडर जैसी खबरों को “सिर्फ अटकल” बताया और कहा कि ऐसी कोई योजना लागू नहीं है।
इसके साथ ही सरकार लगातार राज्यों के साथ समन्वय कर रही है ताकि जमाखोरी और अफवाहों को रोका जा सके और सप्लाई चेन सुचारू बनी रहे।
विदेश नीति पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने केवल LPG ही नहीं, बल्कि सरकार की विदेश नीति को भी कटघरे में खड़ा किया है। पार्टी का आरोप है कि भारत ने पश्चिम एशिया संकट में स्पष्ट और संतुलित रुख नहीं अपनाया, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हुई। कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे “नीतिगत विफलता” तक करार दिया है, जबकि सरकार का कहना है कि वह कूटनीतिक स्तर पर शांति और स्थिरता के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
राजनीति बनाम राष्ट्रीय संकट—संदेश क्या है?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वैश्विक संकटों पर देश की राजनीति एकजुट हो पाएगी या नहीं। एक तरफ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभावों की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष आम आदमी पर पड़ रहे असर—खासतौर पर LPG और महंगाई—को लेकर सरकार को घेर रहा है।
पश्चिम एशिया का यह संकट फिलहाल केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि भारत की घरेलू राजनीति, अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई तक पहुंच चुका है—और यही इसे सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।




