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शादी सीजन से देश की अर्थव्यवस्था में चमक: 6.5 लाख करोड़ का व्यापार, स्वदेशी थीम बनी नई पहचान

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नई दिल्ली/ मुंबई 31अक्टूबर 2025

भारत में इस बार शादियों का सीजन सिर्फ खुशियों और रस्मों का नहीं, बल्कि एक आर्थिक उत्सव भी बन गया है। देशभर में 1 नवंबर से 14 दिसंबर 2025 के बीच होने वाली 46 लाख से अधिक शादियों से लगभग ₹6.5 लाख करोड़ का व्यापार होने का अनुमान है। यह आंकड़ा देश की रिटेल और सर्विस इंडस्ट्री के लिए एक नया रिकॉर्ड साबित हो सकता है।

दिल्ली अकेले ₹1.8 लाख करोड़ का कारोबार करेगी, जहाँ करीब 4.8 लाख शादियाँ होंगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस बार शादी पर खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका कारण है—लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ना, सोने-चांदी की ऊँची कीमतों के बावजूद उपभोक्ता आत्मविश्वास में इजाफा, और “वोकल फॉर लोकल” की भावना का गहराना।

सीएआईटी की रिपोर्ट बताती है कि 70% से अधिक शादी से जुड़ा व्यापार घरेलू उत्पादों पर निर्भर है। भारतीय ज्वेलरी, कपड़ा, डेकोर और हस्तशिल्प बाजार में अभूतपूर्व मांग दर्ज की गई है। ‘मेड इन इंडिया’ थीम वाले आयोजन और स्वदेशी सजावट का चलन जोरों पर है। शादी के आयोजनों में अब राजस्थानी हस्तकला, कांचीपुरम सिल्क, बनारसी ब्रोकेड, और ब्लॉक प्रिंटेड कपड़े जैसी पारंपरिक कलाएं फिर से प्रचलन में आ गई हैं।

इस बार का शादी सीजन “वोकल फॉर लोकल” और “स्वदेशी” थीम से सराबोर है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, ऋषिकेश, और गोवा जैसी डेस्टिनेशन वेडिंग लोकेशंस में होटलों की बुकिंग्स कई महीनों पहले से फुल हो चुकी हैं। राजस्थान और हिमाचल के पैलेस रिसॉर्ट्स, कोच्चि और सोलन के वेडिंग हब्स, और कूर्ग जैसे नेचर हॉलिडे स्थलों पर शानदार शादियों की तैयारियां जारी हैं।

आंकड़ों के अनुसार, शादी पर औसत खर्च ₹25 से ₹70 लाख के बीच है। हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) में से लगभग 10-15% लोग विदेशों की बजाय भारत में ही डेस्टिनेशन वेडिंग कराना पसंद कर रहे हैं — जो ‘स्वदेशी शिफ्ट’ का एक मजबूत संकेत है।

सजावट और थीम की बात करें तो ‘देसी वेडिंग डेकोर’ की मांग में 1,825% की वृद्धि दर्ज की गई है। ब्लॉक प्रिंट, जरी, ज़रदोज़ी, पीतल और हस्तनिर्मित वस्त्रों का उपयोग बढ़ा है। स्थानीय कलाकारों और ग्रामीण शिल्पकारों को शादी उद्योग में अभूतपूर्व अवसर मिल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह शादी सीजन भारत की लोकल इकॉनमी के लिए दिवाली से भी बड़ा मौका है। खानपान, परिधान, ज्वेलरी, ब्यूटी सर्विसेज, ट्रैवल, इवेंट मैनेजमेंट और डेकोरेशन जैसे क्षेत्रों में करोड़ों लोगों को रोज़गार और व्यापार के अवसर मिले हैं।

CAIT के चेयरमैन प्रवीण खंडेलवाल का कहना है — “इस बार का शादी सीजन केवल उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान का प्रतीक है। ‘वोकल फॉर लोकल’ अब नारा नहीं, एक आंदोलन बन चुका है, जिसने भारतीय बाजार को नई ऊर्जा दी है।”

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